Astro Shalini Malhottra
24th Jun 2018सूर्य को जल चढ़ाने
सूर्य को जल चढ़ाने से सीधे हमें लाभ प्राप्त होते हैं। सुबह-सुबह के समय जल्दी उठने से ताजी हवा और सूर्य की किरणों से हमारे स्वास्थ्य को लाभ होता है, यह सभी जानते हैं। इसके अलावा सूर्य को जल चढ़ाते समय पानी के बीच से सूर्य को देखना चाहिए, ऐसे में सूर्य की किरणों से हमारी आंखों की नैत्र ज्योति भी बढ़ती है। सूर्य की किरणों में विटामिन डी के कई गुण भी मौजूद होते हैं। इसलिए जो भी व्यक्ति उगते सूर्य को जल चढ़ाता है वह तेजस्वी होता है, उसकी त्वचा में आकर्षक चमक आ जाती है।
विज्ञान की दृष्टि से देखा जाए तो सूर्य और पृथ्वी के बीच करीब 1496000000 किलोमीटर की दूरी है। पृथ्वी तक सूर्य का प्रकाश पहुंचने में 8 मिनट 19 सेकेंड का समय लगता है। सूर्य ही सभी जीव-जन्तुओं के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण ऊर्जा का स्रोत है। पेड़- पौधों को तो भोजन भी सूर्य के कारण ही मिलता है। पुराने ऋषि-मुनियों द्वारा बताया गया है कि सूर्य को जल देने से हमारे शरीर के हानिकारक तत्व नष्ट हो जाते हैं।
सूर्य को देवता माना जाता है, इनकी पूजा के लिए कई विधियां भी बताई गई है। सूर्य देव को प्रतिदिन जल अर्पित करने पर हमारी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। साथ ही आंखों की रोशनी बढ़ती है और त्वचा में तेज पैदा होता है। समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है, यश मिलता है।
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को यश और मान-सम्मान का कारक ग्रह माना जाता है। किसी भी व्यक्ति की कुंडली में उच्च का सूर्य होने पर वह प्रतिष्ठित और तेजस्वी होता है। ऐसे व्यक्ति को समाज में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। वहीं इसके विपरित नीच का या अशुभ फल देने वाला सूर्य होने पर व्यक्ति को कई प्रकार के कलंक झेलने पड़ सकते हैं। आंखों या त्वचा से संबंधित रोग हो सकते हैं। इनसे बचने के लिए प्रतिदिन सूर्य को जल अर्पित करना चाहिए।
सूर्य को जल चढ़ाते समय ध्यान रखना चाहिए कि सूर्य को कभी भी सीधे नहीं देखना चाहिए। जल चढ़ाते समय पानी की धारा के बीच से सूर्य को देखें। इस प्रकार सूर्य की किरणों से आपकी आंखों की ज्योति भी बढ़ेगी। सूर्य को सुबह-सुबह जल्दी ही ज्यादा से ज्यादा 7-8 बजे तक जल चढ़ाना चाहिए। अधिक देर से जल नहीं चढ़ाना चाहिए।
सूर्य से शुभ फल प्राप्त करने के लिए रविवार के दिन सूर्य के निमित्त विशेष पूजा-अर्चना करनी चाहिए। साथ ही इस दिन सूर्य से संबंधित वस्तुओं का दान करने की परंपरा है। सूर्य से संबंधित वस्तुएं जैसे पीले वस्त्र या अन्य पीले रंग की खाद्य सामग्री का दान किसी जरूरतमंद व्यक्ति को किया जाता है।
सूर्य को चढ़ाने के लिए तांबे के लौटे का उपयोग करना चाहिए। लौटे में शुद्ध जल भरें और उसमें चावल और कुमकुम, पुष्प, गुड़ आदि पूजन सामग्री भी डाल लेना चाहिए। इसके बाद लौटे से सूर्य को जल चढ़ाएं। जल चढ़ाते समय सूर्य मंत्र ऊँ सूर्याय नम:, ऊँ भास्कराय नम:, ऊँ रवये नम:, ऊँ आदित्याय नम:, ऊँ भानवे नम: आदि का जप करते रहना चाहिए।
Astro shaliini
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Astro Manoj Gupta surya ka jal pairo mei nahi aana chahiye, yh bhi dhyaan rakhna chahiye
Acharya Sarwan Kumar Jha आपका अभिनन्दन हमें वो जानकारी जरूर देनी चाहिए जिससे अधिक से अधिक लोग लाभ प्राप्त कर सकें ।