जन्म कुंडली में धन आने का योग

Share

Acharyaa Rajesh 14th Feb 2021

आज के समय में पैसा ही सबकुछ माना जाने लगा है। अच्छी लाइफ स्टाइल के लिए पैसा होना बहुत जरूरी है। लेकिन कई लोग जीवनभर मेहनत करने के बाद भी पर्याप्त धन एकत्रित नहीं कर पाते हैं। आज के विश्व में धनवान की ही पूजा होती है। जिस मनुष्य के पास धन नहीं होता, वह कितना ही विद्वान हो, कितना ही चतुर हो, उसे महत्ता नहीं मिलती। इस प्रकार ऐसे बहुत से व्यक्ति मिलते हैं, जो सर्वगुण सम्पन्न हैं, परन्तु धन के बिना समाज में उनका कोई सम्मान नहीं है। मित्रों हरेक आदमी को धन की आवश्यकता गौढ रूप से जरूरी है। जैसे शरीर की पालना,परिवार का पोषण अपनी अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने की आवश्यक्ता,शिक्षा व्यवसाय और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में धन की आवश्यकता होती है। अक्सर लोग अपने जीवन में धन की प्राप्ति के लिये कई उपाय करते है अपने अपने ज्ञान के अनुसार कार्य करते है,कोई धन से धन कमाता है कोई अपने को प्रदर्शित करके धन कमाता है,कोई अपनी अपनी भावना को प्रदर्शित करने के बाद धन को कमाता है,कोई अपनी शिक्षा को प्रदर्शित करने के बाद धन कमाता है कोई कर्जा दुश्मनी और बीमारी वाले कारणों से धन को कमाता है,कोई साझेदारी और विवाह आदि से धन कमाता है,कोई रिस्क लेकर अपमानित होकर जालसाजी करने के बाद धन कमाता है,कोई धर्म और भाग्य से अपने पैतृक कारणों से धन कमाने की चेष्टा करता है,कोई सरकारी या प्राइवेट नौकरी करने के बाद धन कमाता है,कोई मित्रों के सहयोग से कमन्यूकेशन वाले साधनों से और लाभ करवाने के द्वारा धन को कमाता है कोई अपने अनुसार यात्रा वाले साधन बनाकर बडी बडी संस्थायें बनाकर चैरिटीबल ट्रस्ट बनाकर धन कमाने की कोशिश करता है। जीवन में धन कमाने के लिये करोडों प्रकार के साधन धन कमाने के लिये प्रयोग में लाये जाते है। धन कमाने और धन के गंवाने के दो अलग अलग रूप जातक की कुंडली से देखे जाते है। कब धन आयेगा और कब धन जायेगा,धन आयेगा किस मद से और जायेगा किस कारण से दोनो की समानता को देखना भी जरूरी होता है। जो धन इकट्ठा हो जाता है वह धन भी भौतिक रूप में देखा जाता है,जो धन लगातार चलता रहता है वह भी धन चलायमान धन के रूप में देखा जाता है,जो अधिक धन कमाकर और धन को धन कमाने के साधनों में लगाकर और अधिक धन कमाने के लिये अपनी बुद्धि को प्रयोग में लाता है वही बडा धनी और समझदार कहलाता है। इसके बाद वे धन कमाने वाले लोग भी धन कमाने वाले माने जाते है जो कमाते तो है लाखों करोडों लेकिन उनके पास भोजन भी खाने को नही मिलता है,कई लोग धन को जीवन भर नही कमाते लेकिन बडे मौज से सारा जीवन ऐशो आराम से निकालते है। कई लोग कमाते भी खूब है और उनके पास अंत में धन बिलकुल नही होता है,कोई जीवन की शुरुआत में धन को कमा लेता है कोई जीवन की बीच की आयु में धन को कमाता है और कोई जीवन के अन्तिम समय में कमाना शुरु करता है। धन को ही लक्ष्मी के रूप में जाना जाता है और लोग इसे लक्ष्मी की कृपा के रूप से मानते है।
धन कमाने के लिये जातक की कुंडली में तीन कारण देखने जरूरी होते है,पहला कारण गुरु के रूप में देखा जाता है जो जातक की बुद्धि और ज्ञान के बारे में बताता है कि जातक का स्वभाव जीवन में किस प्रकार से अपने को संसार में प्रदर्शित करने लिये सामने आयेगा,वह लोगों के साथ कैसा व्यवहार करेगा,और व्यवहार के अन्दर वह कैसे लोगों से अपना सम्बन्ध स्थापित करेगा,उसे कैसे वातावरण में रहना होगा,उसके साथ कैसे साधन होंगे और किन साधनों को अपने जीवन में मुख्य रूप से मानेगा। गुरु के बाद कुंडली में धन के लिये साधनों के रूप में शुक्र को देखना जरूरी होता है,जातक को धन कमाने के लिये प्रयोग किये साधनों में कौन सा साधन अधिक उत्तम रहेगा,वह जिस धन को साधनों को चलाने के लिये प्रयोग में लायेगा वे उस धन से चल पायेंगे या नही,धन जो साधनों के रूप में प्रयोग में लाया जायेगा उसकी कीमत जातक के जीवन में कैसा व्यवहार करेगी,जातक जो धन कमाने के लिये धन का प्रयोग करेगा वह आगे के साधनों में उसी धन से धन कमाने के लिये कितना बचत करेगा,या धन को कमाने के चक्कर में इतने साधन बना लेगा कि उसके पास का धन बिलकुल नही बचेगा और वह कर्जा लेकर धन को साधनों में लायेगा,वह कैसे लोगों से धन कमाने के लिये अपनी सहायता को देगा या सहायता को लेने की कोशिश करेगा। तीसरा कारण धन कमाने के लिये साधनों के रूप में देखा जाता है,साधन हमेशा केतु के रूप में देखे जाते है और साधन के कारक केतु के सामने राहु के बिना साधनों की पूर्णता भी नही मिलती है,केतु जितना बली होगा उतना ही बली राहु होगा,केतु जितना खाने की कोशिश करेगा राहु उतना ही शक्ति के रूप में केतु को खिलायेगा,केतु की भूख मिटाने के लिये राहु धन को भी खाकर साधन रूपी केतु को चलाने के लिये अपने प्रयास को सामने करेगा,वह अपने प्रयास से प्रदर्शन करने की कला के रूप में शरीर को भी खाने की कोशिश करेगा,वह माता मन मकान और जानकार लोगों को भी अपनी भूख का आहार बनाकर केतु रूपी साधन को अपना बल देगा,वह शिक्षा की शक्ति को खाकर भी अपने बल को दे सकता है,वह कर्जा करवाकर बीमारी पालकर दुश्मनी पालकर भी केतु को बलवान करेगा,जीवन साथी और साझेदार को भी खाकर अपने बल को केतु को देने की कोशिश करेगा,वह जातक को अपमान में डालकर जातक को मौत देकर या मौत जैसे कारण पैदा करने के बाद अथवा भयंकर रिस्क देकर भी केतु को बलवान करने की कोशिश करेगा,धर्म भाग्य का बल लेकर या धर्म भाग्य से कमाकर भी केतु को बलवान करने की कोशिश करेगा,इस तरीके से इन तीन कारणों को कुंडली में देखकर जातक के धन कमाने के साधनों को देखा जाता है।


