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रामचरितमानस की चौपाई

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Astro Manish Tripathii 04th Feb 2018

रामचरितमानस की चौपाइयों में ऐसी क्षमता है कि इन चौपाइयों के जप से ही मनुष्य बड़े-से-बड़े संकट में भी मुक्त हो जाता है।

इन मंत्रो का जीवन में प्रयोग अवश्य करे प्रभु श्रीराम आप के जीवन को सुखमय बना देगे।

 

*🌸1.* रक्षा के लिए

*मामभिरक्षक रघुकुल नायक |*

*घृत वर चाप रुचिर कर सायक ||*

*🌸2.* विपत्ति दूर करने के लिए

*राजिव नयन धरे धनु सायक |*

*भक्त विपत्ति भंजन सुखदायक ||*

*🌸3.* सहायता के लिए

*मोरे हित हरि सम नहि कोऊ |*

*एहि अवसर सहाय सोई होऊ ||*

*🌸4.* सब काम बनाने के लिए

*वंदौ बाल रुप सोई रामू |*

*सब सिधि सुलभ जपत जोहि नामू ||*

*🌸5.* वश मे करने के लिए

*सुमिर पवन सुत पावन नामू |*

*अपने वश कर राखे राम ||*

*🌸6.* संकट से बचने के लिए

*दीन दयालु विरद संभारी |*

*हरहु नाथ मम संकट भारी ||*

*🌸7.* विघ्न विनाश के लिए

*सकल विघ्न व्यापहि नहि तेही |*

*राम सुकृपा बिलोकहि जेहि ||*

*🌸8.* रोग विनाश के लिए

*राम कृपा नाशहि सव रोगा |*

*जो यहि भाँति बनहि संयोगा ||*

*🌸9.* ज्वार ताप दूर करने के लिए

*दैहिक दैविक भोतिक तापा |*

*राम राज्य नहि काहुहि व्यापा ||*

*🌸10.* दुःख नाश के लिए

*राम भक्ति मणि उस बस जाके |*

*दुःख लवलेस न सपनेहु ताके ||*

*🌸11.* खोई चीज पाने के लिए

*गई बहोरि गरीब नेवाजू |*

*सरल सबल साहिब रघुराजू ||*

*🌸12.* अनुराग बढाने के लिए

*सीता राम चरण रत मोरे |*

*अनुदिन बढे अनुग्रह तोरे ||*

*🌸13.* घर मे सुख लाने के लिए

*जै सकाम नर सुनहि जे गावहि |*

*सुख सम्पत्ति नाना विधि पावहिं ||*

*🌸14.* सुधार करने के लिए

*मोहि सुधारहि सोई सब भाँती |*

*जासु कृपा नहि कृपा अघाती ||*

*🌸15.* विद्या पाने के लिए

*गुरू गृह पढन गए रघुराई |*

*अल्प काल विधा सब आई ||*

*🌸16.* सरस्वती निवास के लिए

*जेहि पर कृपा करहि जन जानी |*

*कवि उर अजिर नचावहि बानी ||*

*🌸17.* निर्मल बुद्धि के लिए

*ताके युग पदं कमल मनाऊँ |*

*जासु कृपा निर्मल मति पाऊँ ||*

*🌸18.* मोह नाश के लिए

*होय विवेक मोह भ्रम भागा |*

*तब रघुनाथ चरण अनुरागा ||*

*🌸19.* प्रेम बढाने के लिए

*सब नर करहिं परस्पर प्रीती |*

*चलत स्वधर्म कीरत श्रुति रीती ||*

*🌸20.* प्रीति बढाने के लिए

*बैर न कर काह सन कोई |*

*जासन बैर प्रीति कर सोई ||*

*🌸21.* सुख प्रप्ति के लिए

*अनुजन संयुत भोजन करही |*

*देखि सकल जननी सुख भरहीं ||*

*🌸22.* भाई का प्रेम पाने के लिए

*सेवाहि सानुकूल सब भाई |*

*राम चरण रति अति अधिकाई ||*

*🌸23.* बैर दूर करने के लिए

*बैर न कर काहू सन कोई |*

*राम प्रताप विषमता खोई ||*

*🌸24.* मेल कराने के लिए

*गरल सुधा रिपु करही मिलाई |*

*गोपद सिंधु अनल सितलाई ||*

*🌸25.* शत्रु नाश के लिए

*जाके सुमिरन ते रिपु नासा |*

*नाम शत्रुघ्न वेद प्रकाशा ||*

*🌸26.* रोजगार पाने के लिए

*विश्व भरण पोषण करि जोई |*

*ताकर नाम भरत अस होई ||*

*🌸27.* इच्छा पूरी करने के लिए

*राम सदा सेवक रूचि राखी |*

*वेद पुराण साधु सुर साखी ||*

*🌸28.* पाप विनाश के लिए

*पापी जाकर नाम सुमिरहीं |*

*अति अपार भव भवसागर तरहीं ||*

*🌸29.* अल्प मृत्यु न होने के लिए

*अल्प मृत्यु नहि कबजिहूँ पीरा |*

*सब सुन्दर सब निरूज शरीरा ||*

*🌸30.* दरिद्रता दूर के लिए

*नहि दरिद्र कोऊ दुःखी न दीना |*

*नहि कोऊ अबुध न लक्षण हीना ||*

*🌸31.* प्रभु दर्शन पाने के लिए

*अतिशय प्रीति देख रघुवीरा |*

*प्रकटे ह्रदय हरण भव पीरा ||*

*🌸32.* शोक दूर करने के लिए

*नयन बन्त रघुपतहिं बिलोकी |*

*आए जन्म फल होहिं विशोकी ||*

*🌸33.* क्षमा माँगने के लिए

*अनुचित बहुत कहहूँ अज्ञाता |*

*क्षमहुँ क्षमा मन्दिर दोऊ भ्राता ||*


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