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क्या मेरे लिये शेयर मार्किट में पैसा लगाने से फायदा है

Astro Rakesh Periwal 08th Mar 2018

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क्या मेरे भाग्य में शेयर मार्किट से लाभ होगा, इस प्रश्न का उतर जानने के लिए मेरे जन्म पत्रिका में अगर पांचवें घर का संबंध दूसरे घर से हो या 11 घर से हो तो मुझे लाभ होने के आसार हैं और साथ में देखना पड़ेगा कि कुंडली में राहु बुध गुरु शुक्र और मंगल और चंद्रमा की स्थिति कैसी है जन्म का हमारे लग्न कुंडली में जो ग्रहों की स्थिति है वह क्या धन योग बन रहे हैं और पांचवें घर से शेयर सट्टा मार्केट से लाभ होने का विशेष तौर से देखा जाता है तो अगर वहां पर 5:00 में घर में राहु हो चंद्रमा हो और उसके ऊपर गुरु या बुध की दृष्टि हो तो आप निश्चित तौर पर शेयर मार्केट में पैसा लगाते हैं लेकिन अगर पांचवे घर का स्वामी छठे आठवें बारे में जाए तो निश्चित तौर पर आपको शेयर मार्केट में पार्टिसिपेट नहीं करना चाहिए और यदि आपका धन भाव का स्वामी छठे आठवें भाव में है तो भी यह मानकर चलना चाहिए कि आपका इसमें फायदा नहीं है लाभ भाव के स्वामी यदि केंद्र में हो या उच्च के हो तो आपको शेयर मार्केट से पैसा मिल सकता है भाग्य भाव यानी नवम भाव में क्रूर ग्रह ना हो और अच्छे ग्रहों की स्थिति हो उच्च के ग्रह हो तो आपको लाभ मिल सकता है तो कई प्रकार से कुंडली का विश्लेषण करने के बाद ही हम इस निष्कर्ष पर जा सकते हैं कि हमें शेयर मार्केट में डायरेक्टली काम करना चाहिए या नहीं तो आप अवश्य ही हमारे ज्योतिष विद्वानों से संपर्क करके अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाएं और जाने की आप को शेयर मार्केट से लाभ है या नहीं, जिसकी कुंडली मे मंगल योगकारक हो उसे भूमि,  इलेक्ट्रॉनिक्स, अग्नि , ग्रेनाइट, मार्बल,  होटल, युद्ध सामग्री की कम्पनी में लाभ होता है, सूर्य अच्छे हो तो सरकारी कम्पनियों , तांबा, फार्मा सेक्टर में लांच होगा, चन्द्र अच्छा हो तो चांदी, जलीय वस्तुओं , सफेद वस्त्र, की कम्पनी में लाभ होगा, शनि अच्छी पोजीसन में हो माइनिग, तेल, लोहे, मसीनरी, स्टील की कारोबार वाली कम्पनियों में निवेश करने से लाभ होगा। ऐसे बहुत सारे योग देखे जाते है । अपनी जन्मकुंडली का अध्ययन करवाये और जाने अपने लिये क्या ठीक है शेयर मार्किट।

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रूचक योग- मंगल केंद्र भाव में होकर अपने मूल त्रिकोण (पहला, पांचवा और नवा भाव), स्वग्रही (मेष या वृशिचक भाव में हो तो) अथवा उच्च राशि (मकर राशि) का हो तो रूचक योग बनता है। रूचक योग होने पर व्यक्ति बलवान, साहसी, तेजस्वी, उच्च स्तरीय वाहन रखने वाला होता है। इस योग में जन्मा व्यक्ति विशेष पद प्राप्त करता है।

