बर्थ टाइम रेक्टिफिकेशन

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Anil Shrivastava 26th Feb 2019

बहुत से लोग ज्योतिषिय परामर्श के लिए मेरे पास आते हैं और यह कहते हैं कि हमने अपनी कुंडली बहुत से ज्योतिषियों को दिखाई लेकिन कभी भी कोई भविष्यवाणी उनकी सफल नहीं हुई । इस के मूल में जो कारण है वह यह है कि अधिकांश लोगों का जन्म समय सही नहीं होता है क्यो कि जब जन्म होता है तो ठीक उसी समय टाइम नोट किया गया हो इसकी कोई गारंटी नहीं दूसरा आज से लगभग 20 बर्ष पहले डिजिटल घड़ियों का जमाना नहीं था और अधिकांश घडिय़ां चाबी वाली होती थी जिनकी वजह से जन्म समय मैं 10- 5 मिनट का अंतर आ जाना स्वाभाविक था । ज्योतिष में बर्थ टाइम रेक्टिफिकेशन अर्थात जन्म के समय को सही करना इसके लिए बहुत सारी तकनीक और फार्मूले विद्यमान है परंतु जो मुझे सबसे ज्यादा सही लगता है और जिसे प्रेक्टिकली मैंने बहुत सारी कुंडलियों पर आजमाया है और जो सर्वाधिक सही तरीका है वह है आपका चंद्र नक्षत्र स्वामी आपके लग्न के उपनक्षत्र स्वामी के साथ मैच करता हो तो यह आपका एकदम सही समय होगा और जब इस सही समय को आधार मानकर भविष्यवाणी करेंगे तो वह एकदम ठीक होगी । ऐसे मामलों में जब एक बार आप बर्थ टाइम रेक्टिफिकेशन कर लें तो उस व्यक्ति के जीवन में भूतकाल में घटी हुई घटनाओं को मिला कर देखें जब यह घटनाएं मैच कर जाए तो वह उसका शुद्धतम जन्म समय होगा मेरे पास जो भी कुंडलियां परामर्श के लिए आती हैं या किसी के द्वारा नेट से या WhatsApp से भेजी जाती है तो मैं सबसे पहले उन कुंडलियों में जन्म समय का रेक्टिफिकेशन जरूर करता हूं ताकि जो भी बात कही जाए उसकी प्रमाणिकता रहे । कुछ समय पूर्व एक महिला मेरे पास ज्योतिषीय परामर्श के लिए आयी थी वह जानना चाहती थी कि कुण्डली मै वैवाहिक सुख है या नहीं 2 वर्ष पहले उनका तलाक भी हो चुका था उस समय उनकी उम्र भी लगभग 39 साल की थी मैंने जब उनकी कुंडली की जांच पड़ताल की तो सारे कॉन्बिनेशन यह संकेत दे रहे थे कि इस महिला का वैवाहिक जीवन बेहद सफल है जबकि हकीकत में ऐसा नहीं था तब मैंने उस कुंडली में बर्थ टाइम रेक्टिफिकेशन किया और तब जाकर पिक्चर क्लियर हुई और उनके जन्म समय में 15 मिनट का अंतर आया 2,7,11 वाले कॉन्बिनेशन 1,6,10 मैं बदल गए और नतीजा बिल्कुल उल्टा हो गया । यदि आपके जन्म समय में कोई समस्या हो तो इसे किसी योग्य ज्योतिष विद से अवश्य ठीक करवा ले । इस संबंध में यदि आपका कोई प्रश्न हो use profile link to talk with me


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यस्मिन् जीवति जीवन्ति बहव: स तु जीवति | काकोऽपि किं न कुरूते चञ्च्वा स्वोदरपूरणम् || If the 'living' of a person results in 'living' of many other persons, only then consider that person to have really 'lived'. Look even the crow fill it's own stomach by it's beak!! (There is nothing great in working for our own survival) I am not finding any proper adjective to describe how good this suBAshit is! The suBAshitkAr has hit at very basic question. What are all the humans doing ultimately? Working to feed themselves (and their family). So even a bird like crow does this! Infact there need not be any more explanation to tell what this suBAshit implies! Just the suBAshit is sufficient!! *जिसके जीने से कई लोग जीते हैं, वह जीया कहलाता है, अन्यथा क्या कौआ भी चोंच से अपना पेट नहीं भरता* ? *अर्थात- व्यक्ति का जीवन तभी सार्थक है जब उसके जीवन से अन्य लोगों को भी अपने जीवन का आधार मिल सके। अन्यथा तो कौवा भी भी अपना उदर पोषण करके जीवन पूर्ण कर ही लेता है।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।

न भारतीयो नववत्सरोSयं तथापि सर्वस्य शिवप्रद: स्यात् । यतो धरित्री निखिलैव माता तत: कुटुम्बायितमेव विश्वम् ।। *यद्यपि यह नव वर्ष भारतीय नहीं है। तथापि सबके लिए कल्याणप्रद हो ; क्योंकि सम्पूर्ण धरा माता ही है।*- ”माता भूमि: पुत्रोSहं पृथिव्या:” *अत एव पृथ्वी के पुत्र होने के कारण समग्र विश्व ही कुटुम्बस्वरूप है।* पाश्चातनववर्षस्यहार्दिकाःशुभाशयाः समेषां कृते ।। ------------------------------------- स्वत्यस्तु ते कुशल्मस्तु चिरयुरस्तु॥ विद्या विवेक कृति कौशल सिद्धिरस्तु ॥ ऐश्वर्यमस्तु बलमस्तु राष्ट्रभक्ति सदास्तु॥ वन्शः सदैव भवता हि सुदिप्तोस्तु ॥ *आप सभी सदैव आनंद और, कुशल से रहे तथा दीर्घ आयु प्राप्त करें*... *विद्या, विवेक तथा कार्यकुशलता में सिद्धि प्राप्त करें,* ऐश्वर्य व बल को प्राप्त करें तथा राष्ट्र भक्ति भी सदा बनी रहे, आपका वंश सदैव तेजस्वी बना रहे.. *अंग्रेजी नव् वर्ष आगमन की पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं* ज्योतिषाचार्य बृजेश कुमार शास्त्री

आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताआलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।राम।

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