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वैदिक ज्योतिष में भावानुसार उच्च के बृहस्पति का फल

Dr Rakesh Periwal 25th Jan 2019

वैदिक ज्योतिष में भावानुसार उच्च के बृहस्पति का फल

वैदिक ज्योतिष के अनुसार कर्क राशि में स्थित होने पर बृहस्पति को उच्च का बृहस्पति कहा जाता है जिसका साधारण शब्दों में अर्थ यह होता है कि कर्क राशि में स्थित होने पर बृहस्पति अन्य सभी राशियों की तुलना में सबसे बलवान हो जाते हैं। कुछ वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि कुंडली में उच्च का बृहस्पति सदा शुभ फलदायी होता है जो सत्य नहीं है क्योंकि कुंडली में बृहस्पति का उच्च होना केवल उसके बल को दर्शाता है तथा उसके शुभ या अशुभ स्वभाव को नहीं जिसके चलते किसी कुंडली में उच्च का बृहस्पति शुभ अथवा अशुभ दोनों प्रकार के फल ही प्रदान कर सकता है जिसका निर्णय उस कुंडली में बृहस्पति के शुभ अशुभ स्वभाव को देखकर ही लिया जा सकता है। आज के इस लेख में हम कुंडली के विभिन्न 12 घरों में स्थित होने पर उच्च के बृहस्पति द्वारा प्रदान किये जाने वाले कुछ संभावित शुभ तथा अशुभ फलों के बारे में विचार करेंगे।

 

कुंडली के पहले घर में उच्च का गुरु👉 किसी कुंडली के पहले घर में स्थित उच्च का बृहस्पति शुभ होने की स्थिति में जातक को आर्थिक पक्ष से शुभ फल प्रदान कर सकता है तथा इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को अपने पिता अथवा दादा के माध्यम से धन संपत्ति की प्राप्ति हो सकती है। कुंडली के पहले घर में स्थित शुभ उच्च का गुरु जातक को नाम, प्रसिद्धि तथा प्रतिष्ठा आदि भी प्रदान कर सकता है तथा इस प्रकार का शुभ प्रभाव कुछ जातकों को अच्छा अथवा बहुत अच्छा आध्यात्मिक विकास भी प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक आध्यात्मिक रूप से बहुत विकसित हो सकते हैं तथा आलौकिक जगत के साथ संबंध भी स्थापित कर सकते हैं। वहीं दूसरी ओर कुंडली के पहले घर में स्थित बृहस्पति अशुभ होने की स्थिति में जातक के वैवाहिक जीवन में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकता है तथा जातक के वैवाहिक जीवन को बहुत कष्टमय बना सकता है। इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों का एक विवाह टूट भी सकता है तथा इस प्रभाव के कुंडली में बहुत प्रबल होने पर ऐसा अशुभ उच्च का गुरु जातक के एक से अधिक विवाह भी तोड़ सकता है। कुंडली के पहले घर में स्थित अशुभ उच्च का गुरु जातक को किसी गंभीर शारीरिक अथवा मानसिक रोग से पीड़ित भी कर सकता है तथा कई बार तो इस प्रकार के अशुभ प्रभाव के कुंडली में बहुत प्रबल होने पर ऐसा जातक जन्म लेते ही किसी गंभीर तथा कष्टप्रद रोग से पीड़ित होता है।

 

