Mythological birth tale of Goddess laxmi: goddess of wealth and fortune

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24th Jul 2020

This article is all about origin of the "goddess of wealth" or "mother of prosperity and charm" Goddess Lakshmi Birth Story: Every God and Goddess has a profound importance in Hinduism which is reflected in the ancient scriptures. In recent times, For Hindus, the goddess Lakshmi symbolizes good luck. The word Lakshmi is derived from the Sanskrit word Laksya and she is the goddess of wealth and prosperity of all forms, both material and spiritual. Lakshmi is the household goddess of mostly all Hindu families and is worshipped daily.  The story begins with a meeting between Sage Durvasa and Lord Indra. Sage Durvasa with a lot of respect offers a garland of flowers to Lord Indra. Lord Indra takes the flowers and places it on the forehead of his elephant Airavat. The elephant takes the garland and throws it down on the earth.  The chief of sages Durvasa gets angry at this disrespectful treatment of his gift says to the King of Gods, you have an inflated ego and in your arrogance, you have not respected the garland which was the dwelling of the Goddess of fortune. Sage Durvasa curses Lord Indra that his kingdom will also be ruined like he has thrown the garland onto the ground in his excessive pride since Lord Indra has not bowed in front of him.  Sage Durvasa walks away and Indra returns to his capital Amravati. The changes in Amravati starts to take place following Durvasa’s curse. The gods & people lose their vigour and energy, all the vegetable products and plants start dying, men stop doing charity, minds become corrupted, people start engaging in ultimate sensory pleasures and men and women started getting excited by objects. Everyone’s desires become uncontrollable.  With the Gods getting weak in Amravati, the demons invaded the Gods and defeated them. This is the reason the Gods and Demons reside in us and are representative of the good and evil within us.  Conclusion from the goddess's story or The crux behind origination: After being defeated, the Gods went to Lord Vishnu who suggested the churning of the ocean to restore the power back to the Gods by providing them with the Amrit that would make them immortal.  This is how the churning of the ocean began. The churning is symbolized by a literal tug of war between the Gods and Demons in the story. From this churning, Goddess Lakshmi rises out of the waves seated on a full-blown lotus. The Goddess Lakshmi chooses Vishnu as her Master and thus chooses the Gods over the demons. The Gods get their power back and fight the Asuras again and prevail over them.  The first lesson in this story is that Lakshmi, the Goddess of fortune forsakes even the Gods if they become arrogant. Lakshmi Goddess is not only about material wealth. When the Goddess of Fortune gets angry, it leads to an inability to perform good work, lack of energy, hunger, poverty, lack of mental peace, lack of willpower and a meaningless life. 


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यस्मिन् जीवति जीवन्ति बहव: स तु जीवति | काकोऽपि किं न कुरूते चञ्च्वा स्वोदरपूरणम् || If the 'living' of a person results in 'living' of many other persons, only then consider that person to have really 'lived'. Look even the crow fill it's own stomach by it's beak!! (There is nothing great in working for our own survival) I am not finding any proper adjective to describe how good this suBAshit is! The suBAshitkAr has hit at very basic question. What are all the humans doing ultimately? Working to feed themselves (and their family). So even a bird like crow does this! Infact there need not be any more explanation to tell what this suBAshit implies! Just the suBAshit is sufficient!! *जिसके जीने से कई लोग जीते हैं, वह जीया कहलाता है, अन्यथा क्या कौआ भी चोंच से अपना पेट नहीं भरता* ? *अर्थात- व्यक्ति का जीवन तभी सार्थक है जब उसके जीवन से अन्य लोगों को भी अपने जीवन का आधार मिल सके। अन्यथा तो कौवा भी भी अपना उदर पोषण करके जीवन पूर्ण कर ही लेता है।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।

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आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताआलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।राम।

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