कुंडली मे गोचर का फल कैसे देखते है, कौनसे ग्रह का गोचर शुभ रहेगा और कौनसे का अशुभ।

Share

Deepika Maheshwari 19th Sep 2019

कुंडली देखते समय कोई भी जातक हो उसकी यह इच्छा जरूर रहती है मुझे यह फल कब कैसा मिलेगा या मेरे इस कार्य पर फल कैसा होगा? नवग्रहों में हर एक ग्रह का गोचर जातक ओर रहता है लेकिन सबसे महत्वपूर्ण गोचर महादशा ग्रह और अंतरदशा ग्रह का होता है क्योंकि यही दो महत्वपूर्ण ग्रह होते है जो जातक के जीवन मे उसको फल दे रहे होते है जिस समय भी जिस ग्रह की महादशा या अंतरदशा चल रही होती है।किस ग्रह के गोचर का फल कैसा होगा यह कुंडली से देखा जा सकता है लेकिन जो महत्वपूर्ण गोचर होता है महादशा और अंतरदशा का उसका फल जातक को कैसा मिलेगा उदाहरण_अनुसार:- कन्या लग्न की कुंडली में राहु छठे भाव मे गोचर में आया हो तब क्या होगा तब छठे भाव से राहु की 5वी दृष्टि दशवे भाव पर होगी और 9वी दृष्टि दूसरे भाव पर जाएगी साथ ही 7वी दृष्टि 12वे भाव पर जाएगी इसमे दूसरा भाव धन, 12वा भाव हानि, दसवा भाव रोजगार, नोकरी/व्यापार का होता है।अब छठे भाव से राहु दसवे, दूसरे और बारहवे तीन भावो को पीड़ित कर रहा है तो ऐसी स्थिति में राहु जातक को उसके रोजगार, नोकरी/व्यवसाय, धन की हानि करेगा क्योंकि राहु गोचर के छठे भाव से धन, नोकरी/व्यवसाय, और हानि के भाव बारहवे को प्रभावित कर रहा है जिस कारण ऐसे राहु के गोचर में धन की दिक्कत, कार्य छेत्र में दिक्कते राहु के कारण बढ़ जाएगी और ऐसे राहु गोचर के समय दशा भी राहु या किसी अशुभ ग्रह की हुई तब धन, रोजगार में बहुत नुकसान जातक को उठाना पड़ेगा।इस तरह से छठे भाव का राहु गोचर दिक्कते करेगा दशा यदि शुभ फल देने वाले ग्रह की उस समय हुई तब राहु गोचर दिक्कत जरूर देगा लेकिन दिक्कतों से निकालने का रास्ता भी मिल जाएगा।। दूसरे_उदाहरण_अनुसार:-अब माना जाय कि किसी जातक पर शनि की महादशा है और शनि गोचर में 5वे भाव मे किसी जातक के गोचर करे तब शनि की सातवीं दृष्टि लाभ(ग्यारहवे स्थान)पर होगी और दसवीं दृष्टि धन भाव(दूसरे भाव) पर होगी ऐसी स्थिति में शनि की।चलने वाली इस दशा और गोचर में जातक को धन संबंधी और आय संबंधी दिक्कते और नुकसान उठाने पड़ेंगे क्योंकि महादशा नाथ शनि गोचर से दूसरे/ग्यारहवे धन संबंधी दोनो घरो को पीड़ित कर रहा ! शुभ_फल_देने_वाला_गोचर:- सिंह लग्न की कुंडली मे यदि गुरु चौथे भाव मे गोचर में आ जाये और महादशा या अंतरदशा भी गुरु की चल रही हो तब चौथे भाव का गुरु दशम को देखेगा जिस कारण से जातक को अपनी नोकरी/व्यवसाय या कार्य छेत्र में उन्नति के रास्ते मिलेंगे या जो जातक नोकरी के लिए प्रयास कर रहे होते है उनको ऐसा गुरु का गोचर नोकरी दिलाकर उनका भविष्य सुधार देता है।। अब मीन लग्न कुंडली मे गुरु छठे भाव मे गोचर में हो तब इसकी 5वी दृष्टि दशम भाव पर होगी मीन लग्न में दशम भाव का स्वामी गुरु ही होता है साथ ही इसकी 9वी दृष्टि दूसरे भाव पर होगी जिस कारण गुरु का यह गोचर मीन लग्न के जातको के लिए बहुत शुभ होगा क्योंकि दशम भाव पर स्वग्रही(खुद की राशि पर दृष्टि) कार्य छेत्र में उन्नति देगी या नोकरी/कारोबार से लाभ देगी और दूसरे भाव पर भी दृष्टि होने से धन-धान्य की वृद्धि होगी।इस तरह से ग्रहो का गोचर और जिन ग्रहो की महादशा/अंतरदशा चल रही है उनका गोचर शुभ परिणाम देने वाला है या नही और शुभ या अशुभ परिणाम देगा तो कितनी मात्रा में देगा यह जातक की कुंडली मे चल रही ग्रहो की दशा और ग्रह योगों की स्थिति पर निर्भर करेगा इस तरह से गोचर भी जातक को उन्नति तक ले जा सकता है और नीचे भी गिरा सकता है।


