Shubham Garg
12th Nov 2019शनि को दुःख का कारक ग्रह माना गया है क्यूंकि ये दुःख देता है किन्तु सदेव स्मरण रहे दुःख का आगमन सुख की उपस्थिति का प्रमाण है क्यूंकि ये चक्र सदेव चलता रहता है शनि की छाया से उत्पन्न राहु और केतु ग्रह सदेव शनि के आदेश की प्रतीक्षा में रहते हैं कि किसी व्यक्ति को उसके पूर्व जन्म के पाप कर्म के फल कब कैसे दिए जाए इसी कारण शनि मे राहु का अन्तर सदेव ही कष्टकारी होता है चाहे वो थोड़ा ही क्यूँ ना हो, द्रष्टि युति होने पर प्रभाव अधिक होता है पूर्व जन्म के कर्मों को भोग लेना एक मात्र उपाय नहीं है अपितु योग ध्यान क्षमाँ the से प्रारब्ध काटता है इसलिए ऐसे कर्म करो जिनसे आगामी कर्म भविष्य के प्रारब्ध में ना बदले जय माता दी 🚩 🚩 🚩 ✒️ Shubham Garg
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