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कब और कैसे मनाई जाएगी मकर सक्रांति ,मकर संक्रांति पर किए दान पुण्य का महत्व

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Deepika Maheshwari 14th Jan 2020

इस वर्ष 15 जनवरी 2020 को मकर सक्रांति का पावन पर्व मनाया जाएगा, सबसे पहले जानते हैं कि सक्रांति होती क्या है और उसमें भी मकर सक्रांति किसे कहते हैं सूर्य का किसी विशेष राशि में जाना या गोचर करना सक्रांति कहलाता है जब सूर्य किसी खास राशि में भ्रमण करते हैं तो उसे सक्रांति कहते हैं जैसे मेष राशि में जाएंगे तो मेष सक्रांति वृष राशि में सूर्य भ्रमण करेंगे तो उसे वृष सक्रांति कहा जाएगा इसी तरह से जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे तो उसे मकर सक्रांति कहा जाता है सूर्य लगभग 1 महीने तक एक राशि में रहते हैं और 1 महीने के बाद वह दूसरी राशि में गोचर करते हैं और कुल मिलाकर 12 राशियां होती है तो वर्ष में 12 सक्रांति होती है लेकिन सभी सक्रांति मे दो सक्रांतियों का विशेष महत्व होता है उनमें से एक है मकर संक्रांति और एक है कर्क संक्रांति !मकर संक्रांति यानी जब सूर्य मकर राशि में जाते हैं और कर्क सक्रांति को कर्क राशि में जाते हैं , मकर संक्रांति से अग्नि तत्व की शुरुआत होती है यानी मौसम और वातावरण में गर्मी आनी शुरू होती है क्योंकि सूर्य जब 14 और 15 जनवरी के आसपास मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो मौसम में धीरे-धीरे गर्माहट होनी शुरू हो जाती है और अग्नि तत्व का प्रभाव आना शुरू होता है !कर्क संक्रांति है जो तकरीबन जुलाई में आती है उससे जल तत्व की शुरुआत होती है यहां से बरसाती मौसम और धीरे-धीरे सर्दियां शुरू हो जाती है तो जुलाई से कर्क सक्रांति और जनवरी से मकर सक्रांति की शुरुआत होती है इस समय सूर्य उत्तरायण होते हैं सूर्य के पास दो आयन है उत्तरायण और दक्षिणायन सूर्य जुलाई के बाद दक्षिणायन में चले जाते हैं जिसे दैत्यों का समय भी कहा जाता है और जब सूर्य जनवरी के समय मकर सक्रांति में उत्तरायण होते हैं तो उसे देवताओं का समय कहा जाता है उत्तरायण सूर्य को बेहद शुभ माना जाता है ! हम अपने पर्व और त्योहार हिंदू पंचांग के अनुसार बनाते हैं जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे तभी मकर सक्रांति मानी जाएगी 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाए जाने के पीछे एक बड़ी वजह यह है कि इस साल सूर्य का मकर राशि में आगमन 14 जनवरी मंगलवार की मध्य रात्रि के बाद रात 2 बजकर 7 मिनट पर हो रहा है। मध्य रात्रि के बाद संक्रांति होने की वजह से इसके पुण्य काल का विचार अगले दिन ब्रह्म मुहूर्त से लेकर दोपहर तक होगा।इस लिये मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाना ज्यादा बेहतर होगा! मकर सक्रांति और ज्योतिषीय महत्व अब जानेंगे कि मकर सक्रांति का ज्योतिष से क्या संबंध है ज्योतिष शास्त्र मे सूर्य और शनि का संबंध इस पर्व से होने से यह पर्व काफी महत्वपूर्ण है ऐसा माना जाता है कि सूर्य इस त्यौहार पर अपने पुत्र शनि से मिलने के लिए आते हैं क्योंकि मकर राशि शनिदेव की है इसके अलावा शुक्र मकर सक्रांति पर उदय हो जाते हैं शुभ कार्य की शुरुआत हो जाती है मकर सक्रांति एक ऐसा दिन है जिस दिन उपायों द्वारा सूर्य और शनि के बुरे प्रभाव को समाप्त किया जा सकता है मकर सक्रांति पर नया अनाज भी आता है और उस नए अनाज से से नवग्रह की पूजा की जाती है जिससे कि पारिवारिक शांति बनी रहे इस तरह मकर सक्रांति सूर्य और शनि दोनों की कृपा प्राप्त करने का दिन है मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण होते हैं इसलिए बहुत खास माना जाता है भीष्म पितामह जब बाणों की शैया पर लेटे हुए थे उन्होंने भी इस चीज को बहुत ध्यान में रखते हुए दक्षिणायन सूर्य में अपना शरीर नहीं त्यागा जैसे ही सूर्य उत्तरायण हुए तभी अपने शरीर का त्याग किया उत्तरायण सूर्य की महत्ता काफी बढ़ जाती है और यही कारण है कि इस दिन के लिए दान पुण्य का बहुत महत्व माना जाता है भारत में मकर संक्रांति का बहुत गहरा धार्मिक महत्व है। इसके अलावा ऐसी भी मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने असुरों को पराजित किया था। कहा जाता है कि भगवान ने असुरों के सिरों को मंदार पर्वत में दबा दिया था। ऐसे में इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में भी मानाया जाता है। क्योंकि मकर राशि का स्वामी शनि है।