Facebook Blogger Youtube

ज्योतिषीय योगों के कारण बनते हैं अनैतिक संबंध

Astro Arvind shukla 10th Sep 2017

 ज्योतिषीय योगों के कारण बनते हैं अनैतिक संबंध

 एक्सट्रा मैरिटल अफेयरस के ज्योतिषीय कारण:

ज्योतिषशास्त्र जातक पारिजात अनुसार द्वितीयेश, सप्तमेश, षष्ठेश व शुक्र पापग्रह से युक्त होकर लग्न में हो। या लग्नेश व षष्ठेश पापग्रह से युक्त हो। कोई पाप ग्रह षष्ठेश, धनेश व लग्नेश से युक्त होकर सप्तम भाव में हो। पापग्रहों के साथ, षष्ठेश व सप्तमेश अगर नवम भाव में हों, तो व्यक्ति कामातुर होता है। यदि गुरु, बुध व चंद्र सप्तम में हो। बलवान शुक्र सप्तम में हो। या गुरु व बुध अथवा चंद्र, शुक्र यदि सप्तम भाव में संयुक्त हों। या नवम, द्वितीय व सप्तम भाव के स्वामी यदि दशम भाव में स्थित हों। या शुक्र शत्रु भाव में शनि राहु, मंगल से पीड़ित हो व शुभ ग्रहों की युति या दृष्टि न हो। 

पीड़ित शुक्र सप्तम भाव में या सप्तमेश राहु से दृष्टि या युति का संबंध रखता हो। द्वितीयेश व सप्तमेश शुक्र संग लग्न में व शुभ दृष्टि रहित हो। या शुक्र, शनि या मंगल की राशि में या दृष्ट हो, शुभ दृष्टि न हो। सप्तम भाव में शुक्र के ऊपर शनि, राहु, केतु का प्रभाव हो। नवमेश, शुक्र या चंद्र से युति रख बुरे प्रभाव में हो। तो व्यक्ति के एक्सट्रा मैरिटल अफेयर बनते है। बृहत पाराशर होरा शास्त्र अनुसार यदि किसी महिला की कुंडली में मंगल व शुक्र में राशि परिवर्तन या नवांश परिवर्तन हो। यदि महिला की कुंडली में सप्तम भाव में चंद्र, शुक्र व मंगल की युति हो।यदि किसी महिला की कुंडली में सप्तम भाव में चंद्र स्थित हो तथा वह मंगल या शनि के नवांश में हो। यदि किसी महिला की कुंडली में सप्तम भाव में सूर्य व मंगल कर्क राशि में हो। 

लग्न, चंद्र व लग्नेश तीनों ही चर राशि में हो तथा पाप पीड़ित हो तो महिला के विवाहेतर संबंध बनते है। यदि किसी पुरुष की कुंडली में सप्तमेश परमोच्च में होकर शनि की राशि में शुभ ग्रहों से देखा जाता हो या शुक्र की राशि में उच्च का हो। सातवे भाव में भौम, शुक्र हों और लग्नेश आठवे भाव में हो। शुक्र द्विस्वभाव राशि में हो, द्विस्वभाव राशि का स्वामी अपने उच्च में हो व सप्तमेश बली हो। या सप्तमेश, नवम या दूसरे भाव में हो तो पुरुष के एक्सट्रा मैरिटल अफेयर बनते है। 15 से 30 वर्ष की आयु तक ऐसी महादशा, अंतर्दशा या गोचरीय प्रभाव आने पर एक्सट्रा मैरिटल अफेयर बनते है।

यदि विश्व स्तर पर विचार किया जाए सबसे अधिक पश्चिमी देशों में एक्सट्रा मैरिटल अफेयरस बनते है। इसका कारण पश्चिम दिशा होने की वजह से तुला राशि (शुक्र) एवं शीत (चंद्र) का प्रभाव है। चंद्र मन का प्रतिनिधित्व करता है और मन काम शक्ति का कारक है। सभी प्रकार के संबेधों का कारण यही है। जब चंद्र की दृष्टि, युति आदि सूर्य से हो, तो संबंध में आश्रय पाने के विचार होते हैं। मंगल कारण कर्मठ व्यक्तियों से, बुध के कारण व्यापारी वर्ग से, गुरु के कारण आध्यात्मिक क्षेत्र से जुड़े व्यक्तियों से, शुक्र के कारण विपरीत लिंग से और शनि के कारण आलोचना करने वालों से संबंध होते हैं।राहु-केतु के कारण उनके स्वामी के अनुरूप ही संबंध होते हैं। मंगल तथा शुक्र के कारण एक्सट्रा मैरिटल अफेयर बनते हैं। लेकिन इनके साथ चंद्र की भी अहं भूमिका होती है। और इन योगों में शनि का योगदान अनैतिक संबंध कारक माना जाता है। निर्बल मंगल गोपनीय संबंध बनाकर विवाहोपरांत जीवन को कष्टमय बना देता है।


Comments

Post
Top