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दरिद्र योग

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Pandit Pushpraj sharma 17th Nov 2019

दरिद्र योग का अर्थ यह है कि हमारी रोजमर्रा की जीवन में जब भी हमें मेहनत या कर्म करते हुए जो हमारे जीवन की गाड़ी आर्थिक स्थिति में रुकावट आ जाती है या संकट आ जाता है एक crisesh आ जाता है तो उसमें कहीं न कहीं आपकी जन्म पत्रिका के योगौ में दरिद्रता छुपी होती है आइए कितने प्रकार के दरिद्र योग होते जाने अपनी जन्म कुंडली से दरिद्र्योग की बात करें तो तो जन्म कुंडली केमुद्रम योग है. विष योग है अनफा योग .सुनफा योग लग्नेश कमजोर योग. गुरु नीच योग. शुक्र नीच योग या चंद्र ग्रहण योग. सूर्य ग्रहण योग विष योग
दरिद्र योग की बात करें तो कुंडली में अगर बृहस्पति नीच का या खराब स्थिति में पड़ा हुआ है ऐसे व्यक्ति के जीवन में पैसा आता तो है पर ऐसा ठहर नहीं पायेगा रोक नहीं पाए बरकत की कमी आ जाएगी
अगर जन्म कुंडली में शुक्र कहीं आपका खराब स्थिति में है तो आपके पास लक्ष्मी आकर्षित नहीं हो पाती है ज्यादा मेहनतकरने पर भी लक्ष्मी कम प्राप्त होती
अगर आपकी पत्रिका में केमदुम  दरिद्र योग  तो व्यक्ति कोल्हू का बैल बना रहता है उसकी ग्रोथ नहीं हो पाती है और जन्म से ही उसके पिताजी के द्वारा उसे कर्ज प्राप्त होता है और जीवन भर चुकाने में ही समय लग जाता है और खुद का कमाया कुंजी के काम नहीं आती है
चंद्र ग्रहण योग है तभी व्यक्ति हमेशा तनाव ग्रस्त होकर
ऐसा ही सूर्य ग्रहण में भी उसके जीवन में होता है
विश योग  है वह मानसिक रूप से धन को न  खर्च करके  कंजूसी करके दरिद्रता भोकता है
पंडित पुष्पराज आचार्य
ज्योतिष/ वास्तु केंद्र


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