दूसरे घर में उच्च का गुरु👉 किसी कुंडली के दूसरे घर में स्थित उच्च का बृहस्पति शुभ होने की स्थिति में जातक को धनी अथवा बहुत धनी बना सकता है तथा ऐसे जातक अपने जीवन में समय समय पर धन की प्राप्ति करते रहते हैं। कुंडली के दूसरे घर में स्थित शुभ उच्च के गुरु के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातकों को अपने जीवन में धन कमाने के लिए बहुत अधिक परिश्रम नहीं करना पड़ता तथा इन जातकों के पास धन सहज ही आना शुरु हो जाता है जिससे इनका जीवन सुविधायुक्त तथा ऐश्वर्यपूर्ण हो जाता है। इस प्रकार के शुभ उच्च के बृहस्पति के प्रभाव में आने वाले जातकों का वैवाहिक जीवन भी सुखमय होता है तथा इनमें से कुछ जातकों को धनी अथवा बहुत धनी पत्नी प्राप्त होती है जबकि कुछ अन्य जातकों को बहुत संस्कारी तथा सुशील पत्नी प्राप्त होती है। वहीं दूसरी ओर कुंडली के दूसरे घर में स्थित उच्च के गुरु के अशुभ होने की स्थिति में जातक के वैवाहिक जीवन में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकतीं हैं तथा इस प्रकार के कुछ जातकों का विवाह किसी ऐसी स्त्री से हो सकता है जो स्वभाव से बहुत शंकालु अर्थात शक्की हो तथा जो छोटी से छोटी बात को लेकर भी जातक पर संदेह करके उसे परेशान कर सकती हो। कुंडली के दूसरे घर में स्थित अशुभ उच्च का गुरू जातक को अनेक प्रकार के रोगों से पीड़ित भी कर सकता है तथा इनमें से कुछ जातकों को लंबे समय तक चलने वाला अथवा जीवन भर चलने वाला तथा कष्ट देने वाला कोई रोग भी लग सकता है जो इन जातकों को बहुत लंबे समय तक कष्ट देने के पश्चात अंत में इनके प्राण भी ले सकता है।

 

तीसरे घर में उच्च का गुरु👉  किसी कुंडली के तीसरे घर में स्थित उच्च का बृहस्पति शुभ होने की स्थिति में जातक को आर्थिक लाभ प्रदान कर सकता है तथा इस प्रकार के जातक सामान्यतया अपने परिश्रम तथा प्रयास से ही धन अर्जित करते हैं। कुंडली के तीसरे घर में स्थित शुभ उच्च का गुरु जातक को विदेशी भूमि पर भी ले जा सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक विदेशों में स्थायी रूप से स्थापित हो सकते हैं जबकि इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले कुछ अन्य जातक विदेशों में काम के प्रयोजन से जाते रहते हैं। कुंडली में इस प्रकार का शुभ उच्च का बृहस्पति जातक को रचनात्मकता भी प्रदान कर सकता है जिसके चलते ऐसे जातक रचनात्मक कार्यक्षेत्रों में सफल हो पाते हैं। वहीं दूसरी ओर कुंडली के तीसरे घर में स्थित उच्च के गुरु का गुरु अशुभ होने की स्थिति में जातक को उसके मित्रों, सहयोगियों तथा भाईयों के कारण आर्थिक हानि, मान हानि तथा अन्य कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है तथा इस प्रकार के अशुभ उच्च के गुरु के प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों के भाई अथवा मित्र इनके साथ कोई बहुत बड़ा छल या विश्वासघात भी कर सकते हैं। कुंडली के तीसरे घर में स्थित अशुभ उच्च के बृहस्पति के कारण जातक को अपने व्यवसाय के माध्यम से समय समय पर धन हानि का सामना भी करना पड़ सकता है तथा इस प्रकार के अशुभ उच्च गुरु का प्रभाव कुंडली में बहुत प्रबल होने पर जातक को किसी प्रकार की दुर्घटना अथवा हिंसा के चलते भारी शारीरिक क्षति उठानी पड़ सकती है तथा कुछ स्थितियों में ऐसे जातक की किसी दुर्घटना अथवा हिंसा में मृत्यु भी हो सकती है।

 

चौथे घर में उच्च का गुरु👉 किसी कुंडली के चौथे घर में स्थित उच्च का बृहस्पति शुभ होने की स्थिति में जातक को सुख, सुविधा तथा ऐश्वर्यपूर्ण जीवन प्रदान कर सकता है तथा इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले बहुत से जातक धनी तथा समृद्ध परिवारों में जन्म लेते हैं जिसके चलते ऐसे जातक अपने बाल्यकाल से ही अनेक प्रकार की सुख सुविधाओं का भोग करना शुरु कर देते हैं तथा ऐसे जातकों के लिए जीवन भर धन की प्राप्ति सहज रहती है जिससे इन्हें सुविधापूर्वक जीवन जीने में सहायता प्राप्त होती है। कुंडली के चौथे घर में स्थित शुभ उच्च का गुरु जातक का संबंध विदेशों के साथ भी स्थापित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के प्रभाव में आने वाले कुछ जातक ऐसे व्यवसायों से जुड़ जाते हैं जिनकी आय विदेशों से प्राप्त होती है। वहीं दूसरी ओर कुंडली के चौथे घर में स्थित उच्च के गुरु के अशुभ होने की स्थिति में जातक को अपने विवाह तथा वैवाहिक जीवन में अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है तथा इस प्रकार के अशुभ उच्च के बृहस्पति का प्रभाव कुंडली में प्रबल होने पर जातक के एक अथवा एक स भी अधिक विवाह टूट भी सकते हैं। कुंडली के चौथे घर में स्थित अशुभ उच्च का गुरु जातक को उसकी संपत्ति तथा विशेषतया अचल संपत्ति से संबंधित समस्याएं भी दे सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों की संपत्ति किसी विवाद, झगड़े अथवा कोर्ट केस में भी फंस सकती है। कुंडली में इस प्रकार का अशुभ उच्च का गुरु जातक को अनेक प्रकार के रोगों से पीड़ित भी कर सकता है तथा इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को गंभीर मानसिक रोग भी लग सकते हैं।

