महादशा और उपाय

Share

Astro Rakesh Periwal 12th Sep 2017

ज्योतिष : महादशा और उपाय: भाव के अनुसार फल: फलादेश के नियम: Astrology : Maha Dasha and Remedies

.........................................................................

ज्योतिष में ग्रहों की  महादशा के अनुसार फल प्राप्त होते है। 

कुंडली से हम यह पता लगता है  की कोनसा ग्रह की महादशा समस्या पैदा कर रही  तो उस ग्रह का उपाय करना चाहिएे।     

अनुकूल और प्रतिकूल दोनों ग्रहों की महादशा का उपाय करना चाहिएे। 

 वे हमारे अनुकूल है या प्रतिकूल ।

जो ग्रहों की महादशा आपके अनुकूल, भाग्येश, योगकारक और मित्र है ,केंद्र त्रिकोण के स्वामी हैं, लग्नेश है,तो उन ग्रहों की महादशा मे  भी उपाय करना चाहिए। 

जो ग्रहों की महादशा आपके प्रतिकूल हैं  मारक, बाधक, नीच के, शत्रु या अकारक हैं तो 

 उनकी महादशा हमारे लिए लाभ  नहीं कर सकती है । 

अनुकूल  या प्रतिकूल ग्रह के महादशाके  उपाय अलग अलग होगे ।

अनुकूल ग्रह की महादशा मे  रत्न धारण करना चाहिएे। 

अनुकूल ग्रह की महादशा मे मंत्रोच्चार या पूजन विधि तथा प्रार्थना  से कर सकते है।

प्रतिकूल ग्रह की महादशा ,मारक, बाधक, नीच के, शत्रु या अकारक है  तो ग्रहों की महादशा मे वस्तुओं का दान करना चाहिए। 

अनुकूल ग्रह की महादशा मे उपाय मंत्रोच्चार या पूजन होता है :

1.चंद्र ग्रह की महादशा : सोमवार को शिव भगवान की पूजा करें-   शिवलिंग पर कच्चा दूध एवं दहीं, धतुरा अर्पित करें। . कपूर . शिव पंचायतनसे  पूजन करें। 

2.मंगल ग्रह की महादशा : मंगलवार को हनुमान जी पूजा करें।  दीपक लगाने के साथ ही अगरबत्ती, पुष्प आदि अर्पित करतथा सिंदूर, चमेली का तेल चढ़ाएं। मंत्र- ऊँ रामदूताय नम:, ऊँ पवन पुत्राय नम: ।  हनुमान चालीसा का पाठ  करें।

3. बुध  ग्रह की महादशा   : बुधवार को गणेश भगवान की पूजा  विधि-विधान से करें।   .

 4.गुरू ग्रह  की महादशा : बृहस्पतिवार को  बृहस्पति देव की पूजा  विधि-विधान से करें।    बृहस्पति देव विद्या, धन, और संतान की कृपा करने वाले देवता  है।  अपने शरीर अंग नाभि और मस्तक पर केसर तिलक लगाना चाहिए और  भोजन में भी केसर का प्रयोग करें।  गुरू मंत्रों, विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ व जप करें या फिर कराएं। साधु, ब्राह्मण और पीपल के पेड़ की पूजा करें। पीपल की जड़ में जल, चने की दाल और पीले रंग की मिठाई चढ़ाएं।  पीले रंग के धागे में गुरूवार के दिन 5 मुखी रूद्राक्ष धारण करें।

 5.शुक्र  ग्रह  की महादशा : ज्योतिष शास्त्र में भी मानव की पिड़ाओं और परेशानियों को दूर करने के लिए  उपाय शुक्रवार को ही करने को उपयुक्त बताया गया है।   चिटि्टयों को दाना , सफेद गाय को रोटी , गरीबों को भोजन और दान-पुण्य करें।