Like (64)

Comments

Post

anshmaheshwari

nice article


Latest Posts

*वसंत नवरात्र 13 अप्रैल से 21 अप्रैल 2021 तक* चैत्र नवरात्रि घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 13 अप्रैल दिन मंगलवार प्रातः 5:30 से 10:15 तक। अभिजीत मुहूर्त 11:56 से दोपहर 12: 47 तक होगा। 13 अप्रैल से नव संवत्सर भारतीय नववर्ष की शुरुआत भी होगी। क्रमश: नवरात्र 13 अप्रैल प्रतिपदा ,शैलपुत्री। 14 अप्रैल द्वितीया, ब्रह्मचारिणी। 15 अप्रैल तृतीया, चंद्रघंटा। 16 अप्रैल चतुर्थी ,कुष्मांडा। 17 अप्रैल पंचमी, स्कंदमाता। 18 अप्रैल षष्ठी, कात्यायनी। 19 अप्रैल सप्तमी, कालरात्रि। 20 अप्रैल अष्टमी, महागौरी। 21 अप्रैल नवमी, सिद्धिदात्री मां का पूजन होता है। ज्योतिषाचार्य अजय शास्त्री के अनुसार दुर्गा सप्तशती नारायण अवतार श्री व्यास जी द्वारा रचित महापुराणों में मार्कंडेय पुराण से ली गई है। इसमें 700 श्लोक व 13 अध्यायों का समावेश होने के कारण इसे सप्तशती का नाम दिया गया है। तंत्र शास्त्रों में इसका सर्वाधिक महत्व प्रतिपादित है और तांत्रिक क्रियाओं का इसके पाठ में बहुत उपयोग होता है। दुर्गा सप्तशती में 360 शक्तियों का वर्णन है। ज्योतिषाचार्य ने बताया है कि शक्ति पूजन के साथ भैरव पूजन भी अनिवार्य है। दुर्गासप्तशती का हर मंत्र ब्रह्मवशिष्ठ विश्वामित्र ने शापित किया है। शापोद्धार के बिना पाठ का फल नहीं मिलता दुर्गा सप्तशती के 6 अंगों सहित पाठ करना चाहिए कवच, अर्गला, कीलक और तीनों रहस्य महाकाली महालक्ष्मी महासरस्वती का रहस्य बताया गया है। नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती की चरित्र का क्रमानुसार पाठ करने से शत्रु नाश और लक्ष्मी की प्राप्ति व सर्वदा विजय होती है।

यस्मिन् जीवति जीवन्ति बहव: स तु जीवति | काकोऽपि किं न कुरूते चञ्च्वा स्वोदरपूरणम् || If the 'living' of a person results in 'living' of many other persons, only then consider that person to have really 'lived'. Look even the crow fill it's own stomach by it's beak!! (There is nothing great in working for our own survival) I am not finding any proper adjective to describe how good this suBAshit is! The suBAshitkAr has hit at very basic question. What are all the humans doing ultimately? Working to feed themselves (and their family). So even a bird like crow does this! Infact there need not be any more explanation to tell what this suBAshit implies! Just the suBAshit is sufficient!! *जिसके जीने से कई लोग जीते हैं, वह जीया कहलाता है, अन्यथा क्या कौआ भी चोंच से अपना पेट नहीं भरता* ? *अर्थात- व्यक्ति का जीवन तभी सार्थक है जब उसके जीवन से अन्य लोगों को भी अपने जीवन का आधार मिल सके। अन्यथा तो कौवा भी भी अपना उदर पोषण करके जीवन पूर्ण कर ही लेता है।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।

न भारतीयो नववत्सरोSयं तथापि सर्वस्य शिवप्रद: स्यात् । यतो धरित्री निखिलैव माता तत: कुटुम्बायितमेव विश्वम् ।। *यद्यपि यह नव वर्ष भारतीय नहीं है। तथापि सबके लिए कल्याणप्रद हो ; क्योंकि सम्पूर्ण धरा माता ही है।*- ”माता भूमि: पुत्रोSहं पृथिव्या:” *अत एव पृथ्वी के पुत्र होने के कारण समग्र विश्व ही कुटुम्बस्वरूप है।* पाश्चातनववर्षस्यहार्दिकाःशुभाशयाः समेषां कृते ।। ------------------------------------- स्वत्यस्तु ते कुशल्मस्तु चिरयुरस्तु॥ विद्या विवेक कृति कौशल सिद्धिरस्तु ॥ ऐश्वर्यमस्तु बलमस्तु राष्ट्रभक्ति सदास्तु॥ वन्शः सदैव भवता हि सुदिप्तोस्तु ॥ *आप सभी सदैव आनंद और, कुशल से रहे तथा दीर्घ आयु प्राप्त करें*... *विद्या, विवेक तथा कार्यकुशलता में सिद्धि प्राप्त करें,* ऐश्वर्य व बल को प्राप्त करें तथा राष्ट्र भक्ति भी सदा बनी रहे, आपका वंश सदैव तेजस्वी बना रहे.. *अंग्रेजी नव् वर्ष आगमन की पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं* ज्योतिषाचार्य बृजेश कुमार शास्त्री

आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताआलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।राम।

Top