वेद किसे कहते हैं वेद क्या है ?

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Ravinder Pareek 21st Aug 2020

*प्र.1- वेद किसे कहते है ?*
उत्तर- ईश्वरीय ज्ञान की पुस्तक को वेद कहते है।

*प्र.2- वेद-ज्ञान किसने दिया ?
* उत्तर- ईश्वर ने दिया।

*प्र.3- ईश्वर ने वेद-ज्ञान कब दिया ?
* उत्तर- ईश्वर ने सृष्टि के आरंभ में वेद-ज्ञान दिया।

*प्र.4- ईश्वर ने वेद ज्ञान क्यों दिया ?
* उत्तर- मनुष्य-मात्र के कल्याण के लिए।

*प्र.5- वेद कितने है ?
* उत्तर- चार प्रकार के । 1-ऋग्वेद 2 - यजुर्वेद 3- सामवेद 4 - अथर्ववेद

*प्र.6- वेदों के ब्राह्मण ।
* वेद ब्राह्मण 1 - ऋग्वेद - ऐतरेय 2 - यजुर्वेद - शतपथ 3 - सामवेद - तांड्य 4 - अथर्ववेद - गोपथ

*प्र.7- वेदों के उपवेद कितने है।*
*उत्तर - वेदों के चार उप वेद है ।* वेद उपवेद 1- ऋग्वेद - आयुर्वेद 2- यजुर्वेद - धनुर्वेद 3 -सामवेद - गंधर्ववेद 4- अथर्ववेद - अर्थवेद

*प्र 8- वेदों के अंग हैं कितने होते है
* उत्तर - वेदों के छः अंग होते है । 1 - शिक्षा 2 - कल्प 3 - निरूक्त 4 - व्याकरण 5 - छंद 6 - ज्योतिष

*प्र.9- वेदों का ज्ञान ईश्वर ने किन किन ऋषियो को दिया ?
* उत्तर- वेदों का ज्ञान चार ऋषियों को दिया । वेद ऋषि 1- ऋग्वेद - अग्नि 2 - यजुर्वेद - वायु 3 - सामवेद - आदित्य 4 - अथर्ववेद - अंगिरा

*प्र.10- वेदों का ज्ञान ईश्वर ने ऋषियों को कैसे दिया ?

 * उत्तर- वेदों का ज्ञान ऋषियों को समाधि की अवस्था में दिया ।

 

*प्र.11- वेदों में कैसे ज्ञान है ?
* उत्तर- वेदों मै सब सत्य विद्याओं का ज्ञान-विज्ञान है ।

*प्र.12- वेदो के विषय कौन-कौन से हैं ?
* उत्तर- वेदों के चार विषय है। ऋषि विषय 1- ऋग्वेद - ज्ञान 2- यजुर्वेद - कर्म 3- सामवेद - उपासना 4- अथर्ववेद - विज्ञान

*प्र.13- किस वेद में क्या है।
* ऋग्वेद में। 1- मंडल - 10 2 - अष्टक - 08 3 - सूक्त - 1028 4 - अनुवाक - 85 5 - ऋचाएं - 10589 यजुर्वेद में। 1- अध्याय - 40 2- मंत्र - 1975 सामवेद में। 1- आरचिक - 06 2 - अध्याय - 06 3- ऋचाएं - 1875 अथर्ववेद में। 1- कांड - 20 2- सूक्त - 731 3 - मंत्र - 5977

*प्र.14- वेद पढ़ने का अधिकार किसको है ?
* उत्तर- मनुष्य-मात्र को वेद पढ़ने का अधिकार है।

*प्र.15- सबसे बड़ा वेद कौन-सा है ?
* उत्तर- सबसे बड़ा वेद ऋग्वेद है।

*प्र.16- वेदों की उत्पत्ति कब हुई ?
* उत्तर- वेदो की उत्पत्ति सृष्टि के आदि से परमात्मा द्वारा हुई । अर्थात 1 अरब 96 करोड़ 8 लाख 43 हजार वर्ष पूर्व ।

*प्र.17- वेद-ज्ञान के सहायक दर्शन-शास्त्र ( उपअंग ) कितने हैं और उनके लेखकों का क्या नाम है ?
* उत्तर- 1- न्याय दर्शन - गौतम मुनि। 2- वैशेषिक दर्शन - कणाद मुनि। 3- योगदर्शन - पतंजलि मुनि। 4- मीमांसा दर्शन - जैमिनी मुनि। 5- सांख्य दर्शन - कपिल मुनि। 6- वेदांत दर्शन - व्यास मुनि।

*प्र.18- शास्त्रों के विषय क्या है ?
* उत्तर- आत्मा, परमात्मा, प्रकृति, जगत की उत्पत्ति, मुक्ति अर्थात सब प्रकार का भौतिक व आध्यात्मिक ज्ञान-विज्ञान आदि।

*प्र.19- प्रामाणिक उपनिषदे कितनी है ?
* उत्तर- प्रामाणिक उपनिषदे केवल ग्यारह है।

*प्र.20- उपनिषदों के नाम बतावे ?
* उत्तर- 1-ईश ( ईशावास्य ) 2- केन 3-कठ 4-प्रश्न 5-मुंडक 6-मांडू 7-ऐतरेय 8-तैत्तिरीय 9- छांदोग्य 10-वृहदारण्यक 11- श्वेताश्वतर ।

*प्र.21- उपनिषदों के विषय कहाँ से लिए गए है ?
* उत्तर- उपनिषदों के विषय वेदों से लिए गए है !

*प्र.22- चार वर्ण कोन कोन से होते हैं।
* उत्तर- 1- ब्राह्मण 2- क्षत्रिय 3- वैश्य 4- शूद्र

*प्र.23- चार युग कोन -कोन से होते है और कितने वर्षों के ।
* उत्तर- 1- सतयुग - 17,28000 वर्षों का नाम ( सतयुग ) रखा है। 2- त्रेतायुग- 12,96000 वर्षों का नाम ( त्रेतायुग ) रखा है। 3- द्वापरयुग- 8,64000 वर्षों का नाम है। 4- कलयुग- 4,32000 वर्षों का नाम है। कलयुग के 4,976 वर्षों का भोग हो चुका है अभी तक। 4,27024 वर्षों का भोग होना बाकी है।

*प्र.24 पंच महायज्ञ कोन -कोन से होते है !
* उत्तर- 1- ब्रह्मयज्ञ 2- देवयज्ञ 3- पितृयज्ञ 4- बलिवैश्वदेवयज्ञ 5- अतिथियज्ञ स्वर्ग - जहाँ सुख है। नरक - जहाँ दुःख है।


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Suman Sharma

very nice article


Very good nice articles


वेदों की प्रश्नोत्तरी व उपयोगी ज्ञानवर्द्धक लेख धन्यवाद


Thanks you for compiling the Quranic legacy of the vedas


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आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताआलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।राम।

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