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पांच तत्त्वों से ही सृष्टि के निर्माण

Acharya Sarwan Kumar Jha 19th Jun 2018

पांच तत्त्वों से ही सृष्टि के निर्माण की बात होती है, राशि के गुण स्वरूप को समझने के लिए आकाश की चर्चा नहीं है । आकाश की चर्चा ग्रहों के गुण स्वरूप में मिलता है । यहां चार तत्त्वों में 12 राशियों का विभाजन किस तरह किया गया है उसको समझने का प्रयास करते हैं - अग्नि तत्त्व राशियां - - मेष, सिंह और धनु - 1, 5, 9 पहली अग्नि तत्त्व की राशि याद रखें और उसमें 4 जोड़ते चलें तो अगली अग्नि तत्त्व की राशि प्राप्त हो जाएगी । हम लोगों ने पीछे पाठ में पढ़ा है कि मेष, सिंह और धनु विषम राशि है जिसे क्रूर राशि भी कहते हैं । हम सभी जानते हैं कि हमारा स्वभाव तीन प्रकार के होते हैं चर, स्थिर और द्विस्वभाव तो अग्नि तत्त्व राशियों में तीनों को स्थान प्राप्त है । मेष चर राशि है सिंह स्थिर और धनु द्विस्वभाव अर्थात तीनों गुण धर्म वाले में अग्नि तत्त्व को स्थान प्राप्त है । विषय को ध्यान पूर्वक पढ़ने से हमारे लिए ज्योतिष सीखना आसान होगा । अग्नि तत्त्व राशि हो तो जातक का स्वभाव कैसा होगा यह समझना आसान होगा । पृथ्वी तत्त्व राशियां - - बृष, कन्या और मकर - 2, 6, 10 पहली पृथ्वी तत्त्व की राशि याद रखें और उसमें 4 जोड़ते चलें तो अगली पृथ्वी तत्त्व की राशि प्राप्त हो जाएगी । हम लोगों ने पीछे पाठ में पढ़ा है कि बृष, कन्या और मकर सम राशि है जिसे सौम्य राशि भी कहते हैं । हम सभी जानते हैं कि हमारा स्वभाव तीन प्रकार के होते हैं चर, स्थिर और द्विस्वभाव तो पृथ्वी तत्त्व राशियों में तीनों को स्थान प्राप्त है । मकर चर राशि है बृष स्थिर और कन्या द्विस्वभाव अर्थात तीनों गुण धर्म वाले में पृथ्वी तत्त्व को भी स्थान प्राप्त है । पृथ्वी तत्त्व अर्थात भार सहित स्थिरता व अडिगता जो जातक के स्वभाव में होगा । वायु तत्त्व राशियां - - मिथुन, तुला और कुंभ - 3, 7, 11 पहली वायु तत्त्व की राशि याद रखें और उसमें 4 जोड़ते चलें तो अगली वायु तत्त्व की राशि प्राप्त हो जाएगी । हम लोगों ने पीछे पाठ में पढ़ा है कि मिथुन, तुला और कुंभ राशि है जिसे क्रूर राशि भी कहते हैं । हम सभी जानते हैं कि हमारा स्वभाव तीन प्रकार के होते हैं चर, स्थिर और द्विस्वभाव । वायु तत्त्व राशियों को भीं तीनों प्रकृति की राशियों में स्थान प्राप्त है । तुला चर राशि है कुंभ स्थिर और मिथुन द्विस्वभाव अर्थात तीनों गुण धर्म वाले राशि में यहां वायु तत्त्व को भी स्थान प्राप्त है । वायु तत्त्व अर्थात वायु की तरह गतिशीलता प्राप्त, जो जातक के स्वभाव में परिलक्षित होगा । जल तत्त्व राशियां - - कर्क, बृश्चिक और मीन -4, 8, 12 पहली जल तत्त्व की राशि याद रखें और उसमें 4 जोड़ते चलें तो अगली जल तत्त्व की राशि प्राप्त हो जाएगी । हम लोगों ने पीछे पाठ में पढ़ा है कि कर्क, बृश्चिक और मीन सम राशि है जिसे सौम्य राशि भी कहते हैं । हम सभी जानते हैं कि हमारा स्वभाव तीन प्रकार के होते हैं चर, स्थिर और द्विस्वभाव यहां जल तत्त्व राशियों में तीनों प्रकृति को स्थान प्राप्त है । कर्क चर राशि है बृश्चिक स्थिर और मीन द्विस्वभाव अर्थात तीनों प्रकृति वाले राशियों में यहां जल तत्त्व को भी स्थान प्राप्त है । जल तत्त्व अर्थात जल की तरह शीतलता और सरलता आदि जो जातक के स्वभाव में परिलक्षित होगा । हमलोगों ने समझा कि सम-विषम, स्त्री-पुरूष, सौम्य-क्रूर, चर-अचर-द्विस्वभाव तथा अग्नि-पृथ्वी-वायु-जल आदि की संज्ञा वाले राशियाँ का जातक के उपर किस प्रकार प्रभाव होता है । लेकिन हम केवल राशि से ही उसके स्वभाव एवं विचारों में आने वाले परिवर्तन को समझ पाएंगे ऐसा कहना गलत होगा लेकिन स्वभाव एवं विचारों को समझने के लिए राशियों के गुण-स्वरूप को ही प्रथम पैमाना मानना चाहिए ।


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