 

पांचवें घर में उच्च का गुरु👉  किसी कुंडली के पांचवें घर में स्थित उच्च का बृहस्पति शुभ होने की स्थिति में जातक को बहुत अच्छी शिक्षा तथा रचनात्मक विशेषताएं प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक अपनी उच्च शिक्षा तथा रचनात्मक विशेषताओं के कारण अपने व्यवसायिक क्षेत्रों में सफल अथवा बहुत सफल हो सकते हैं। कुंडली के पांचवें घर में स्थित शुभ उच्च का गुरु जातक को आर्थिक रूप से बहुत समृद्ध बना सकता है तथा इस प्रकार का शुभ प्रभाव जातक को आध्यात्मिक तथा धार्मिक रूप से बहुत विकसित भी बना सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ उच्च गुरु के प्रभाव में आने वाले कुछ जातक आध्यात्म से जुड़े क्षेत्रों में भी कार्यरत पाये जा सकते हैं। कुंडली में स्थित इस प्रकार का शुभ उच्च का बृहस्पति जातक को स्वस्थ, भाग्यशाली तथा योग्य संतान भी प्रदान कर सकता है तथा ऐसी संतान जातक को बहुत सुख प्रदान करने वाली और आज्ञाकारी होती है। वहीं दूसरी ओर कुंडली के पांचवें घर में स्थित उच्च के गुरु के अशुभ होने की स्थिति में जातक के प्रेम जीवन में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों के प्रेम संबंध अनेक बार टूट सकते हैं जिसके कारण इन्हें बहुत पीड़ा उठानी पड़ सकती है तथा ऐसे कुछ अन्य जातकों को अपने प्रेमी अथवा प्रेमिका के कारण आर्थिक हानि अथवा मान हानि का सामना करना पड़ सकता है। कुंडली के पांचवें घर में स्थिति अशुभ उच्च का बृहस्पति जातक की शिक्षा में भी रुकावटें डाल सकता है तथा इस प्रकार का अशुभ प्रभाव जातक के मन में असमय वैराग भी उत्पन्न कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातक अपनी पारीवारिक समस्याओं से तंग आकर अपनी पत्नी तथा बच्चों को छोड़कर किसी जंगल अथवा आश्रम आदि का रास्ता भी पकड़ सकते हैं।

 

