Astro Manoj Gupta
12th Oct 2018
कई देवी देवताओ के पाठ में लेखक दोहो में अपना नाम लिख देता है है जैसे
दुर्गा स्तुति पाठ के पहले अध्याय में
क्षमा करें विद्वान सब जान मुझे अन्जान |
चरणों की रज चाहता बालक ' चमन' नादान |
इसी प्रकार
हनुमान चालीसा में एक लाइन आती है :
तुलसीदास सदा हरि चेरा । कीजै नाथ हृदय महँ डेरा
आपने बस इतना करना है उनके नाम की जगह अपना नाम लेना है
जैसे क्षमा करें विद्वान सब जान मुझे अन्जान |
चरणों की रज चाहता बालक ' मनोज ' नादान
ऐसे ही हनुमान चलिषा में
मनोज सदा हरि चेरा । कीजै नाथ हृदय महँ डेरा
फिर देखिये कमाल
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