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जन्म कुंडली में शनि की साढ़ेसाती और उसका हमारे जीवन पर प्रभाव ,How to analysis Shani's Sadesatti In Horoscope

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Deepika Maheshwari 28th Nov 2019

ज्योतिष शास्त्र में शनि को न्यायाधीश माना गया है. जन्म पत्रिका का आकलन करते समय शनि के प्रभाव को भी देखना बहुत जरूरी है. वह शुभ है या अशुभ. हम पर साढ़ेसाती चल रही है या नहीं इस बात को हमेशा शनि के गोचर और चंद्र राशि को देखकर निर्धारित किया जाता है शनि एक राशि में ढाई वर्ष तक रहते  हैं.   गोचर के अनुसार शनि जिस राशि में स्थित होते हैं, उसके साथ ही उस राशि से दूसरी और बारहवीं राशि पर शनि का प्रभाव साढ़ेसाती कहलाता है. शनि गोचर करते हुए जन्म नाम राशि या चंद्र राशि से12वीं राशि मैं आ जाए तो साढ़ेसाती का समय निर्धारित होता है! इस समय शनि धनु राशि में है। इस कारण वृश्चिक, धनु और मकर राशि पर शनि की साढ़ेसाती है पर जैसे ही शनि गोचर करते हुए धनु से मकर राशि में आ गए तो वृश्चिक राशि वालों पर साढ़ेसाती खत्म हो जाएगी और धनु मकर और कुंभ राशि वालों पर साढ़ेसाती का असर अगले ढाई वर्ष के लिए हो जाएगा! शनि की साढ़ेसाती हमेशा हमारे कर्मों के आधार पर शुभ या अशुभ परिणाम देती है, क्योंकि शनि को कर्म का कारक माना गया है! साढ़ेसाती काल में शनि विभिन्न राशि मे अलग-अलग फल देता है। इस समय कार्य में बाधाएँ, काम में देरी, मानसिक तनाव तथा अन्य प्रकार के कष्टों का सामना करना पड़ता है। इन सबसे बचने के लिए ज्योतिष में शनि ग्रह से संबंधित उपाय किये जा सकते है!

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