छठे घर में उच्च का गुरु👉  किसी कुंडली के छठे घर में स्थित उच्च का बृहस्पति शुभ होने की स्थिति में जातक को व्यवसायिक सफलता प्रदान कर सकता है तथा इस प्रकार के शुभ गुरु के प्रभाव में आने वाले कुछ जातक अपने व्यवसायिक क्षेत्रों में बहुत अधिक सफलता प्राप्त कर पाते हैं। इस प्रकार के शुभ उच्च के बृहस्पति का प्रभाव जातक को बहुत धन तथा सुख सुविधा आदि भी प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक बहुत धनी होते हैं तथा सुविधाओं से भरपूर जीवन व्यतीत करते हैं। कुंडली के छठे घर में स्थित शुभ उच्च का गुरु जातक को कलात्मक तथा रचनात्मक विशेषताएं भी प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातक सिने जगत के अभिनेता, गायक, संगीतकार, गीतकार आदि के रूप में सफल हो सकते हैं। वहीं दूसरी ओर कुंडली के छठे घर में स्थित उच्च का गुरु अशुभ होने की स्थिति में जातक को गंभीर आर्थिक समस्याओं से पीड़ित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को अपने जीवन में बहुत लंबे समय के लिए अथवा जीवन भर आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। कुंडली के छठे घर में स्थित अशुभ उच्च का बृहस्पति जातक को विभिन्न प्रकार के रोगों से भी पीड़ित कर सकता है तथा ऐसे रोग जातक को बहुत लंबे समय के लिए कष्ट दे सकते हैं तथा कुछ स्थितियों में इस प्रकार के अशुभ उच्च के गुरु के प्रबल प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को कोई प्राण घातक रोग भी लग सकता है जो इन जातकों को लंबे समय तक कष्ट देने के पश्चात इनकी मृत्यु का कारण भी बन सकता है। कुंडली में स्थित इस प्रकार का अशुभ उच्च का गुरु जातक को विभिन्न प्रकार के झगड़ों, विवादों तथा कोर्ट केसों के माध्यम से भी पीड़ित कर सकता है तथा इस प्रकार के कुछ जातकों को किसी झगड़े आदि के चलते कारावास में समय भी बिताना पड़ सकता है।

 

सातवें घर में उच्च का गुरु👉 किसी कुंडली के सातवें घर में स्थित उच्च का बृहस्पति शुभ होने की स्थिति में जातक को विवाह तथा वैवाहिक जीवन से संबंधित शुभ फल प्रदान कर सकता है तथा इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातकों का वैवाहिक जीवन सामान्यता अच्छा अथवा बहुत अच्छा व्यतीत होता है। कुंडली में इस प्रकार के शुभ उच्च गुरु का प्रभाव जातक को व्यवसायिक सफलता भी प्रदान कर सकता है तथा इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले बहुत से जातक व्यापार की अपेक्षा नौकरी में अधिक सफल देखे जा सकते हैं। ऐसे जातकों के सामान्यतया अपने सहकर्मियों तथा उच्चाधिकारियों के साथ अनुकूल संबंध होते हैं जिसके कारण इन्हें समय समय पर लाभ प्राप्त होते रहते हैं। वहीं दूसरी ओर कुंडली के सातवें घर में स्थित उच्च के बृहस्पति के अशुभ होने की स्थिति में जातक के वैवाहिक जीवन में कठिनाईयां पैदा हो सकती हैं तथा इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों का विवाह किसी ऐसी स्त्री के साथ हो सकता है जिसका स्वभाव जातक के स्वभाव से बिल्कुल ही विपरीत हो जिसके कारण ऐसे जातक के सदैव अपनी पत्नी के साथ गंभीर वैचारिक मतभेद रहते हैं तथा इस कारण ऐसा जातक अपने वैवाहिक जीवन से परेशान रहता है। कुंडली के सातवें घर में स्थित अशुभ उच्च का गुरु जातक को आर्थिक समस्याओं से भी पीड़ित कर सकता है तथा अनेक बार ऐसी आर्थिक समस्याओं का कारण जातक की आवश्यकता से अधिक धन व्यय करने की आदत अर्थात फिजूलखर्च की आदत होती है। कुंडली में इस प्रकार के अशुभ उच्च गुरु का प्रभाव जातक को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं तथा रोगों से पीड़ित भी कर सकता है।

 

