" /> आपका मूलांक व स्वभाव नामक इस लेख मे हमने अंक ज्योतिष के माध्यम से स्वभाव बताने का प्रयास किया हैं |

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Dr Kishore Ghildiyal 22nd Jul 2020

 

आपका मूलांक व स्वभाव  

1)मूलांक 1 वाले सहनशील व गंभीर होते हैं,सकारात्मक सोच लेकर आगे बढने के शौकीन होते हैं इनमे नेत्रत्व की भावना अधिक होती हैं ऐसे जातक जो भी कार्य हाथ मे लेते हैं उसे भली भांति समाप्त करके ही अगला कार्य हाथ मे लेते हैं |

2)मूलांक 2 वाले जातक कल्पनाशील,भावुक,सरल,कोमल प्राण वाले व दोस्ताना फितरत वाले होते हैं नित्य नई नई कल्पनाओ मे रमे रहना इनका मुख्य कार्य होता हैं एक ही कार्य अथवा सोच को ज़्यादा समय तक कायम नहीं रख पाते हैं नए नए विचारो को कार्यान्वित करते रहना चाहते हैं |

3)मूलांक 3 वाले स्वाभिमानी,साहसी,अडीग व शक्ति व श्रमवान होते हैं आसानी से हार ना मानने वाले यह जातक संघर्ष करना ज़्यादा पसंद करते हैं | स्वतंत्र रहना चाहते हैं जिस कारण दूसरों से सहायता लेना पसंद नहीं करते अच्छे सलाहकार होते हैं सबका भला चाहते हैं इसी कारण जीवन मे ज़्यादा तरक्की नहीं कर पाते हैं |

4)इस मूलांक मे जन्मे व्यक्ति शांत होकर कभी नहीं बैठ पाते या तो जीवन मे काफी उचे होते हैं या काफी नीचे बीच मे नहीं हमेशा क्रियाशील रहते हैं | रटे-रटाए सिद्धांतों पर चलना पसंद नहीं करते लीक से हटकर कुछ करना चाहते हैं | गुरुर की अधिकता के कारण जीवन मे जितनी तेजी से चढ़ते हैं उतनी ही तेजी से गिरते भी हैं | 

5)इस मूलांक मे जन्मे व्यक्ति सरल,व्यापारिक सोच मे अव्वल विचारो के धनी होते हैं इनके पास नित्य नए नए आइडियाज आते रहते हैं | जीवन मे बदलाव चाहते हैं जिस कारण घूमने के शौकीन होते हैं ये झुकने मे कम झुकाने मे ज़्यादा यकीन रखते हैं | कुछ ही क्षणो मे किसी से भी बातचीत कर उसे अपना बना लेते हैं |

6)इस मूलांक के जन्मे जातक जन्म से कलाकार हृदय व सौन्दर्य के पुजारी होते हैं अधिक से अधिक सुंदर बनने व दिखने की चाह इनमे कूट कूट कर भरी होती हैं जिस कारण अपने समाज मे प्रसिद्द होते हैं | जीवन के सभी सुख व आनंद प्राप्त निरंतर करते रहना चाहते हैं |

7)इस मूलांक के जातक सरल हृदय,सहनशील व सहयोग की भावना वाले यह जातक मौलिक विचार वाले होते हैं परंतु इनको समझ पाना मुश्किल होता हैं | अपने भीतर बहुत कुछ छुपा कर रखते हैं इनका व्यक्तित्व विशाल व स्वतंत्र विचार का होता हैं जो जीवन मे कबाड़ से भी जुगाड़ बनाना भली भांति जानते हैं | खर्च करना बिलकुल पसंद नहीं करते हैं |

8)मूलांक 8 के जातक जीवन मे खूब संघर्ष करते हैं चुपचाप तरीके से काम करते रहना इन्हे पसंद होता हैं ज़्यादा दिखावा पसंद नहीं करते हैं ख्त व केन्द्रित जीवन जीते हैं ये लोग सहयोगी स्वभाव के ऐसे विश्वासपात्र होते हैं जो दोस्ती व दुश्मनी दोनों को ही बड़े जी जान से रखने मे यकीन करते हैं जो ठान लेते हैं उसे समाप्त करके ही बाज आते हैं |

9)मूलांक 9 वाले ये जातक शारीरिक व मानसिक रूप से बहादुर,साहसी व गुस्सैल स्वभाव के कारण कभी कभी कुछ ऐसा कर जाते हैं जो साहस की सीमा से परे होता हैं ऊपर से प्रचंड,प्रखर,कठोर व विस्फोटक लगते हैं पर अंदर से नरम दिल होते हैं | सिद्धांतों से भरा जीवन जीते हुये अनुशासन मे रहना पसंद करते हैं |

 

 


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न भारतीयो नववत्सरोSयं तथापि सर्वस्य शिवप्रद: स्यात् । यतो धरित्री निखिलैव माता तत: कुटुम्बायितमेव विश्वम् ।। *यद्यपि यह नव वर्ष भारतीय नहीं है। तथापि सबके लिए कल्याणप्रद हो ; क्योंकि सम्पूर्ण धरा माता ही है।*- ”माता भूमि: पुत्रोSहं पृथिव्या:” *अत एव पृथ्वी के पुत्र होने के कारण समग्र विश्व ही कुटुम्बस्वरूप है।* पाश्चातनववर्षस्यहार्दिकाःशुभाशयाः समेषां कृते ।। ------------------------------------- स्वत्यस्तु ते कुशल्मस्तु चिरयुरस्तु॥ विद्या विवेक कृति कौशल सिद्धिरस्तु ॥ ऐश्वर्यमस्तु बलमस्तु राष्ट्रभक्ति सदास्तु॥ वन्शः सदैव भवता हि सुदिप्तोस्तु ॥ *आप सभी सदैव आनंद और, कुशल से रहे तथा दीर्घ आयु प्राप्त करें*... *विद्या, विवेक तथा कार्यकुशलता में सिद्धि प्राप्त करें,* ऐश्वर्य व बल को प्राप्त करें तथा राष्ट्र भक्ति भी सदा बनी रहे, आपका वंश सदैव तेजस्वी बना रहे.. *अंग्रेजी नव् वर्ष आगमन की पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं* ज्योतिषाचार्य बृजेश कुमार शास्त्री

आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताआलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।राम।

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