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निर्माण योग

Pandit Pushpraj sharma 16th Nov 2019

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निर्माण योग जन्म कुंडली के द्वितीय स्थान और भाग्य स्थान जब एक साथ हो प्रबल राजयोग हैं कुंडली का भाग्य केंद्र में हो द्वितीय दशम में हो या दोनों एक साथ कहीं पर भी बैठ जाए तो यह निर्माण योग बनता है और निर्माण योग में चतुर्थेस अगर भाग्य से संबंध रख कर कहीं पर भी बैठ जाए तो निर्माण योग बनता है चतुर्थेस द्वितीय के साथ में बैठकर केंद्र में हो जाए तो निर्माण क होता है निर्माण योग में लग्नेश अगर द्वितीयेस भाग्येस के साथ संबंध बनाए तो यह निर्माण होता है निर्माण योग्य एक ऐसा ही होगा जिसमें व्यक्ति अपने जीवन काल में भवन बंगला मकान या जमीन खरीद कर अपने आवास की व्यवस्था कर पाता है और भी कई बातें हैं जैसे गोल्ड की ज्वेलरी बनाना. जिसे गोल्ड खरीदना. जैसे मकान के अंदर सुख-सुविधाओं को खरीद पाना
उदाहरण

प्मेरी कुंडली मेरा डेट ऑफ बर्थ है 12 फरवरी 1982 समय है 11:01 प्रातः काल जन्म स्थान भीलवाड़ा  मेरी जो कुंडली मैष लगन की है
इसमें 2010 बृहस्पति की महादशा है और इसके अंदर 2019 से शुक्र की अंतर्दशा दो चल रही है जो 2021 तक
रहेगी
इसमें मैंने अपना प्लाट पर जनवरी 2019 में निर्माण आरंभ किया जो कंटिन्यू अभी चल रहा है वह लगभग मकान पूर्ण होने की स्थिति में है जब मैंने अपनी कुंडली देखी तो वास्तव में पाया कि भाग्येष बृहस्पति जो की महादशा के अंदर विद्यमान है और द्वितीयेष शुक्र है वह गुरु के अंदर ऑया तभी मकान का निर्माण  स्वतःहुआ
यही निर्माण योग है


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