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प्रश्नकुंडली पर चर्चा

AACHARYA YATIN S UPADHYAY 16th Sep 2017

सामान्यतौर पर यह माना जाता है कि ज्योतिषशास्त्र केवल तभी कारगर है जब जातक को अपने जन्म से जुड़ी हर जानकारी पता हो, मसलन जन्म की तारीख, समय, स्थान आदि। अगर ये उपलब्ध नहीं है तो ज्योतिष का लाभ प्राप्त नहीं किया जा सकता।

 

 

लेकिन ये भी अधूरी जानकारी है क्योंकि ज्योतिष शास्त्र की अनेक शाखाएं हैं और उन्हीं में से एक है प्रश्न कुंडली। बहुत से लोग ऐसे हैं जिनके पास अपना जन्म विवरण नहीं है, लेकिन प्रश्न कुंडली के जरिए वो भी अपनी समस्या का समाधान पा सकते हैं।

 

प्रश्न कुंडली

 

प्रश्न कुंडली के अंतर्गत जातक की कुंडली नहीं अपितु जातक द्वारा पूछे गए प्रश्न की कुंडली बनती है। प्रश्न किस समय और किस स्थान पर पूछा गया है, ये बात उल्लेखनीय है। यह समय विशेष की कुंडली मानी जाती है।

 

सकारात्मक या नकारात्मक

 

आपने किस समय, किस लग्न में, किस तरह का प्रश्न पूछा है, इसके आधार पर यह गणना की जाती है कि संबंधित प्रश्न का उत्तर सकारात्मक होगा या नकारात्मक।

 

शास्त्रीय नियम

 

अगर शास्त्रीय नियम पर जाएं तो प्रश्न पूछने वाले जातक और प्रश्न का उत्तर देने वाले वाले विशेषज्ञ के लिए कुछ बेहद जटिल नियमों की बात कही गई है। आज के दौरा में इन नियमों का पालन करना अत्याधिक मुश्किल होता है इसलिए अगर हम ये कहें कि पूछे गए प्रश्न का उत्तर सटीक आएगा तो निश्चित तौर पर सही नहीं है।

 

प्रश्न कुंडली

 

प्रश्न कुंडली के साथ एक और त्रुटि भी है। दरअसल प्रश कुंडली की सहायता से मात्र उसी सवाल का जवाब पाया जा सकता है जो आपने पूछा है, इसके अलावा आप और कुछ नहीं जा सकते। कहने का आश्य यह है कि अगर आपका सवाल है ‘क्या मैं आने वाले समय में विदेश यात्रा कर पाऊंगा’?

 

सवाल का जवाब

 

तो आपको इस सवाल का जवाब तो मिल जाएगा, लेकिन कैसे कर पाएंगे किन हालातों में जाएंगे इससे संबंधित कोई जानकारी आप हासिल नहीं कर सकते।

 

चंद्रमा की स्थिति

 

ज्यादातर मामलों में प्रश्न कुंडली का प्रयोग जातक अपनी भूमि, संपत्ति, विवाह, क्रय-विक्रय, हानि-लाभ और वर्तमान हालातों से संबंधित प्रश्नों के उत्तर जानने के लिए करते हैं। सामान्यतौर पर प्रश्न कुंडली की आयु एक वर्ष की मानी गई है। प्रश्न करने वाले जातक की चिंताओं की जानकारी चंद्रमा की स्थिति देखकर पाई जा सकती है।

 

चंद्रमा

 

अगर प्रश्न कुंडली के लग्न में मजबूत चंद्रमा की स्थिति घर या निवास, दूसरे भाव में धन, तीसरे भाव में घर से बहुत दूर रहने की चिंता, चौथे भाव में घर या मकान से संबंधित कोई परेशानी।

 

चन्द्रमा

 

पांचवें भाव में संतान संबंधी परेशानी, छठे भाव में ऋण, सातवें भाव में विवाह या पार्टनरशिप, आठवें भाव में पैतृक सम्पति या अप्रत्याशित लाभ, नवम भाव में चंद्र लंबी दूरी की यात्राएं, दसवंप भाव में आजीविका, एकादश भाव में आयु-वृद्धि या पदोन्नति, द्वादश भाव में बलवान चंद्रमा विदेश यात्रा से संबंधित चिंताएं होने से संबंधित संकेत देता है।

 

प्रश्न कुंडली और मूल कुंडली

 

अगर प्रश्न कुंडली के साथ ही जातक की मूल कुंडली भे हासिल हो जाए तो प्रश्न का सही उत्तर अवश्य पाया जा सकता है। यही वजह है कि प्रश्न कुंडली और मूल कुंडली को एक दूसरे का पूरक माना गया है।

 

सवाल का जवाब

 

ऐसा इसलिए क्योंकि अगर प्रश्न कुंडली में आपके सवाल का जवाब सकारात्मक आया हो और आपकी मूल कुंडली में भी ऐसे योग मौजूद हों तो यह निश्चित हो जाता है कि आपके सवाल का जवाब क्या होगा।

http://community.futurestudyonline.com/user/YATIN+S+UPADHYAY

जटिल विद्या

 

प्रश्न कुंडली एक जटिल विद्या है, अगर ये कहा जाए कि मूल कुंडली की समझ रखने वाले हर विशेषज्ञ प्रश्न कुंडली देख या बना सकते हैं तो यह सही नहीं है। प्रश्न कुंडली एक गूढ़ विद्या है और इससे लाभ प्राप्त करने के लिए यह बहुत जरूरी है कि जातक सही व्यक्ति के संपर्क में आए।


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