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जानिए कुंडली में केंद्र ,त्रिकोण ,त्रिक भाव और उनका महत्व ,kendra Trikon and Trik house and its importance.

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Deepika Maheshwari 31st Jul 2019

जन्मकुंडली के 12 भावों की अपनी अपनी विशेषताएं हैं। किंतु ये जानना रोचक होगा कि कुछ भाव विशेष किन नामों से जाने जाते हैं और उनका फल क्या होता है.
कुण्डली का 1, 4, 7 और 10वां भाव केंद्र होता है तो 1, 5, 9 भाव त्रिकोण भाव होते है।पहला भाव केंद्र और त्रिकोण दोनों होता है लग्न के बाद कुंडली के त्रिकोण भावो का महत्व सबसे अधिक होता है केंद्र भाव कुंडली की ताकत होते है इन भावो में यदि कोई भी ग्रह न बेठे साथ ही त्रिकोण जो योगकरक और शुभ भाव है इनमे कोई ग्रह न बेठा हो ! तब ऐसी स्थिति कुंडली को कमजोर बनाती है।इस तरह की कुंडली में ग्रह अपना पूरी तरह से प्रभाव नही दिखा पाते, ऐसे जातको को अपने किये हुए काम का भी पूरी तरह से फल नही मिल पाता!भारतीय ज्योतिष में त्रिक भाव अर्थात्- 6,8 और 12 भावों को बुरे फल की श्रेणी में रखा गया है। 






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