 6. शनि ग्रह की महादशा   : शनिवार को शनि देव की की पूजा करें: शनि देव के प्रकोप से बचते हैं। शनि देव को न्याय का देवता है।  शनि देव को खुश करगे तो आपके पापों का नाश करगे  .  हनुमान चालिसा का पाठ,शनि देव के दर्शन, नीले पुष्प अर्पित करें।शिवलिंग पर जल अर्पित करें। , पीपल की पूजा ,गरीब व्यक्ति को भोजन कराएं। 

7.सूर्य ग्रह  की महादशा : रविवार को सूर्य देव की  पूजा विधि से करना चाहिए:  सफलता और यश के लिए  सूर्य देव को नमस्कार करें, लाल चंदन का लेप, कुकुंम, चमेली और कनेर के फूल अर्पित करें,  दीप प्रज्जवलित, सूर्य मंत्र का जाप करें 

 प्रतिकूल ग्रह ,अशुभ ग्रहों ,मारक, बाधक, नीच के, शत्रु या अकारक है  तो ग्रहों की महादशा वस्तुओं का दान करना चाहिए।

प्रतिकूल ,अशुभ ग्रहों की महादशा मे  उपाय :

 सूर्य की महादशा : सूर्य को जल देवे . पिता की सेवा करना चाहिए  ।  गेहूँ ,तांबे , बर्तन का दान करें।

चंद्र की महादशा : मंदिर में  कच्चा दूध और चावल दान करे। माता की सेवा करना चाहिए  ।.  चावल, दुध ,चान्दी का दान करना चाहिए  ।

मंगल की महादशा : मंगलवार को बंदरो को गुड और चने खिलाना चाहिए  ।  भाई बहन की सेवा करना चाहिए  । साबुत, मसूर की दाल का  दान, करना चाहिए  ।

बुध की महादशा : ताँबे  का दान करना चाहिए ।

 साबुत मूंग का दान करना चाहिए  ।माँ दुर्गा की आराधना करनी चाहिए  । 

बृहस्पति की महादशा : केसर का तिलक लगाना चाहिए  ।  केसर खाएँ और नाभि , जीभ पर लगाना चाहिए  ।चने की दाल का पिली वस्तु का दान चाहिए ।

शुक्र की महादशा : गाय की सेवा करना चाहिए ।

घर ,शरीर को साफ-सुथरा रखना चाहिए । 

गाय को हरी घास खिलाना चाहिए। 

दही, घी, कपूर का दान करना चाहिए ।

शनि की महादशा : शनिवार के दिन पीपल पर तेल का दिया जलाना चाहिए ।  बर्तन में तेल लेकर उसमे अपना छाया दखें और बर्तन तेल के साथ दान करना चाहिए ।

हनुमान जी की पूजा करना चाहिए । बजरंग बाण का पाठ करे।

काले साबुत उड़द और लोहे की वस्तु का दान करना चाहिए । . 

राहु की महादशा : जौ ,मूली ,काली सरसों का दान करना चाहिए । 

केतु की महादशा :   काला सफ़ेद कम्बल कोढियों को दान करना चाहिए ।    कौओं को रोटी खिलाएं. काला तिल का दान करे। 

  अगर आपके जीवन में जिस ग्रह की महादशा  चल  रही है तो आप उस तरह   उपचार कर सकते हैं   । 

महादशा  का भाव के अनुसार फल का होना :