आठवें घर में उच्च का गुरु👉 किसी कुंडली के आठवें घर में स्थित उच्च का बृहस्पति शुभ होने की स्थिति में जातक को शिक्षा तथा ज्ञान से संबंधित शुभ फल प्रदान कर सकता है तथा इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों की रूचि आध्यात्म तथा परा विज्ञान जैसे क्षेत्रों में होती है और इनमें से कुछ जातक इन क्षेत्रों में विकास तथा उपलब्धियां प्राप्त करने में सफल भी होते हैं। इस प्रकार के कुछ जातक आध्यात्म अथवा परा विज्ञान के क्षेत्रों में विकसित होने के पश्चात इन्हीं क्षेत्रों को अपना व्यवसायिक क्षेत्र भी बना सकते हैं जिसके चलते ऐसे जातक ज्योतिषी, वास्तु शास्त्री, अंक शास्त्री, जादू टोना करने अथवा जादू टोना दूर करने वाले, आत्माओं के साथ संबंध स्थापित करने वाले माध्यम, तांत्रिक, मांत्रिक तथा इस प्रकार के अन्य व्यवसायी बन सकते हैं। कुंडली के आठवें घर में स्थित शुभ उच्च का गुरु जातक को प्रतिष्ठा तथा प्रभुत्व वाला कोई पद भी प्रदान कर सकता है। वहीं दूसरी ओर किसी कुंडली के आठवें घर में स्थिति उच्च के गुरु के अशुभ होने की स्थिति में जातक के विवाह तथा वैवाहिक जीवन में भयंकर समस्याएं पैदा हो सकतीं हैं जिसके चलते इस प्रकार के अशुभ प्रभाव से पीड़ित कुछ जातकों का विवाह देरी से अथवा बहुत देरी से हो सकता है जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों को वैवाहिक जीवन में सुख की कमी का सामना करना पड़ सकता है। कुंडली के आठवें घर में स्थित अशुभ उच्च का गुरु जातक की आयु पर भी विपरीत प्रभाव डाल सकता है जिसके कारण इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों की मृत्यु अप्राकृतिक रूप से तथा समय से पहले ही हो सकती है। कुंडली में इस प्रकार के अशुभ उच्च बृहस्पति का प्रभाव जातक के व्यवसायिक क्षेत्र में भी समस्याएं पैदा कर सकता है तथा इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को मादक पदार्थों के सेवन की लत भी लग सकती है जिसके कारण इन जातकों को किसी गंभीर रोग का सामना भी करना पड़ सकता है।

 

नौवें घर में उच्च का गुरु👉  किसी कुंडली के नौवें घर में स्थित उच्च का गुरु शुभ होने की स्थिति में जातक अधिक अथवा बहुत अधिक धन संपत्ति प्रदान कर सकता है तथा इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को अपने पिता अथवा दादा के माध्यम से बहुत सा धन तथा संपत्ति प्राप्त होती है। कुंडली के नौवें घर में स्थित शुभ उच्च बृहस्पति जातक को व्यवसायिक क्षेत्र में भी बहुत अच्छी सफलता प्रदान कर सकता है तथा इस प्रकार के जातक सामान्यतया अपनी व्यवसायिक सफलता और अच्छे आचरण के कारण समाज में सम्मान तथा प्रतिष्ठा भी अर्जित करते हैं। कुंडली में इस प्रकार के शुभ उच्च गुरु का प्रभाव जातक को आध्यात्मिक तथा धार्मिक रूचियां भी प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक इन क्षेत्रों में उपलब्धियां प्राप्त करने में सफल हो पाते हैं तथा इनमें से कुछ जातक किसी आध्यात्मिक अथवा धार्मिक संस्था में उच्च पद की प्राप्ति भी करते हैं। वहीं दूसरी ओर कुंडली के नौवें घर में स्थित उच्च के गुरु के अशुभ होने की स्थिति में जातक को अपने द्वारा की गई गलतियों के कारण तथा अनुचित निर्णय लेने के कारण अपने व्यवसायिक क्षेत्र में पतन का सामना करना पड़ सकता है तथा इनमें से कुछ जातकों को अपनी किसी गंभीर भूल के परिणामस्वरूप बहुत अधिक धन हानि, मान हानि आदि का सामना करना पड़ सकता है तथा ऐसी गंभीर भूल के कारण इन जातकों को प्रतिष्ठा तथा प्रभुत्व के किसी पद से हाथ भी धोना पड़ सकता है। कुंडली के नौवें घर में स्थित अशुभ उच्च का बृहस्पति कुंडली में पित्र दोष भी बना सकता है तथा ऐसे पित्र दोष के दुष्प्रभाव में आने वाले जातक को किसी प्रकार के स्कैंडल अर्थात चर्चित कांड में फंसकर बहुत बदनामी, आर्थिक हानि तथा पद की हानि का सामना भी करना पड़ सकता है। कुंडली में इस प्रकार के अशुभ उच्च गुरु का प्रभाव जातक को विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य समास्याओं तथा रोगों से भी पीड़ित कर सकता है।

 