Like (1)

Comments

Post

Latest Posts

यस्मिन् जीवति जीवन्ति बहव: स तु जीवति | काकोऽपि किं न कुरूते चञ्च्वा स्वोदरपूरणम् || If the 'living' of a person results in 'living' of many other persons, only then consider that person to have really 'lived'. Look even the crow fill it's own stomach by it's beak!! (There is nothing great in working for our own survival) I am not finding any proper adjective to describe how good this suBAshit is! The suBAshitkAr has hit at very basic question. What are all the humans doing ultimately? Working to feed themselves (and their family). So even a bird like crow does this! Infact there need not be any more explanation to tell what this suBAshit implies! Just the suBAshit is sufficient!! *जिसके जीने से कई लोग जीते हैं, वह जीया कहलाता है, अन्यथा क्या कौआ भी चोंच से अपना पेट नहीं भरता* ? *अर्थात- व्यक्ति का जीवन तभी सार्थक है जब उसके जीवन से अन्य लोगों को भी अपने जीवन का आधार मिल सके। अन्यथा तो कौवा भी भी अपना उदर पोषण करके जीवन पूर्ण कर ही लेता है।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।

न भारतीयो नववत्सरोSयं तथापि सर्वस्य शिवप्रद: स्यात् । यतो धरित्री निखिलैव माता तत: कुटुम्बायितमेव विश्वम् ।। *यद्यपि यह नव वर्ष भारतीय नहीं है। तथापि सबके लिए कल्याणप्रद हो ; क्योंकि सम्पूर्ण धरा माता ही है।*- ”माता भूमि: पुत्रोSहं पृथिव्या:” *अत एव पृथ्वी के पुत्र होने के कारण समग्र विश्व ही कुटुम्बस्वरूप है।* पाश्चातनववर्षस्यहार्दिकाःशुभाशयाः समेषां कृते ।। ------------------------------------- स्वत्यस्तु ते कुशल्मस्तु चिरयुरस्तु॥ विद्या विवेक कृति कौशल सिद्धिरस्तु ॥ ऐश्वर्यमस्तु बलमस्तु राष्ट्रभक्ति सदास्तु॥ वन्शः सदैव भवता हि सुदिप्तोस्तु ॥ *आप सभी सदैव आनंद और, कुशल से रहे तथा दीर्घ आयु प्राप्त करें*... *विद्या, विवेक तथा कार्यकुशलता में सिद्धि प्राप्त करें,* ऐश्वर्य व बल को प्राप्त करें तथा राष्ट्र भक्ति भी सदा बनी रहे, आपका वंश सदैव तेजस्वी बना रहे.. *अंग्रेजी नव् वर्ष आगमन की पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं* ज्योतिषाचार्य बृजेश कुमार शास्त्री

आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताआलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।राम।

Top