राशियों अनुसार करे दुर्गा सप्तशती का पाठ

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Astro Rakesh Periwal 06th Oct 2019

*राशि अनुसार करें दुर्गा सप्तशती के पाठ, पूरी होगी मनोकामना* *यदि आप अपनी राशि के अनुसार दुर्गा सप्तशती का पाठ करें तो निश्चय ही आपकी सभी इच्छाएं पूरी होंगी* *मां शक्ति की आराधना करने वालों के लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ करना अनिवार्य माना जाता है। समय की कमी के चलते सप्तशती के पूरे पाठ को सभी लोग नहीं कर सकते। ऎसे में यदि आप अपनी राशि अनुसार दुर्गा सप्तशती का पाठ करें तो निश्चय ही आपकी भौतिक, दैहिक और आध्यात्मिक इच्छाएं पूरी होंगी।
मेष (Aries): इस राशि वाले मंगल प्रधान होते हैं। इनमें क्रोध की अधिकता रहती है। इन्हें दुर्गा सप्तशती के पहले अध्याय का पाठ करना चाहिए।

वृष (Taurus): शुक्र ग्रह की प्रधानता होने से वृष राशि वाले अत्यन्त भावुक होते हैं। इन्हें कोई भी इमोशनल कर कुछ भी करवा सकता है। वृष राशि वालों को दुर्गा सप्तशती के दूसरे अध्याय का पाठ करना चाहिए।

मिथुन (Gemini): इस राशि के व्यक्ति बुध ग्रह के असर में रहते हैं। बुध के प्रभाव से ही इनकी वाणी से दूसरे लोग जल्दी प्रभावित हो जाते हैं। इन्हें दुर्गा सप्तशती के सातवें अध्याय का पाठ करना चाहिए।

कर्क (Cancer): कर्क राशि के व्यक्ति चन्द्रमा प्रधान होते हैं। इसी कारण वह मानसिक रूप से उद्वेलित रहते हैं। इन्हें दुर्गा सप्तशती के पांचवे अध्याय का विधिवत पाठ करना चाहिए जिससे भाग्य के बंद द्वार भी खुल जाते हैं।

सिंह (Leo): सूर्य प्रधान होने के कारण आप अन्य लोगों पर अपना प्रभाव छोड़ने में सफल होते हैं। फिर भी कई बार न चाहते हुए भी आप अनिश्चितता का शिकार हो जाते हैं। आपके लिए दुर्गा सप्तशती के तीसरे अध्याय का पाठ करना चाहिए।

कन्या (Virgo): बुध प्रधान होने से आप अत्यधिक बुदि्धमान है परन्तु सही समय पर सही निर्णय नहीं ले पाने की क्षमता आपके भाग्य को दबा देती है। इसके लिए आपको दुर्गा सप्तशती के दसवें अध्याय का विधिवत पाठ करना चाहिए।

तुला (Libra): शुक्र प्रधान होने से आपमें काम-भावना की प्रबलता रहती है। इसे कम करने और शुक्र ग्रह के अनुकूल प्रभावों को प्राप्त करने के लिए तुला राशि वालों को दुर्गा सप्तशती के छठे अध्याय का पाठ करना चाहिए।

वृश्चिक (Scorpio): मंगल प्रधान होने से आपका स्वभाव रूखा-सूखा व क्रोधी होता है। दुर्गा सप्तशती के आठवें अध्याय का पाठ आपके स्वभाव को अनुकूल बना कर बंद भाग्य के दरवाजे खोलता है।

धनु (Sagittarius): इस राशि वाले व्यक्ति गुरू ग्रह से प्रभावित होते हैं। इन्हें दुर्गा सप्तशती के ग्यारहवें अध्याय का पाठ करने से समस्त कष्टों से मुक्ति मिलती है।

मकर (Capricorn): शनि प्रधान होने से मकर राशि वाले न्याय के लिए लड़ने को हमेशा तैयार रहते हैं। ऎसे में इनके विरोधियों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती रहती है, इन्हें दुर्गा सप्तशती के आठवें अध्याय का विधिवत पाठ करना शनि से मनवांछित फल की प्राप्ति कराता है।

कुंभ (Aquarius): शनि से प्रभावित होने के कारण कुंभ राशि वालों का भाग्य हमेशा अधर-झूल में झूलता रहता है। दुर्गा सप्तशती के चौथे अध्याय का पाठ करने से इन्हें जीवन में सुख-समृदि्ध प्राप्त होती है।

मीन (Pisces): गुरू प्रधान होने के कारण मीन राशि वाले यूं तो हर समस्या से पार पा ही लेते हैं फिर भी भौतिक सुख-समुदि्ध से दूर रहते हैं। दुर्गा सप्तशती के नौवें अध्याय का पाठ करने से उनकी भौतिक और आध्यात्मिक इच्छाएं पूरी होती है।


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आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताआलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।राम।

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