लग्नेश की महादशा - स्वास्थ्य अच्छाहोना , धन-प्रतिष्ठा में वृद्धि होना। 

धनेश की महादशा - अर्थ लाभका होना , मगर शरीर कष्ट, स्त्री (पत्नी) को कष्ट होना। 

तृतीयेश की महादशा - भाइयों के लिए परेशानी, लड़ाई-झगड़ा का होना। 

चतुर्थेश की महादशा - घर, वाहन सुख होना , प्रेम-स्नेह में वृद्धि होना। 

पंचमेश की महादशा - धनलाभ होना , मान-प्रतिष्ठा , संतान सुख, माता को कष्ट होना। 

षष्ठेश की महादशा - रोग होना , शत्रु, भय, अपमान का होना ,संताप होना। 

सप्तमेश की महादशा - जीवनसाथी को स्वास्थ्‍य कष्ट, चिंता का होना। 

अष्टमेश की महादशा - कष्ट होना , हानि होना , मृत्यु का भय होना। 

नवमेश की महादशा - भाग्योदय का होना , तीर्थयात्रा का होना , प्रवास का होना , माता को कष्ट। 

दशमेश की महादशा - राज्य से लाभ, पद-प्रतिष्ठा की प्राप्ति, धनागम, प्रभाव मे  वृ‍द्धि, पिता को लाभ। 

लाभेश की महादशा - धन से लाभ, पुत्र की प्राप्ति, यश में मिलना , पिता को कष्ट होना। 

व्ययेश की महादशा - धन मे हानि, अपमान का होना , पराजय, देह कष्ट, शत्रु पीड़ा होना। 

 फलादेश के नियम :

  - जो ग्रह अपनी उच्च, अपनी या अपने मित्र ग्रह की राशि में हो - शुभ फलदायक होगा।

- इसके विपरीत नीच राशि में या अपने शत्रु की राशि में ग्रह अशुभफल दायक होगा।

 - जो ग्रह अपनी राशि पर दृष्टि डालता है, वह शुभ फल देता है।

 -त्रिकोण के स्वा‍मी सदा शुभ फल देते हैं।

 - क्रूर भावों (3, 6, 11) के स्वामी सदा अशुभ फल देते हैं।

- दुष्ट स्थानों (6, 8, 12) में ग्रह अशुभ फल देते हैं।

- शुभ ग्रह केन्द्र (1, 4, 7, 10) में शुभफल देते हैं, पाप ग्रह केन्द्र में अशुभ फल देते हैं।

-बुध, राहु और केतु जिस ग्रह के साथ होते हैं, वैसा ही फल देते हैं।

 - सूर्य के निकट ग्रह अस्त हो जाते हैं और अशुभ फल देते हैं।

नोट : अच्छे भावों के स्वामी केंद्र या ‍त्रिकोण में होने पर ही अच्छा प्रभाव दे पाते हैं। ग्रहों के बुरे प्रभाव को कम करने के लिए पूजा व मंत्र जाप करना चाहिए।

 नोट :अपनी  कुंडली अच्छे ज्योतिषि  को  दिखाकर  इसकी जानकारी प्राप्त कर सकते है ।


Like (0)

Comments

Post

Latest Posts

*वसंत नवरात्र 13 अप्रैल से 21 अप्रैल 2021 तक* चैत्र नवरात्रि घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 13 अप्रैल दिन मंगलवार प्रातः 5:30 से 10:15 तक। अभिजीत मुहूर्त 11:56 से दोपहर 12: 47 तक होगा। 13 अप्रैल से नव संवत्सर भारतीय नववर्ष की शुरुआत भी होगी। क्रमश: नवरात्र 13 अप्रैल प्रतिपदा ,शैलपुत्री। 14 अप्रैल द्वितीया, ब्रह्मचारिणी। 15 अप्रैल तृतीया, चंद्रघंटा। 16 अप्रैल चतुर्थी ,कुष्मांडा। 17 अप्रैल पंचमी, स्कंदमाता। 18 अप्रैल षष्ठी, कात्यायनी। 19 अप्रैल सप्तमी, कालरात्रि। 20 अप्रैल अष्टमी, महागौरी। 21 अप्रैल नवमी, सिद्धिदात्री मां का पूजन होता है। ज्योतिषाचार्य अजय शास्त्री के अनुसार दुर्गा सप्तशती नारायण अवतार श्री व्यास जी द्वारा रचित महापुराणों में मार्कंडेय पुराण से ली गई है। इसमें 700 श्लोक व 13 अध्यायों का समावेश होने के कारण इसे सप्तशती का नाम दिया गया है। तंत्र शास्त्रों में इसका सर्वाधिक महत्व प्रतिपादित है और तांत्रिक क्रियाओं का इसके पाठ में बहुत उपयोग होता है। दुर्गा सप्तशती में 360 शक्तियों का वर्णन है। ज्योतिषाचार्य ने बताया है कि शक्ति पूजन के साथ भैरव पूजन भी अनिवार्य है। दुर्गासप्तशती का हर मंत्र ब्रह्मवशिष्ठ विश्वामित्र ने शापित किया है। शापोद्धार के बिना पाठ का फल नहीं मिलता दुर्गा सप्तशती के 6 अंगों सहित पाठ करना चाहिए कवच, अर्गला, कीलक और तीनों रहस्य महाकाली महालक्ष्मी महासरस्वती का रहस्य बताया गया है। नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती की चरित्र का क्रमानुसार पाठ करने से शत्रु नाश और लक्ष्मी की प्राप्ति व सर्वदा विजय होती है।

