नए वस्त्र पहनने का शुभ महूर्त

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Pandit dilip 11th Jul 2019

नई ड्रेस पहनना कब शुभ ह * अगर चाहते हैं नई ड्रेस आपके लिए शुभ हो तो ध्यान रखें नई ड्रेस के प्रति हमारा आकर्षण भी खास होता है। कई बार हमें जो ड्रेस सबसे प्यारी होती है, अक्सर वही खराब हो जाती है। समझ में नहीं आता ऐसा क्यों हुआ? क्या आप जानते हैं कि नक्षत्रों की इसमें बड़ी भूमिका होती है। किसी खास नक्षत्र में पहनी ड्रेस आपको नुकसान पहुंचा सकती है उसी तरह कई बार किसी नक्षत्र विशेष में पहनी ड्रेस आपकी प्रगति के द्वार भी खोल सकती है। आइए जानें कि नक्षत्र कैसे पहचानें और किस नक्षत्र में पहनें नई ड्रेस? क्या हैं नक्षत्र :- हमारे आकाश मंडल में 27 नक्षत्र है। यानी पूरे आकाश को 27 भागों में विभाजित कर हर भाग को एक नक्षत्र का नाम दिया गया है। ये नक्षत्र शुभ और अशुभ दोनों तरह के असर देते हैं। अगर पहली बार नई ड्रेस कैलेंडर में नक्षत्र देखकर पहनी जाए तो हो सकता है अचानक आपकी आर्थिक स्थिति सुधर जाए या फिर हो सकता है आपको लंबे समय से चली आ रही स्वास्थ्य समस्याओं से छुटकारा मिल जाए। ऐसा भी हो सकता है कि नक्षत्रों की जानकारी के बिना पहनी ड्रेस को चूहे काट सकते हैं या फिर आपको आग से खतरा हो सकता है। आइए जानें नक्षत्र और नई ड्रेस के दिलचस्प संबंध को। जब भी चन्द्रमा किसी नक्षत्र में रहता है और उस समय आपने नई ड्रेस पहन ली तो रिजल्ट भी वैसे ही मिलेंगे। आइए जानते हैं कि किस नक्षत्र में चंद्र के रहने पर क्या असर हो सकता है? अश्विनी- अगर चंद्रमा अश्विनी नक्षत्र में रहता है ‍तब आप कोई नई ड्रेस पहनते हैं तो आप ढेर सारी नई ड्रेस और पा सकते हैं। भरणी- चंद्रमा के भरणी नक्षत्र में रहने पर पहनी नई ड्रेस घर में चोरी करवा सकती है। अत: भरणी नक्षत्र पर नई ड्रेस पहनने से बचें। कृतिका- इस नक्षत्र में चंद्रमा हो तब नई ड्रेस कतई ना पहनें आपको आग से खतरा हो सकता है। रोहिणी- इस नक्षत्र में चंद्रमा शुभ होता है। इस दिन पहनी नई ड्रेस से अचानक आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है। मृगशिरा- इस नक्षत्र से जरा बचकर रहे। अगर भूल से आपने मृगशिरा में चंद्रमा रहने पर नई ड्रेस पहनी तो चूहे आपकी ड्रेस काट सकते हैं। आश्लेषा- इस नक्षत्र से बचकर रहे। ड्रेस खराब हो सकती है। मघा- जीवन में उलझनें बढ़ सकती हैं। पूर्वा फाल्गुनी- प्रशासनिक समस्याएं उभर सकती है। उत्तरा फाल्गुनी- आय में वृद्धि और पुरानी सेहत की समस्या से छुटकारा मिल सकता है। आर्द्रा- यह नक्षत्र, नए कपड़े पहनने पर धन का नुकसान करवा सकता है। अत: इस नक्षत्र में चंद्रमा होने पर नई ड्रेस पहनने से बचें। पुनर्वसु - समस्या आ सक‍ती है। पुष्य- अति शुभ नक्षत्र है। इस पर चंद्रमा हो और साथ में आपकी नई ड्रेस तो चार चांद लग सकते हैं। आपको अलग-अलग स्त्रोतों से आय प्राप्त हो सकती है। हस्त - अगर आप करियर या स्टडी में सक्सेस चाहते हैं तो इस नक्षत्र में नई ड्रेस जरूर पहनें। मनवांछित सफलता मिलेगी। चित्रा- इस नक्षत्र में नई ड्रेस धारण करने से आपको एक नई ड्रेस और मिल सकती है। स्वाति- यह नक्षत्र कोई बड़े अवसर या समारोह का सुख देता है। खाने-पीने के शौकीन लोग इस नक्षत्र पर नई ड्रेस पहन सकते हैं। विशाखा- यह नक्ष‍त्र नई ड्रेस के मामले में बड़ा शुभ है। इससे आपके फेम और नेम में इतना असर पड़ेगा कि आप मीडिया में छा जाएंगे। अनुराधा- यह नक्षत्र मिलनसार लोगों के लिए है। इस दिन नई ड्रेस पहनने पर आपको अच्छे और नए दोस्त मिलेंगे। ज्येष्ठा- सावधान! यह नक्षत्र हर प्रकार का नुकसान करवा सकता है। मूल- नई ड्रेस खो सकती है। लॉन्ड्री से खराब हो सकती है। पूर्वाषाढ़ा- इस नक्षत्र में चंद्रमा हो तब कतई नई ड्रेस न पहनें, आपको स्वास्थ्य की कोई नई समस्या शुरू हो सकती है। उत्तराषाढ़ा- अगर इस नक्षत्र में चंद्रमा है और आपने नई ड्रेस पहनी तो आप अवश्य किसी बड़े सेमिनार या समारोह में भाग लेंगे जहां से आपको भविष्य की उजली राह नजर आएगी। श्रवण- इस नक्षत्र में नई ड्रेस पहनने पर आंखों को कष्ट हो सकता है। धनिष्ठा- अगर आपका कोई काम बरसों से रूका पड़ा है तब इस नक्षत्र में चंद्रमा रहे उस दिन ड्रेस धारण कीजिए। काम तुरंत बनेगा। शतभिषा- इस नक्षत्र में नई ड्रेस हरगिज ना पहनें। आपको जहर का खतरा हो सकता है। पूर्वा भाद्रपद- इस नक्षत्र में भी नए परिधान पहनने से सतर्क रहें। आपको पानी से खतरा हो सकता है। उत्तरा भाद्रपद- इस नक्षत्र में खुद तो नए कपड़ें पहनें ही नहीं बच्चों को भी हरगिज न पहनाएं .. यह नक्षत्र तकलीफें बढ़ा सकता है। रेवती- नई ड्रेस के मामले में अत्यंत शुभ और शानदार नक्षत्र है। आपको अपार आर्थिक लाभ हो सकता है साथ ही मनपसंद गहने भी खरीद सकते हैं। विशेष : इन नक्षत्रों में खरीदे गए कपड़े शुभ-अशुभ फल नहीं देते बल्कि पहली बार पहनने से इनके ऐसे फल मिलते हैं। आप चाहते हैं कि नई ड्रेस पहनने के शुभ परिणाम मिले तो नक्षत्रों पर नजर जरूर डालें। जानकारी शास्त्रों के अनुसार प्रस्तुत है।


