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TULSI

29th Jun 2017

~~~~~ " तुलसी " का पौधा ~~~~~
~~~ ओर~~~ आपकी " बेटी " ~~~
~~~~~~~~~~~~~~
~~ राम~~~~~राम जी राधे-राधे ~~~
~~~~~~~~~~ १५-१०-२०१५ ~

जय श्रीकृष्ण तीन रोज चुप रहने का सफल प्रयोग आज पूर्ण हुआ। साधना के सबके मार्ग अपने-अपने हम प्रेम मार्ग के यात्री है। ओउ्म

तुलसी के पौधे के गुण-दोषों से तो लगभग सभी परिचित होगें ।

तुलसी जी कि मर्यादाओं से भी ।

लेकिन तुलसी जी की कुछेक ऎसी भी मर्यादाएं है जिनकी जानकारी समाज में नहीं है।

क्योंकि जब शास्त्र लिखे गये थे तब ऎसी परिस्थितयां नहीं थी।

तुलसी जी को जमीन में नहीं लगाना चाहिए । तुलसी जी को भवन की छत पर नहीं लगाना चाहिए । तुलसी जी को आँगन में लगाना चाहिए और उठी अवस्था में लगाना चाहिए ।

छत पर तुलसी जी लगाने से घर की बेटी सर पर नाचने लगती है। काबू से बाहर होकर अनैतिक कार्यों में लगी रहती है। लाज शर्म हया का त्याग कर बदनामी का कारण बन सकती है । बेटी अपनी मर्यादा से बाहर के कार्य करके खुश रहती है माँ-पिता को कष्ट देती रहती है जाने-अनजाने।

आज समाज का परिवेश बदला हुआ है।

परन्तु बेटी का सुख व दुख आज भी माँ-पिता के लिये उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कभी पहले हुआ करता था ।

आज भवन फलैट हो गये । ऊपर नीचे के परिवार अलग-अलग होते है।

तुलसी जी की एक मर्यादा यह भी है। कि एक भवन में तुलसी एक साथ होनी चाहिए । ना कि ऊपर वाले ओर नीचे वाले अलग-अलग रखें ।

एक मर्यादा है भी है कि तुलसी जी को लटकाना नहीं चाहिए ।

मान लेते है एक भवन पाँच मंजिल का है।
जो सबसे नीचे वाला है उसकी तुलसी जी तो घर से बाहर मिलेगी पक्का । वो नहीं जानता उसने अपनी बेटी को आवारा बनाने का पक्का इंतजाम कर दिया । १००% बेटी के चरित्र पर दाग लगेगा सच्चा हो या झुठा हो ।

इसके बाद पहली मंजिल वाले ने छज्जे में रखी या सीढियों में रखी दोनों का असर बेटी पर नकारात्मक आयेगा । बेटी का सुख हराम कर दिया । साथ ही नीचे वाले की बेटी के गलत आचरण में जाने में सहयोगी बनकर स्वयं को दण्ड का भागीदार बना लिया सो अलग से । ऊपर वाले परिवार का कोई सदस्य नीचे वाले परिवार की बेटी के गलत आचरण में मददगार होगा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से।

अब यही क्रम आप पाँच ही क्यों पचासों मंजिल तक के जाये उसमें सबके-सब ने बेटी को कष्टमयी बनाने का पक्का इन्तजार कर लिया ।

बेटी व तुलसी जी दोनों बुध का स्वरूप है। दोनों स्वर्ग~लोक की स्वच्छ वायु तत्व का प्रतिनिधित्व करती है । दोनों बेहद शुद्धता का परिवेश चाहती है। वतावरण दूषित तो तो मुरझा जाती है। तुलसी जी को भोजन किये हाथों से या गंगे हाथों से जल दिया जाये या झुआ जाये तो वह सूक जाती है यानी दुखी हो जाती है। बिल्कुल ऎसा ही बेटी के साथ होता है।

यदि आप फैलेटों में या अपने खुद के भवन में अपने परिजनों के साथ ऊपर नीचे की स्थिति में रहते है। तो घर में तुलसी लगाने से बचें ।

घर के नजदीक के पूजा-स्थान में जाकर उचित स्थान पर तुलसी का पौधा उठे हुए गमले में लगाये । ऎसा करना से दोहरे नुकसान से बचकर दोहरा लाभ लिया जा सकता है। हरि~~ओउम्

मंथन करें हमारे दृष्टिकोण को चैक करें । कुछ असैद्धान्तिक लगे अवश्य गलती बताये । सिद्धान्त कभी असत्य का पक्ष नहीं लेता है।

ओउ्म ओउ्म ओउ्म

" तत्वज्ञ " कुमार प्रवीण


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