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आज केवल शिव की चर्चा और ओर शिव रात्रि की

AACHARYA YATIN S UPADHYAY 24th Feb 2017

१. रविवार की सप्तमी आरोग्य प्रदान करने में सक्षम है | इसको अचला सप्तमी भी बोलते है | सूर्यग्रहण के समान इस का पुण्य है लाख गुना फल होगा जप का | सूर्यग्रहण के समय अथवा चंद्रग्रहण के समय स्नान, जप, ध्यान आदि से जो फल होता है वो फल होगा और रविवार की सप्तमी को अगर मानसिक गुरुपूजन का स्नान, जप, ध्यान आदि पूजन किया जाये तो वो फल अक्षय होगा | उस फल का क्षय नहीं होता, पुण्य का फल का क्षय होगा सुख भोगने से, पाप का फल होगा दुःख भोगने से, लेकिन गुरुपूजन का फल अक्षय होगा, नष्ट नहीं होगा, शाश्वत से मिलाने वाला होगा |

२. वर्ष में एक महाशिवरात्रि आती है और हर महीने में एक मासिक शिवरात्रि आती है। उस दिन श्याम को बराबर सूर्यास्त हो रहा हो उस समय एक दिया पर पाँच लंबी बत्तियाँ अलग-अलग उस एक में हो शिवलिंग के आगे जला के रखना | प्रार्थना कर देना, बैठ के जप करना | इससे व्यक्ति के सिर पे कर्जा हो तो जलदी उतरता है, आर्थिक परेशानियाँ दूर होती है |

३. वार्षिक महाशिवरात्रि – इस दिन हिम्मत है तो – सुबह से सूर्योदय से लेकर अगले दिन के सूर्योदय तक पानी भी न पिये | हर महाशिवरात्रि को अगर कोई करे भाग्य की रेखा ही बदल सकती है | ये करना ही चाहिये १५ से लेकर ४५ साल के उम्र के लोगों को |

४. मासिक शिवरात्रि को मंगलवार  उसे भोम प्रदोष योग कहते है ….उस दिन नमक, मिर्च नहीं खाना चाहिये, उससे जलदी फायदा होता है | मंगलदेव ऋणहर्ता देव हैं। उस दिन संध्या के समय यदि भगवान भोलेनाथ का पूजन करें तो भोलेनाथ की, गुरु की कृपा से हम जल्दी ही कर्ज से मुक्त हो सकते हैं। इस दैवी सहायता के साथ थोड़ा स्वयं भी पुरुषार्थ करें। पूजा करते समय यह मंत्र बोलें –
मृत्युंजयमहादेव त्राहिमां शरणागतम्। जन्ममृत्युजराव्याधिपीड़ितःकर्मबन्धनः।।


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