सूर्य_मुद्रा क्या है

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Ravinder Pareek 06th Oct 2020

*........#सूर्य_मुद्रा.......*
*#सूर्य_मुद्रा हमारे भीतर के #अग्नि_तत्व को संचालित करती है।*
 *#सूर्य_की_अँगुली_अनामिका_को_रिंग_फिंगर भी कहते हैं। इस अँगुली का संबंध सूर्य और यूरेनस ग्रह से है। सूर्य ऊर्जा स्वास्थ्य का प्रतिनिधित्व करती है*
*#सूर्य_मुद्रा के अभ्यास को अँगुली को हथेली की ओर मोड़कर उसे अँगूठे से दबाएँ। बाकी बची #तीनों अँगुलियों को सीधा रखें। इसे #सूर्य #मुद्रा कहते हैं।*
*#सूर्य मुद्रा का रोज दो बार 5 से 15 मिनट के लिए अभ्यास करने से शरीर का #कोलेस्ट्रॉल_घटता है।* 
*वजन कम करने के लिए भी #सूर्य_मुद्रा का उपयोग किया जाता है।*
 *#पेट संबंधी रोगों में भी यह #सूर्य_मुद्रा_लाभदायक है।*
*#बेचैनी और चिंता कम होकर दिमाग शांत बना रहता है। #सूर्य_मुद्रा_शरीर_की_सूजन_मिटाकर उसे हलका बनाती है*
*#सुखासन की मुद्रा में बैठकर आप #सूर्य_मुद्रा_लगाकर_योग_को करें।*
*#दोनों हाथों की हथेलियों को घुटनों पर रखें।*
*अपने #हाथ की #अनामिका उँगली सूर्य वाली उंगली को नीच की तरफ मोड़ें और उसे #अंगूठे से दबा लें। बाकी #तीनों #उंगलियों को सीधा रहने दें। जैसा की आपको दिखाया गया है।*
*#सूर्य मुद्रा के नियमित अभ्यास को आप दस से #पंद्रह मिनट तक कर सकते हो।*
*#सूर्य_मुद्रा किसे नहीं करना चाहिए ?*
*जो व्यक्ति शारीरिक रूप से कमजोर और कम वजन वाले है उन्हें सूर्य मुद्रा आसन नही करना चाहिए ,*
*अन्यथा वो और भी कमजोर हो सकते है | #सूर्य मुद्रा से #वजन कम होता है |*
*#सूर्य_मुद्रा_से_होने_वाले_लाभ*
*#सूर्य मुद्रा बहुत ही सरल और हाथो से किये जाने वाला सरल आसन है |*
*#सूर्यमुद्रा के नियमित अभ्यास करने से बहुत सारे शारीरिक और मानसिक लाभ प्राप्त होते है |*
*#सूर्य मुद्रा के नियमित अभ्यास करने से शरीर के वजन को कम करता है |*
*#सूर्यमुद्रा के नियमित अभ्यास करने से#गर्भावस्था के बाद महिलाये इससे अपना #वजन कम कर सकती है |*
*#सूर्य मुद्रा के नियमित अभ्यास करने से शरीर में कोलेस्ट्राॅल की मात्रा कम होती है जिससे हार्ट अटैक आने की संभावना कम हो जाती है  |*
*#सूर्यमुद्रा के नियमित अभ्यास करने से शरीर में उर्जा का संचार करता है *


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Post

Suman Sharma

very nice article


सूर्य_मुद्रा हमारे भीतर के #अग्नि_तत्व को संचालित करती है।


great


very good knowledge


very nice article


very nice article by Astro Ravi ji


interesting information


Very nice meaningful articles


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आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताआलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।राम।

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