जन्माष्टमी पर श्री कृष्ण की मूर्ति स्थापना में रखें इन बातों का ध्यान

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Deepika Maheshwari 10th Aug 2020

जन्माष्टमी के इस विशेष दिन भक्त उनके प्रति अपने श्रद्धा भाव को दिखाते हुए अपने घरों में भगवान श्रीकृष्ण की उपासना करते हैं, जिसके लिए वो उनकी मूर्ति घर में स्थापित करते हैं। लेकिन माना गया है कि अक्सर लोग उनकी मूर्ति स्थापित करने वक़्त बाल गोपाल से जुड़ी कुछ खास बातों का ध्यान रखना भूल जाते हैं। ऐसे में आइये जानते हैं कि आखिर वो कौन-सी विशेष बातें हैं जिनका ध्यान हमेशा मूर्ति स्थापना के दौरान हमे रखना चाहिए:- ध्यान रखें कि हमे अपने घर में किसी भी देवी देवता की मूर्ति स्थापित करते वक़्त उनकी विशेष पूजा-अर्चना ज़रूर करनी चाहिए। अगर आप भी अपने घर इस जन्माष्टमी श्री कृष्ण की मूर्ति स्थापित करना चाहते हैं तो, आपको विशेष तौर पर इन बातो का ध्यान रखना चाहिए 1. बाल गोपाल की मूर्ति के साथ घर में बाँसुरी अवश्य रखें। मान्यताओं अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण अपनी बाँसुरी की मधुर धुन से लोगों को मंत्रमुग्ध करते हैं, यही वजह है कि अगर आप भी उनकी स्थापना करते हुए इस जन्माष्टमी अपने घर में बाँसुरी रखते हैं तो उनका आकर्षण आपके प्रति अधिक बढ़ जाएगा। इसलिए इस जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण को खुश करने के लिए आपको कृष्ण जी की मूर्ति के अलावा घर में लकड़ी की एक सुंदर बाँसुरी भी ज़रुर रखनी चाहिए। 2 . भगवान श्रीकृष्ण गाय और उनके बछड़ों से बेहद प्यार करते थे। उन्हें गाय का दूध, माखन और दूध से बने पदार्थ भी पसंद थे। इसी कारण से घर में उनकी स्थापना के वक़्त गाय और बछड़े की एक जोड़ी भी अवश्य ही रखनी चाहिए। 3 . जन्माष्टमी उनकी स्थापना करते वक़्त आपको अपने घर में मोरपंख ज़रूर रखना चाहिए। माना जाता है कि मोरपंख रखने से आपके परिवार पर भगवान कृष्ण की सदा कृपा रहती है और ख़ुशियों की बारिश भी होती है।


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आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताआलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।राम।

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