दसवें घर में उच्च का गुरु👉 किसी कुंडली के दसवें घर में स्थित उच्च का बृहस्पति शुभ होने की स्थिति में जातक को व्यवसायिक सफलता प्रदान कर सकता है तथा इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले अनेक जातक अपने परिश्रम, प्रयास तथा योग्यता के चलते व्यवसाय के माध्यम से धन कमाते हैं। इस प्रकार के शुभ उच्च गुरु के प्रभाव में आने वाले कुछ जातक विदेश में जाकर स्थापित हो सकते हैं जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातक अपने व्यवसाय के संबंध में विदेशों मे जाते रहते हैं। कुंडली के दसवें घर में स्थित शुभ उच्च के गुरु के प्रभाव में आने वाले कुछ जातक न्यायिक क्षेत्रों में, चिकित्सा से जुड़े क्षेत्रों में तथा जन संपर्क से जुड़े क्षेत्रों में कार्यरत पाये जा सकते हैं तथा ऐसे जातक इन व्यवसायिक क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रकार के शुभ उच्च बृहस्पति का किसी कुंडली में विशेष प्रभाव जातक को राजनीति आदि के माध्यम से सरकार में प्रतिष्ठा तथा प्रभुत्व वाला का कोई पद भी प्रदान कर सकता है। वहीं दूसरी ओर कुंडली के दसवें घर में स्थित उच्च के गुरु के अशुभ होने की स्थिति में जातक के व्यवसायिक क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकता है जिसके चलते इसे प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को अपने व्यवसाय के माध्यम से समय समय पर धन हानि का सामना करना पड़ सकता है जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों को अपने व्यवसायिक क्षेत्र से जुड़े किसी प्रकरण के कारण पुलिस केस, कोर्ट केस, अपयश अर्थात बदनामी तथा जेल अर्थात कारावास जैसी स्थितियों का सामना भी करना पड़ सकता है। कुंडली के दसवें घर में स्थित अशुभ उच्च गुरु जातक को मानसिक रूप से विक्षिप्त कर सकता है तथा इस प्रकार के कुछ जातक किसी प्रकार के मानसिक रोग से पीड़ित भी हो सकते हैं तथा इस प्रकार का अशुभ प्रभाव जातक को समय समय पर आर्थिक हानि भी पहुंचा सकता है और ऐसे कुछ जातकों को अपने जीवन में अनेक बार अपना निर्वाह करने के लिए आर्थिक कर्ज भी लेना पड़ सकता है।

 

ग्यारहवें घर में उच्च का गुरु👉 किसी कुंडली के ग्यारहवें घर में स्थित उच्च का बृहस्पति शुभ होने की स्थिति में जातक को आर्थिक लाभ प्रदान कर सकता है तथा इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक अपनी व्यवसायिक विशेषताओं के कारण, अपने परिश्रम तथा प्रयास के कारण और अपने भाग्य के कारण समय समय पर धन लाभ प्राप्त करते रहते हैं। कुंडली के ग्यारहवें घर में स्थित शुभ उच्च के गुरु के प्रभाव के कारण जातक का विवाह किसी धनी स्त्री से हो सकता है तथा जातक की पत्नी जातक के जीवन में बहुत सा धन और भाग्योदय लेकर आ सकती है। इस प्रकार के कुछ जातकों को अपने धनी ससुराल पक्ष से भी लाभ प्राप्त हो सकता है जिसके चलते ऐसे जातक अपने ससुराल पक्ष की सहायता से और अधिक समृद्ध होने में सफल हो पाते हैं। कुंडली के ग्यारहवें घर में स्थित शुभ उच्च गुरु जातक को बहुत अच्छी सामाजिक प्रतिष्ठा भी प्रदान कर सकता है तथा ऐसे जातक अपनी प्रतिष्ठा के कारण व्यवसाय में और अधिक सफलता प्राप्त करते हैं। वहीं दूसरी ओर कुंडली के ग्यारहवें घर में स्थित उच्च बृहस्पति के अशुभ होने की स्थिति में जातक को उसकी माता के बुरे स्वास्थ्य के चलते समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है तथा इनमें से कुछ जातकों को बहुत सा धन, समय तथा साधन अपनी माता के रोगों का उपचार करवाने के लिए खर्च करना पड़ सकता है। इस प्रकार के अशुभ उच्च गुरु का कुंडली में प्रभाव जातक के व्यवसायिक क्षेत्र में समय समय पर अनचाही तथा आकस्मिक समस्याएं पैदा कर सकता है जिसके कारण जातक के व्यवसायिक विकास में बाधाएं उत्पन्न हो सकतीं हैं। कुंडली के ग्यारहवें घर में स्थित अशुभ उच्च गुरु जातक के वैवाहिक जीवन में भी समस्याएं पैदा कर सकता है तथा इस प्रकार के कुछ जातकों की पत्नियां स्वभाव से बहुत संदेह करने वाली अथवा कठोर स्वभाव की हो सकतीं है जो अपने स्वभाव के कारण इन जातकों को समय समय पर पीड़ित कर सकतीं हैं।

