राहु की संगत बनाम शक्ति की रंगत

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Acharyaa Rajesh 22nd Sep 2019

राहु की संगत बनाम शक्ति की रंगतकुंडली मे राहु जिस ग्रह के साथ गोचर करता है या जिस ग्रह के साथ जन्म समय से विराजमान होता है वही शक्ति जीवन के अन्दर काम करने के लिये मानी जाती है। घर की छत की शक्ति होती है कि वह हवा पानी धूप से रक्षा करती है,छतरी की शक्ति होती है कि वह पानी और धूप से शरीर को बचाती है,धूप की शक्ति होती है कि वह शरीर मे गर्मी पहुंचाती है,बरसात की शक्ति होती है कि वह शरीर को भीगने का सुख देती है,सर्दी की शक्ति होती है कि वह शरीर को ठंडा रखने का सुख देती है। यानी जहां जहां शक्ति है वहां वहां राहु की छाया है,घर की छत को भी राहु की उपाधि दी जाती है तो छतरी को भी राहु कहा जाता है,सूर्य की छाया यानी धूप भी राहु की श्रेणी मे आजाती है चन्द्रमा की शीतलता भी राहु की श्रेणी मे गिनी जाती है. इस प्रकार से जब ब्रह्माण्ड का कारक राहु ही है तो राहु से डरने का कारण क्या हो सकता है। जब राहु जिस ग्रह के साथ होता है तो उस ग्रह के बारे मे असीमित भावना को भर देता है,वह भावना अगर जन्म के राहु से टकरा रही है तो वह एक अमिट छाप यानी मोहर को लगा देती है।राहु के साथ अगर सूर्य है शुक्र है तो राहु राजसी ठाटबाट को प्रस्तुत करने से चूकेगा नही उसी जगह पर अगर राहु के साथ मे शनि है वक्री बुध है तो उस आदमी को झूठ बोलने और चालाकी से काम निकालने के अलावा कुछ आता भी नही होगा। उदाहरण के लिये अपने क्रिकेत खिलादी सचिन तेन्दुलकर को ही देख लो कहने को तो राहु चौथे भाव मे बैठा है चन्द्रमा के साथ है अष्टम के सूर्य शुक्र से युति है तो वह राजकीय रूप से जनता के मन से धन धान्य के द्वारा आगे बढाने के लिये कमी नही दे रहा है। इसी बात को अगर और देखा जाये तो राहु का योग चौथे भाव मे भी है और राहु का योग अगर अष्टम भाव मे हो जाता है तो राहु अन्दरूनी भेद को भी जानने वाला बना देताहै,सचिन की कुंडली मे जन्म कुंडली से राहु चौथे भाव मे है और जिस घडी मे सचिन पैदा हुये है उस घडी मे राहु अष्टम मे बैठा हुआ है,अगर कारकांश कुंडली से देखा जाये तो भी चौथे भाव को मजबूत कर रहा है और उसे अगर होरा लगन से देखा जाये तो सीधा जाकर लाभ मे बैठ जाता है,इस प्रकार से जीवन मे प्रसिद्धि धन धान्य के लिये राहु अपनी गति को पूर्ण रूप से प्रदान करने वाला होता है। चन्द्र कुंडली से जब राहु लगन मे हो तो वह अपनी शक्ति को मजबूती से पैर जमाने के लिये और खुद की सोच से आगे बढने वाला भी बना देता है,नवांश से यह राहु अगर सप्तम मे चला जाये और शनि के साथ शुक्र का प्रभाव देकर आच्छादित कर दे और भी सोने मे सुहागा बना देने के लिये अपनी गति को और भी प्रदान करने वाला बन जाता है। तीसरा सप्तम का और ग्यारहवा राहु अगर सही स्थिति मे है तो वह प्रसिद्धि देने के लिये बहुत ही उत्तम माना जाता है।वर्तमान मे राहु का गोचर तीसरे भाव मे है और वह सचिन को प्रसिद्धि दे रहा है तो अभी कुछ दिन पहले ही उन्हे सौवां शतक देकर इस राहु ने नवाजा है। इसके अलावा भी एक बात और भी सही है कि जब कुंडली मे राहु चौथा होता है तो वह धर्मी हो जाता है वह किसी भी प्रकार से जीवन मे खराबी नही पैदा कर सकता है चन्द्रमा के साथ होने से मां का आशीर्वाद हमेशा साथ रहने वाला होता है जो लोग मां को घूरा कूडा समझते है उन्हे इस बात को समझ लेना चाहिये कि जब तक माता का आशीर्वाद साथ है दुनिया साथ है जैसे ही इस आशीर्वाद मे बददुआ मिल जाती है अपना शरीर भी काम नही आता है। । ग्रहों की स्थिति के साथ ही हम बात करते हैं महादशाओं की। किसी भी जातक को उसकी कुंडली के शुभ ग्रहों का फल उस ग्रह महादशा अंतर्दशा में माना जाएगा या गोचर से माना जाएगा मंगल की महादशा के बाद प्रारंभ हुई राहु की महादशा। राहु की महादशा के प्रारंभ होते ही शुरू हुआ सचिन की सफलताओं का वह स्वर्णिम सफर जिसे कोई भूल नहीं सकता। राहु चतुर्थ भाव में लाभेश चंद्रमा से युत होकर स्थित हैं तथा दशम भाव को पूर्ण दृष्टि प्रदान कर रहे हैं। राहु धनेश शुक्र व लाभेश चंद्रमा के नक्षत्र व उपनक्षत्र में बैठकर नीचभंग राजयोग भी बना रहे हैं। राहु मिथुन राशि में उच्च के होते हैं। राहु के उच्चनाथ बुध सप्तम भाव में अर्थात लग्न से केंद्र में बैठे हैं जिस कारण राहु का नीच भंग हो गया है। 18 वर्ष की राहु की महादशा में सचिन को वह सब कुछ मिला जिसकी हर व्यक्ति की चाह होती है। अब तक अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में उनकी पकड़ बन चुकी थी। उनका प्रेम परवान चढ़ा और पारिवारिक सहमति से उनका विवाह भी हो गया। यहां पर हम कुंडली की व्याख्या नहीं करेंगेसचिन तेंदुलकरः कोच या कमेंटेटर के रूप में आ सकते है नजर सचिन ने इस समय क्रिकेटे के खेल से भले ही निवृत्ति ले ली हो, पर क्रिकेट का मैदान नहीं छोड़ेंगे। कहने का अभिप्राय यह है कि आगामी समय में सचिन कोच या कमेंटेटर के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकते हैं। कुंडली के अनुसार जब राहु का गोचर में इसी स्थान पर में आगमन होगा तब इनको किसी रूप में आकस्मिक लाभ होने के आसार हैं। मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को बीच विदेश में किसी प्रकार का सम्मान मिलने की संभावना है। आपका भाग्य अापको किस और ले जाएगा, इसका जवाब आप हमारे future studies online service पर फोन कर हमारे सभी Astrologer वोहोत ही अच्छे और अनुभवी हैं आप की कोई भी समस्या है तो उसका उपाय चाहते हैं तो आप हमारे नम्वरो पर सम्पर्क कर सकते हैं घन्यावाद