ज्योतिषीय दृष्टि से सूर्य और शनि का तालमेल संभव नहीं है, क्योंकि दोनों आपस में शत्रु का भाव रखते हैं लेकिन इस दिन सूर्य खुद अपने पुत्र के घर जाते हैं। इसलिए इस त्यौहार के पीछे पिता-पुत्र के संबंधों को भी माना जाता है। एक अन्य कथा के अनुसार गंगा को महाराज भगीरथ ने इस दिन अपने पूर्वजों के लिए तर्पण किया था। उनका तर्पण स्वीकार करने के बाद इस दिन गंगा समुद्र में जाकर मिल गई थी। इसलिए इस दिन गंगा में स्नान करने को पवित्र समझा जाता है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पवित्र नदी में स्नान, दान, पूजा आदि करने से व्यक्ति का पुण्य प्रभाव हजार गुना बढ़ जाता है। इस दिन से मलमास खत्म होने के साथ शुभ माह प्रारंभ हो जाता है। इस खास दिन को सुख और समृद्धि का दिन माना जाता है।मकर संक्राति के दिन विशेष रूप से गंगा स्नान का महत्व है। उत्तर प्रदेश और उससे सटे राज्यों में इसे खिचड़ी' भी कहते हैं। इस दिन पवित्र नदियों में डुबकी लेना सबसे शुभ माना जाता है। कहते हैं कि इस अवसर पर गंगा स्नान करने से इंसान के सारे पाप धुल जाते हैं। वैसे तो इस मौके पर पूरे देश में मेला लगता है लेकिन प्रयागराज (इलाहाबाद) में इस दौरान एक महीना माघ मेला चलता है। हर साल गंगा सागर में एक बहुत बड़ा मेला आयोजित किया जाता है। पुराणों में मकर संक्रान्ति का काफी विस्तार से वर्णन मिलता है। पौराणिक विवरण के अनुसार, उत्तरायण देवताओं का एक दिन एवं दक्षिणायन एक रात्रि मानी जाती है। मकर सक्रांति के दिन आपको दो ग्रहों का वरदान मिल सकता है सूर्य और सूर्य पुत्र शनि से लाभ पाने के लिए विशेष चीजों से विशेष प्रयोग किए जाएं तो शुभ फल मिलेगा मकर सक्रांति पर किए जाने वाले शुभ कर्मों में सबसे पहले प्रात काल स्नान कर लेना चाहिए 1. तांबे के पात्र में पानी भरकर लाल फूल, अक्षत, कुमकुम डालकरी सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए और सूर्य के बीज मंत्र का 108 बार जप कीजिए( ओम घृणि सूर्याय नमः) 2. श्रीमद्भागवत के 1 अध्याय का पाठ करें गीता का पाठ करें और अगर पूरी गीता का पाठ नहीं कर पाते तो गीता के 11 अध्याय का पाठ करें 3. नई अनाज का खासतौर से दाल ,चावल का खिचड़ी, तिल, गुड, तांबा ,लाल वस्त्र ,कंबल का ,मोटे कपड़ों का और शुद्ध देसी घी, गेहूं का दान किसी निर्धन व्यक्ति को इस दिन जरूर करें 4. भोजन में नए अनाज, काली दाल व चावल की खिचड़ी बनाएं प्याज लहसुन आदि का प्रयोग ना करें सात्विक भोजन बनाए भगवान को भोग लगाएं और इसके बाद इसको प्रसाद रूप में ग्रहण करें और अपने घर में परिवार में बांटे तो आपके लिए बहुत शुभ होगा 5. लोहे के बर्तन में या कटोरी में काले तिल रखकर 108 बार ओम शं शनिश्चराय नमः मंत्र का जाप करके उसे निर्धन व्यक्ति को दान कर दीजिए इस उपाय से शनि से मिल रही पीड़ा से मुक्ति मिलेगी अगर तिल और गुड़ के लड्डू या मिठाई किसी गरीब को दी जाए तो आपकी कुंडली की खराब सूर्य और शनि बेहतर हो जाते हैं 6. मकर सक्रांति पर नये अनाज की खिचड़ी खाने से पूरे वर्ष आरोग्य की प्राप्ति होती है खिचड़ी खाने से व बाटंने से आपके सारे ग्रह मजबूत होते हैं सूर्य अगर कुंडली में खराब है तो शाम को अन्न का सेवन नहीं करना चाहिएयह सब उपाय करने से कुंडली के बिगड़े हुए सूर्य निश्चित रूप से बेहतर होगा सूर्य देव की कृपा बरसेगी और शुभ फल मिलेगा🙏 सूर्य से ज्यादा लोग शनि से डरते हैं लेकिन शनिदेव को खुश करने के लिए भी मकर सक्रांति पर कुछ उपाय किए जा सकते हैं मकर सक्रांति पर पूजा उपासना करके शनि को भी बेहतर किया जा सकता है शनिदेव के मंत्रों का ज्यादा से ज्यादा जाप करना चाहिए, काले तिल और लोहे के बर्तन का दान करना भी मकर सक्रांति पर शनि की बुरे प्रभाव से बचाता है शनि को प्रसन्न करना है तो दिन मैं भोजन नहीं करना चाहिए और शाम के समय काले उड़द की खिचड़ी बनाकर भगवान को भोग लगाना है और गरीबों में वितरित करना चाहिए अगर कुंडली में शनि खराब हैभगवान सूर्य को काले तिल के दाने डालकर जल अर्पित करिए इस दिन सुबह सूर्य को जल चढ़ाना और शाम को पीपल के वृक्ष पर तेल का दिया जलाने से कुंडली में सूर्य और शनि की खराब स्थिति बेहतर होती है मकर सक्रांति के दिन सूर्य और शनि को बेहतर करने की उपाय करने के साथ-साथ नित्य कर्म करना बहुत जरूरी है दान हमेशा श्रद्धा और मन से किया जाना चाहिए मकर सक्रांति पर किसी निर्धन और गरीब व्यक्ति को दान करने से माना जाता है कि व्यक्ति के जीवन में सुख समृद्धि और संपन्नता आती है इस लिये दान अवश्य कीजिए ! दीपिका माहेश्वरी🙏🙏


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