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*वसंत नवरात्र 13 अप्रैल से 21 अप्रैल 2021 तक* चैत्र नवरात्रि घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 13 अप्रैल दिन मंगलवार प्रातः 5:30 से 10:15 तक। अभिजीत मुहूर्त 11:56 से दोपहर 12: 47 तक होगा। 13 अप्रैल से नव संवत्सर भारतीय नववर्ष की शुरुआत भी होगी। क्रमश: नवरात्र 13 अप्रैल प्रतिपदा ,शैलपुत्री। 14 अप्रैल द्वितीया, ब्रह्मचारिणी। 15 अप्रैल तृतीया, चंद्रघंटा। 16 अप्रैल चतुर्थी ,कुष्मांडा। 17 अप्रैल पंचमी, स्कंदमाता। 18 अप्रैल षष्ठी, कात्यायनी। 19 अप्रैल सप्तमी, कालरात्रि। 20 अप्रैल अष्टमी, महागौरी। 21 अप्रैल नवमी, सिद्धिदात्री मां का पूजन होता है। ज्योतिषाचार्य अजय शास्त्री के अनुसार दुर्गा सप्तशती नारायण अवतार श्री व्यास जी द्वारा रचित महापुराणों में मार्कंडेय पुराण से ली गई है। इसमें 700 श्लोक व 13 अध्यायों का समावेश होने के कारण इसे सप्तशती का नाम दिया गया है। तंत्र शास्त्रों में इसका सर्वाधिक महत्व प्रतिपादित है और तांत्रिक क्रियाओं का इसके पाठ में बहुत उपयोग होता है। दुर्गा सप्तशती में 360 शक्तियों का वर्णन है। ज्योतिषाचार्य ने बताया है कि शक्ति पूजन के साथ भैरव पूजन भी अनिवार्य है। दुर्गासप्तशती का हर मंत्र ब्रह्मवशिष्ठ विश्वामित्र ने शापित किया है। शापोद्धार के बिना पाठ का फल नहीं मिलता दुर्गा सप्तशती के 6 अंगों सहित पाठ करना चाहिए कवच, अर्गला, कीलक और तीनों रहस्य महाकाली महालक्ष्मी महासरस्वती का रहस्य बताया गया है। नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती की चरित्र का क्रमानुसार पाठ करने से शत्रु नाश और लक्ष्मी की प्राप्ति व सर्वदा विजय होती है।