यस्मिन् जीवति जीवन्ति बहव: स तु जीवति | काकोऽपि किं न कुरूते चञ्च्वा स्वोदरपूरणम् || If the 'living' of a person results in 'living' of many other persons, only then consider that person to have really 'lived'. Look even the crow fill it's own stomach by it's beak!! (There is nothing great in working for our own survival) I am not finding any proper adjective to describe how good this suBAshit is! The suBAshitkAr has hit at very basic question. What are all the humans doing ultimately? Working to feed themselves (and their family). So even a bird like crow does this! Infact there need not be any more explanation to tell what this suBAshit implies! Just the suBAshit is sufficient!! *जिसके जीने से कई लोग जीते हैं, वह जीया कहलाता है, अन्यथा क्या कौआ भी चोंच से अपना पेट नहीं भरता* ? *अर्थात- व्यक्ति का जीवन तभी सार्थक है जब उसके जीवन से अन्य लोगों को भी अपने जीवन का आधार मिल सके। अन्यथा तो कौवा भी भी अपना उदर पोषण करके जीवन पूर्ण कर ही लेता है।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।

न भारतीयो नववत्सरोSयं तथापि सर्वस्य शिवप्रद: स्यात् । यतो धरित्री निखिलैव माता तत: कुटुम्बायितमेव विश्वम् ।। *यद्यपि यह नव वर्ष भारतीय नहीं है। तथापि सबके लिए कल्याणप्रद हो ; क्योंकि सम्पूर्ण धरा माता ही है।*- ”माता भूमि: पुत्रोSहं पृथिव्या:” *अत एव पृथ्वी के पुत्र होने के कारण समग्र विश्व ही कुटुम्बस्वरूप है।* पाश्चातनववर्षस्यहार्दिकाःशुभाशयाः समेषां कृते ।। ------------------------------------- स्वत्यस्तु ते कुशल्मस्तु चिरयुरस्तु॥ विद्या विवेक कृति कौशल सिद्धिरस्तु ॥ ऐश्वर्यमस्तु बलमस्तु राष्ट्रभक्ति सदास्तु॥ वन्शः सदैव भवता हि सुदिप्तोस्तु ॥ *आप सभी सदैव आनंद और, कुशल से रहे तथा दीर्घ आयु प्राप्त करें*... *विद्या, विवेक तथा कार्यकुशलता में सिद्धि प्राप्त करें,* ऐश्वर्य व बल को प्राप्त करें तथा राष्ट्र भक्ति भी सदा बनी रहे, आपका वंश सदैव तेजस्वी बना रहे.. *अंग्रेजी नव् वर्ष आगमन की पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं* ज्योतिषाचार्य बृजेश कुमार शास्त्री

आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताआलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।राम।

Top