Vaishak Poornima ke Din Shubh Yog aur Upay

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JyotishShastri Bhushan 18th May 2019

Din ka Mahatva: 18 मई को समप्तक राजयोग बनने से सभी तरह के कार्यों में सफलता मिलने के बाद जीवन में उन्नति होगी। इस दिन भूमि, मकान, वाहन खरीदना, पदभार ग्रहण करना और नए व्यापार व्यवसाय का शुभारंभ करना बहुत ही अधिक शुभ फलदायी और मंगलकारी होगा। Buddha पूर्णिमा के दिन समसप्तक राजयोग बन रहा है। इस दिन स्वामी देव गुरु बृहस्पति व नवग्रहों के राजा सूर्यदेव आमने-सामने रहेंगे। इस कारण सूर्य व गुरु का समसप्तक राजयोग बनेगा। समसप्तक राजयोग बनने से इस दिन सभी कार्यों में स्थायित्व के साथ उन्नति से भरपूर रहेगा।  शास्त्रों के अनुसार पूर्णिमा के दिन चंद्रमा, विष्णु भगवान और माता लक्ष्मी की पूजा करने से चारो तरफ से सुख-समृद्धि और वैभव की प्राप्ति होती है। समसप्तक राजयोग के चलते यह तिथि बहुत महत्वपूर्ण हो गई है।

Upay: पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा अपने पूर्ण आकार में होता है. यह दिन माँ लक्ष्मी को भी अत्यंत प्रिय है. पूर्णिमा के दिन ये खास उपाय करने से आपका भाग्य सुंदर बनेगा. 1. चन्द्रमा मां का सूचक है और मन का कारक है. चंद्रमा कर्क राशि का स्वामी है. स्मरण शक्ति कमजोर हो जाती है. घर में पानी की कमी आ जाती है. मानसिक तनाव, मन में घबराहट, मन में तरह-तरह की शंका और सर्दी बनी रहती है. व्यक्ति के मन में आत्महत्या करने के विचार भी बार-बार आते रहते हैं. चन्द्रमा जैसे-जैसे कृष्ण पक्ष में छोटा व शुक्ल पक्ष में पूर्ण होता है वैसे-वैसे मनुष्य के मन पर भी चन्द्र का प्रभाव पड़ता हैl पूर्णिमा की रात को कच्चे दूध में पूजा के उपयोग में लाने वाले शहद और चंदन को मिलाकर उसमें अपनी छाया देखें फिर चंद्रमा को अर्घ्य देंl 2. जिस भी व्यक्ति को जीवन में धन सम्बन्धी समस्याओं का सामना करना पड़ता है उन्हें पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय के समय चन्द्रमा को कच्चे दूध में चीनी और चावल मिलाकर "ॐ स्रां स्रीं स्रौं स: चन्द्रमासे नम:"l 3. पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी के चित्र पर 11 कौड़ियां चढ़ाकर उन पर हल्दी से तिलक करें. अगले दिन सुबह इन कौड़ियों को लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी में रखें. इस उपाय से घर में धन की कोई भी कमी नहीं होती है. 

इस तरह करें स्नान और ध्यान- - प्रातः काल स्नान के पूर्व संकल्प लें. - पहले जल को सिर पर लगाकर प्रणाम करें. - फिर स्नान करना आरम्भ करें. - स्नान करने के बाद सूर्य को अर्घ्य दें. - साफ वस्त्र या सफेद वस्त्र धारण करें , फिर मंत्र जाप करें. - मंत्र जाप के पश्चात सफ़ेद वस्तुओं और जल का दान करें. - चाहें तो इस दिन जल और फल ग्रहण करके उपवास रख सकते हैं.

आज के दिन करें इन मंत्रों का जाप- - "ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः" - " नमः शिवाय" - "ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीवासुदेवाय नमः"

बुद्ध पूर्णिमा के दिन क्या करने से बचें- - बुद्ध पूर्णिमा के दिन मांस का सेवन ना करें. - इस दिन घर में कलह करने से बचना चाहिए. - इस दिन किसी को अपशब्द कहने से बचें. - इस दिन झूठ नहीं बोलना चाहिए.


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*वसंत नवरात्र 13 अप्रैल से 21 अप्रैल 2021 तक* चैत्र नवरात्रि घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 13 अप्रैल दिन मंगलवार प्रातः 5:30 से 10:15 तक। अभिजीत मुहूर्त 11:56 से दोपहर 12: 47 तक होगा। 13 अप्रैल से नव संवत्सर भारतीय नववर्ष की शुरुआत भी होगी। क्रमश: नवरात्र 13 अप्रैल प्रतिपदा ,शैलपुत्री। 14 अप्रैल द्वितीया, ब्रह्मचारिणी। 15 अप्रैल तृतीया, चंद्रघंटा। 16 अप्रैल चतुर्थी ,कुष्मांडा। 17 अप्रैल पंचमी, स्कंदमाता। 18 अप्रैल षष्ठी, कात्यायनी। 19 अप्रैल सप्तमी, कालरात्रि। 20 अप्रैल अष्टमी, महागौरी। 21 अप्रैल नवमी, सिद्धिदात्री मां का पूजन होता है। ज्योतिषाचार्य अजय शास्त्री के अनुसार दुर्गा सप्तशती नारायण अवतार श्री व्यास जी द्वारा रचित महापुराणों में मार्कंडेय पुराण से ली गई है। इसमें 700 श्लोक व 13 अध्यायों का समावेश होने के कारण इसे सप्तशती का नाम दिया गया है। तंत्र शास्त्रों में इसका सर्वाधिक महत्व प्रतिपादित है और तांत्रिक क्रियाओं का इसके पाठ में बहुत उपयोग होता है। दुर्गा सप्तशती में 360 शक्तियों का वर्णन है। ज्योतिषाचार्य ने बताया है कि शक्ति पूजन के साथ भैरव पूजन भी अनिवार्य है। दुर्गासप्तशती का हर मंत्र ब्रह्मवशिष्ठ विश्वामित्र ने शापित किया है। शापोद्धार के बिना पाठ का फल नहीं मिलता दुर्गा सप्तशती के 6 अंगों सहित पाठ करना चाहिए कवच, अर्गला, कीलक और तीनों रहस्य महाकाली महालक्ष्मी महासरस्वती का रहस्य बताया गया है। नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती की चरित्र का क्रमानुसार पाठ करने से शत्रु नाश और लक्ष्मी की प्राप्ति व सर्वदा विजय होती है।

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आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताआलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।राम।

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