भद्र योग- बुध केंद्र में मूल त्रिकोण स्वगृही (मिथुन या कन्या राशि में हो)अथवा उच्च राशि (कन्या) का हो तो भद्र योग बनता है। इस योग से व्यक्ति उच्च व्यवसायी होता है। व्यक्ति अपने प्रबंधन, कौशल, बुद्धि-विवेक का उपयोग करते हुए धन कमाता है। यह योग सप्तम भाव में होता है तो व्यक्ति देश का जाना माना उधोगपति बन जाता है।

हंस योग- बृहस्पति केंद्र भाव में होकर मूल त्रिकोण स्वगृही (धनु या मीन राशि में हो) अथवा उच्च राशि (कर्क राशि) का हो तब हंस योग होता है। यह योग व्यक्ति को सुन्दर, हंसमुख, मिलनसार, विनम्र और धन-सम्पति वाला बनाता है। व्यक्ति पुण्य कर्मों में रूचि रखने वाला, दयालु, शास्त्र का ज्ञान रखने वाला होता है।

मालव्य योग- कुंडली के केंद्र भावों में स्तिथ शुक्र मूल त्रिकोण अथवा स्वगृही (वृष या तुला राशि में हो) या उच्च (मीन राशि) का हो तो मालव्य योग बनता है। इस योग से व्यक्ति सुन्दर, गुणी, तेजस्वी, धैर्यवान, धनी तथा सुख-सुविधाएं प्राप्त करता है।

शश योग- यदि कुंडली में शनि की खुद की राशि मकर या कुम्भ में हो या उच्च राशि (तुला राशि) का हो या मूल त्रिकोण में हो तो शश योग बनता है। यह योग सप्तम भाव या दशम भाव में हो तो व्यक्ति अपार धन-सम्पति का स्वामी होता है। व्यवसाय और नौकरी के क्षेत्र में ख्याति और उच्च पद को प्राप्त करता है।

गजकेसरी योग- जिसकी कुंडली में शुभ गजकेसरी योग होता है, वह बुद्धिमान होने के साथ ही प्रतिभाशाली भी होता है। इनका व्यक्तित्व गंभीर व प्रभावशाली भी होता है। समाज में श्रेष्ठ स्थान प्राप्त करते है। शुभ योग के लिए आवश्यक है कि गुरु व चंद्र दोनों ही नीच के नहीं होने चाहिए। साथ ही, शनि या राहु जैसे पाप ग्रहों से प्रभावित नहीं होना चाहिए।

सिंघासन योग- अगर सभी ग्रह दूसरे, तीसरे, छठे, आठवे और बारहवे घर में बैठ जाए तो कुंडली में सिंघासन योग बनता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति शासन अधिकारी बनता है और नाम प्राप्त करता है।

चतुःसार योग- अगर कुंडली में ग्रह मेष, कर्क तुला उर मकर राशि में स्तिथ हो तो ये योग बनता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति इच्छित सफलता जीवन में प्राप्त करता है और किसी भी समस्या से आसानी से बाहर आ जाता है।

श्रीनाथ योग- अगर लग्न का स्वामी, सातवे भाव का स्वामी दसवे घर में मौजूद हो और दसवे घर का स्वामी नवे घर के स्वामी के साथ मौजूद हो तो श्रीनाथ योग का निर्माण होता है। इसके प्रभाव से जातक को धन, नाम, ताश, वैभव की प्राप्ति होती है।

विशेष- कुंडली में राजयोग का अध्ययन करते वक़्त अन्य शुभ और अशुभ ग्रहो के फलों का भी अध्ययन जरुरी है। इनके कारण राजयोग का प्रभाव कम या ज्यादा हो सकता है।

कैसे राजयोग को मजबूत किया जा सकता है?
अगर कुंडली में राजयोग हो और वो कमजोर हो तो नव रत्नों की सहायता से, मंत्र जप आदि करके भी जीवन को सफल बनाया जा सकता है। साथ ही यह बात भी ध्यान रखनी चाहिए की राज योग नहीं होने पर भी व्यक्ति बहुत सफल हो सकते है अगर कुंडली में ग्रह शुभ और शक्तिशाली हो


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