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राशिनुसार नित्य नये उपाय एक मिथ्या प्रचार

Acharya Sarwan Kumar Jha 26th Aug 2017

आजतक सभी ज्योतिष एवं ज्योतिष पुस्तकों में लिखे संवाद का मुल होरा पराशर से ही लिया गया है होरा पराशर के अध्ययन के बिना किसी भी प्रकार के ज्योतिष या वास्तु की कल्पना नहीं की सकती । 18 प्रवर्तकों के बाद आज किसी की पुस्तक पढ़ने का दिल करता है तो गोपेश्वर नाथ ओझा का फलदीपिका, रामानुचार्य का भावर्थ रत्नाकर के साथ बी. भी रमन की पुस्तक जो अगल-अलग विषयों पर लिखे हैं और अपनी व्याख्या में ज्योतिष के मार्ग से भटके नहीं और कहीं दावा भी नहीं किया कि ये सूत्र मेरे द्वारा पतिपादित हैं । आज के बड़े विद्वान लेखक नकल कर पुस्तक लिखते हैं और कहते हैं ये हमारा अनुभव के द्वारा प्रतिपादित सिद्धान्त है जिसका पोल टेस्ट बुक पढ़ने वाले पाठक को आसानी से पता चल जाता है कि कहां से नकल किया । हम इसे भी अच्छा मानते हैं चलो कुछ तो सरलीकरण कर आमलोगों के पढ़ने योग्य बनाया परन्तु बहुत दुःख होता है जब ज्योतिष बनकर ऐसी बातें करते हैं जो शास्त्र सम्मत हो ही नहीं साथ ही ऐसे मिथ्या प्रचार नेशनल चैनल के माध्यम से करते हैं । उन्हीं बातों मे से एक बात जिसकी चर्चा करना चाहता हूँ कि हमारे लोकप्रिय ज्योतिषाचार्य अपने कार्यक्रम में बताते हैं मेषादि राशि वालों के लिए आज का दिन कैसा रहेगा यहां तक तो समझ में आता है कि ग्रहों के गोचर के अनुकुल चन्द्रमा को विशेष रूप से ध्यान में रखकर बताना संभव है, जबकि ये कार्य भी मुश्किल है कि कोई सिर्फ किसी के राशि को जानकर या समुचे संसार को 12 राश्यिं में बाँट कर शुभाशुभ परिणाम कैसे बता सकते हैं । हम रोज ही जातक को तीन चरणों में बांटकर, अनेक प्रकार के कार्य व्यवसाय को ध्यान रखकर साथ ही लिंगानुसार सोचसमझ कर लिखने और बताने का प्रयास करते हैं और स्वयं ही बहुत संतुष्ट नहीं होते ।

अब बात करते है जो लोग प्रत्येक राशि के बाद नित्य नये उपाय बताते हैं जैसे कि मेष राशि वाले हनुमान जी को आज 11 लड्डु का भोग लगाएं एवं बृष राशि वाले सरस्वती के 12 नामों का आज जप करके घर से बारह जाएं इसी तरह अन्य राशियों के लिए अलग-अलग उपाय कभी तो ऐसा भी सुना कि मिथुन राशि वाले बायां नाक साफकर काम पर निकलें और पुनः अगले दिन 12 राशियों के लिए भिन्न-भिन्न उपाय बता देते हैं । 

क्या ये संभव है ?

यह किस ग्रंथ में लिखा है ?

किस श्लोक की व्याख्या से यह ज्ञान प्राप्त हुआ है ?

क्या बिना उपाय किये जाने से काम में व्यवधान ही बना रहेगा ? 

ऐसा न जाने कितने सवाल मेरे मन में आता-जाता रहा और हमने कई पुस्तकों का अध्ययन भी किया परन्तु हमें कहीं ऐसी जानकारी नहीं मिल पायी, वेद पुराणों को भी संक्षिप्त में पढ़ने का प्रयास किया परन्तु ऐसे नियम कहीं नहीं बताए गए । हमारी समझ से तो परे है हम ऐसी व्याख्या करने में अपने आप को सक्षम नहीं पाए इसका कारण यह था कि किसी शास्त्रीय पुस्तक में इसका कोई आधार नहीं मिला ।

हम आप लोगों के समक्ष पाठ इसलिए लिख रहे हैं कि आप रूचि रखने वाले लोग जो सिर्फ ये समझते हैं कि इतने लोकप्रिय ज्योतिषियों ने यह बताया तो जरूर आधार होगा । हमने कई ज्योतिषियों से इसके बारे में जानने का प्रयास किया पर किसी का उत्तर संतोषपूर्ण नहीं था एवं हमें हास्यास्पद लगा । 

आप ज्योतिष में गंभीर रूचि रखने वाले लोग भी इसका पड़ताल करें और कोई यथार्थ जानकारी प्राप्त हो तो हमें भी सूचित करें । तबतक ऐसे संवाद से बचें जो लोकप्रिय हैं वो विद्वान हो सकते  हैं इसमें संशय होता है, आप भी हमारी तरह जिज्ञासु हों ।

धन्यवाद !


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