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यस्मिन् जीवति जीवन्ति बहव: स तु जीवति | काकोऽपि किं न कुरूते चञ्च्वा स्वोदरपूरणम् || If the 'living' of a person results in 'living' of many other persons, only then consider that person to have really 'lived'. Look even the crow fill it's own stomach by it's beak!! (There is nothing great in working for our own survival) I am not finding any proper adjective to describe how good this suBAshit is! The suBAshitkAr has hit at very basic question. What are all the humans doing ultimately? Working to feed themselves (and their family). So even a bird like crow does this! Infact there need not be any more explanation to tell what this suBAshit implies! Just the suBAshit is sufficient!! *जिसके जीने से कई लोग जीते हैं, वह जीया कहलाता है, अन्यथा क्या कौआ भी चोंच से अपना पेट नहीं भरता* ? *अर्थात- व्यक्ति का जीवन तभी सार्थक है जब उसके जीवन से अन्य लोगों को भी अपने जीवन का आधार मिल सके। अन्यथा तो कौवा भी भी अपना उदर पोषण करके जीवन पूर्ण कर ही लेता है।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।

न भारतीयो नववत्सरोSयं तथापि सर्वस्य शिवप्रद: स्यात् । यतो धरित्री निखिलैव माता तत: कुटुम्बायितमेव विश्वम् ।। *यद्यपि यह नव वर्ष भारतीय नहीं है। तथापि सबके लिए कल्याणप्रद हो ; क्योंकि सम्पूर्ण धरा माता ही है।*- ”माता भूमि: पुत्रोSहं पृथिव्या:” *अत एव पृथ्वी के पुत्र होने के कारण समग्र विश्व ही कुटुम्बस्वरूप है।* पाश्चातनववर्षस्यहार्दिकाःशुभाशयाः समेषां कृते ।। ------------------------------------- स्वत्यस्तु ते कुशल्मस्तु चिरयुरस्तु॥ विद्या विवेक कृति कौशल सिद्धिरस्तु ॥ ऐश्वर्यमस्तु बलमस्तु राष्ट्रभक्ति सदास्तु॥ वन्शः सदैव भवता हि सुदिप्तोस्तु ॥ *आप सभी सदैव आनंद और, कुशल से रहे तथा दीर्घ आयु प्राप्त करें*... *विद्या, विवेक तथा कार्यकुशलता में सिद्धि प्राप्त करें,* ऐश्वर्य व बल को प्राप्त करें तथा राष्ट्र भक्ति भी सदा बनी रहे, आपका वंश सदैव तेजस्वी बना रहे.. *अंग्रेजी नव् वर्ष आगमन की पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं* ज्योतिषाचार्य बृजेश कुमार शास्त्री

आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताआलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।राम।

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