 

बारहवें घर में उच्च का गुरु👉 किसी कुंडली के बारहवें घर में स्थित उच्च का बृहस्पति शुभ होने की स्थिति में जातक को आर्थिक लाभ प्रदान कर सकता है तथा इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक बुद्धिमान, चतुर, कार्यकुशल, रचनात्मक तथा अपना कार्य सिद्ध करने की कला को जानने वाले होते हैं तथा अपनी इन्हीं विशेषताओं के चलते ऐसे जातक अपने व्यवसायिक क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करते हैं। कुंडली के बारहवें घर में स्थित शुभ उच्च के गुरु के प्रभाव में आने वाले कुछ जातक अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए विदेश जा सकते हैं तथा इनमें से कुछ जातक अपनी उच्च शिक्षा पूरी करने के पश्चात विदेश में ही स्थापित हो जाते हैं तथा वहां बसकर बहुत धन कमाते हैं। इस प्रकार के शुभ गुरु का कुंडली में प्रभाव जातक को आध्यात्मिक रूप से विकसित होने में सहायता भी प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक आध्यात्मिक क्षेत्र में उपलब्धियां प्राप्त कर पाने में सफल होते हैं। वहीं दूसरी ओर कुंडली के बारहवें घर में स्थित उच्च के बृहस्पति के अशुभ होने की स्थिति में जातक को अपने व्यवसायिक क्षेत्र में बहुत संघर्ष करना पड़ सकता है तथा इस प्रकार के कुछ जातकों को प्रतिभाशाली तथा योग्य होने के पश्चात भी बहुत समय तक बिना व्यवसाय के रहना पड़ सकता है अथवा ऐसे किसी व्यवसाय को करना पड़ सकता है जो इनकी प्रतिभा और योग्यता की अपेक्षा में बहुत छोटा हो। कुंडली के बारहवें घर में स्थित अशुभ उच्च का गुरु जातक को संतान पैदा करने से संबंधित समस्याएं भी दे सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों को संतान का सुख प्राप्त करने के लिए बहुत लंबे समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है तथा इनमें से कुछ जातकों की संतान स्वस्थ न होने के कारण इन्हें अपनी संतान के रोगों के उपचार के लिए बहुत धन तथा समय लगाना पड़ सकता है। इस प्रकार के अशुभ उच्च गुरु के कुंडली में प्रभाव से पीड़ित कुछ जातक अपने जीवन में किसी समय अपने परिवार के उत्तरदायित्व से पीड़ित होकर अथवा अपनी पारीवारिक समस्याओं से पीड़ित होकर परिवार का त्याग करके सन्यास भी ले सकते हैं अथवा लंबे समय के लिए किसी आश्रम आदि की शरण में जा सकते हैं।

       इस प्रकार कुंडली के प्रत्येक घर में स्थित उच्च का बृहस्पति कुंडली में शुभ होने की स्थिति में जातक को शुभ फल तथा अशुभ होने की स्थिति में जातक को अशुभ फल प्रदान कर सकता है। इसलिए किसी कुंडली के किसी घर में केवल उच्च के बृहस्पति के स्थित होने से ही यह निर्णय नहीं ले लेना चाहिए कि ऐसा उच्च का बृहस्पति जातक को सदा शुभ फल ही देगा तथा कुंडली में ऐसे उच्च के बृहस्पति के फलों का निर्णय करने से पूर्व कुंडली में बृहस्पति के शुभ अथवा अशुभ स्वभाव का भली भांति निरीक्षण कर लेना चाहिए तथा तत्पश्चात ही कुंडली में उपस्थित उच्च के बृहस्पति के शुभ अथवा अशुभ फलों का निर्णय करना चाहिए।


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