यस्मिन् जीवति जीवन्ति बहव: स तु जीवति | काकोऽपि किं न कुरूते चञ्च्वा स्वोदरपूरणम् || If the 'living' of a person results in 'living' of many other persons, only then consider that person to have really 'lived'. Look even the crow fill it's own stomach by it's beak!! (There is nothing great in working for our own survival) I am not finding any proper adjective to describe how good this suBAshit is! The suBAshitkAr has hit at very basic question. What are all the humans doing ultimately? Working to feed themselves (and their family). So even a bird like crow does this! Infact there need not be any more explanation to tell what this suBAshit implies! Just the suBAshit is sufficient!! *जिसके जीने से कई लोग जीते हैं, वह जीया कहलाता है, अन्यथा क्या कौआ भी चोंच से अपना पेट नहीं भरता* ? *अर्थात- व्यक्ति का जीवन तभी सार्थक है जब उसके जीवन से अन्य लोगों को भी अपने जीवन का आधार मिल सके। अन्यथा तो कौवा भी भी अपना उदर पोषण करके जीवन पूर्ण कर ही लेता है।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।

न भारतीयो नववत्सरोSयं तथापि सर्वस्य शिवप्रद: स्यात् । यतो धरित्री निखिलैव माता तत: कुटुम्बायितमेव विश्वम् ।। *यद्यपि यह नव वर्ष भारतीय नहीं है। तथापि सबके लिए कल्याणप्रद हो ; क्योंकि सम्पूर्ण धरा माता ही है।*- ”माता भूमि: पुत्रोSहं पृथिव्या:” *अत एव पृथ्वी के पुत्र होने के कारण समग्र विश्व ही कुटुम्बस्वरूप है।* पाश्चातनववर्षस्यहार्दिकाःशुभाशयाः समेषां कृते ।। ------------------------------------- स्वत्यस्तु ते कुशल्मस्तु चिरयुरस्तु॥ विद्या विवेक कृति कौशल सिद्धिरस्तु ॥ ऐश्वर्यमस्तु बलमस्तु राष्ट्रभक्ति सदास्तु॥ वन्शः सदैव भवता हि सुदिप्तोस्तु ॥ *आप सभी सदैव आनंद और, कुशल से रहे तथा दीर्घ आयु प्राप्त करें*... *विद्या, विवेक तथा कार्यकुशलता में सिद्धि प्राप्त करें,* ऐश्वर्य व बल को प्राप्त करें तथा राष्ट्र भक्ति भी सदा बनी रहे, आपका वंश सदैव तेजस्वी बना रहे.. *अंग्रेजी नव् वर्ष आगमन की पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं* ज्योतिषाचार्य बृजेश कुमार शास्त्री

आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताआलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।राम।

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