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जन्म कुंडली में शनि की ढैया और उसका हमारे जीवन पर प्रभाव,How to analysis Shani's Dhaiyaa In Horoscope

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Deepika Maheshwari 18th Nov 2019

ज्योतिष शास्त्र में शनि को न्यायाधीश माना गया है. जन्म पत्रिका का आकलन करते समय शनि के प्रभाव को भी देखना बहुत जरूरी है. वह शुभ है या अशुभ. शनि एक राशि में ढाई वर्ष तक रहते हैं. गोचर के अनुसार शनि जिस राशि में स्थित होते हैं, उसके साथ ही उस राशि से दूसरी और बारहवीं राशि पर शनि का प्रभाव साढ़ेसाती कहलाता है. जन्म कुंडली में जिस राशि में चंद्रमा होता है, उस राशि से चतुर्थ और अष्टम भाव में शनि का गोचर ढैया कहलाता है. शनि एक साथ 5 राशियों को सीधे-सीधे अपना असर डालते हैं। एक समय में तीन राशियों पर शनि की साढ़ेसाती और दो अन्य राशियों पर ढैय्या जरूर रहती है। इस समय शनि धनु राशि में है। इस कारण वृश्चिक, धनु और मकर राशि पर शनि की साढ़ेसाती है। जबकि वृष और कन्या राशि पर शनि की ढैय्या का प्रभाव है। शनि की ढैया और साढ़ेसाती हमेशा हमारे कर्मों के आधार पर शुभ या अशुभ परिणाम देती है, क्योंकि शनि को कर्म का कारक माना गया है!ढैया के दौरान शनि विभिन्न राशि मे अलग-अलग फल देता है। इस समय कार्य में बाधाएँ, काम में देरी, मानसिक तनाव तथा अन्य प्रकार के कष्टों का सामना करना पड़ता है। इन सबसे बचने के लिए ज्योतिष में शनि ग्रह से संबंधित उपाय किये जा सकते है!


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