रत्न पहनने पर भी लाभ क्यों नहीं?

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Deepika Maheshwari 04th Dec 2019

अपनी ग्रह बाधाओं को दूर करने और कार्यों में सफलता के लिए व्यक्ति रत्नों का धारण करता है पर आजकल जब व्यक्ति एक या दो रत्नों को धारण किए होते हैं फिर भी उन्हें दुखी देखा गया है वे अनेक कठिनाइयों से संघर्ष करते रहते हैं ऐसा क्यों? शायद आप सोचेंगे कि रत्न प्रभावशाली नहीं है या ज्योतिषी आदि ने गलत बताया है ऐसा नहीं है ऐसा तो इसलिए होता है कि या तो नकली रत्न धारण किए होते हैं या रत्न दोषपूर्ण होते हैं या विधिवत धारण किए हुए नहीं होते हैं यह ठीक है कि आप ज्योतिषियों के बताए अनुसार विधि पूर्वक शुभ दिन या मुहूर्त में रत्न धारण करते हैं परंतु किसी किसी की आदत होती है कि अपनी अंगुली से अंगूठी निकाल कर दूसरी उंगली में डाल लेना या काम करते वक्त उंगली से निकालकर मेज पर रख देना और फिर से उसे पहन लेना , इससे उसका प्रभाव समाप्त हो जाता है इसी प्रकार किसी को दिखाने के लिए अपनी अंगुली से बार-बार अंगूठी निकालना भी अनुचित है रत्न धारण करते समय कुछ सावधानियां रखी जाए तो निश्चित रूप से लाभ होगा • धारण किए जाने वाले रत्न के स्वामी ग्रह और लग्नेश की मित्रता हो द्वितीय और सप्तम भाव के स्वामी अपनी महादशा या अंतर्दशा में मारकेश के रूप में कार्य करते हैं यह भारी शरीर का कष्ट उत्पन्न कर सकते हैं इसलिए जहां तक संभव हो उनके रत्न धारण न करें बल्कि ग्रहों की पूजा और दान आदि से शांति करें • शत्रु ग्रहों के रत्न एक साथ धारण ना करें रत्न धारण करते समय संबंधित ग्रह के मंत्र का जप 108 बार धारण करना चाहिए और शुभ दिन को धारण करना चाहिए • सूर्य रत्न माणिक के रविवार को धारण करना चाहिए साथ में ॐ घृणि सूर्याय नमः मंत्र का जाप करना चाहिए माणिक के सोने में पहनना चाहिए ! • मोती चांदी में पहने ओम सोम सोमाय नमः का मंत्र जाप करके! • मूंगा सोने या तांबे में ओम अंग अंगारकाय नमः मंत्र के साथ मंगलवार को धारण करना चाहिए ! • पन्ना स्वर्ण में ॐ बु: बुधाय नमः मंत्र के साथ बुधवार को पहनना चाहिए • पुखराज स्वर्ण में बृहस्पतिवार को ओम ब्रिम बृहस्पतए नमः मंत्र के साथ पहने • हीरा स्वर्ण या चांदी या प्लैटिनम मैं ओम शुम शुक्राय नमः मंत्र जाप कर शुक्रवार को धारण करना चाहिए • नीलम लोहा या पंचधातु में शनिवार को ओम शं शनिश्चराय नमः मंत्र का जाप करते हुए धारण करें • राहु और केतु के मंत्रों का जाप करते हुए गोमेद और लहसुनिया को अष्ट धातु में जड़वा कर धारण किया जाता है लेकिन मेरा मानना है कि राहु और केतु पापी ग्रह है इनके रत्न धारण ना किए जाएं तो बेहतर रहता है राहु और केतु को शांत करने के लिए खुश करने के लिए सिर्फ और सिर्फ उसके दान पुणय, पूजा पाठ मंत्र जप करना ही सही रास्ता होता है • रत्ना हमेशा चढ़ते पक्ष यानी शुक्ल पक्ष में धारण करने चाहिए केवल शुक्र और शनि के रत्न कृष्ण पक्ष में पहने जा सकते हैं • रत्न जड़ित अंगूठी को धारण करने से पहले उसे शुद्ध करने के लिए कम से कम 24 घंटे तक कच्चे दूध या गंगा जल में डुबोकर रखें अंगूठी धारण करने का शुभ समय सूर्योदय से 1 घंटे तक होता है परंतु बुधवार को छोड़कर बाकी दिनों में में दोपहर में अभिजीत मुहूर्त में भी रत्न धारण करना शुभ माना गया है धूप दीप अगरबत्ती जलाकर उस ग्रह की उपासना करके पूर्व की ओर मुंह करके अंगूठी पहननी चाहिए नहा धोकर स्वच्छ और पवित्र हो के रत्न धारण करना चाहिए, बीमारी की स्थिति में रत्न नहीं धारण करना चाहिए! 🙏दीपिका माहेश्वरी🙏


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anshmaheshwari

nice article


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*वसंत नवरात्र 13 अप्रैल से 21 अप्रैल 2021 तक* चैत्र नवरात्रि घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 13 अप्रैल दिन मंगलवार प्रातः 5:30 से 10:15 तक। अभिजीत मुहूर्त 11:56 से दोपहर 12: 47 तक होगा। 13 अप्रैल से नव संवत्सर भारतीय नववर्ष की शुरुआत भी होगी। क्रमश: नवरात्र 13 अप्रैल प्रतिपदा ,शैलपुत्री। 14 अप्रैल द्वितीया, ब्रह्मचारिणी। 15 अप्रैल तृतीया, चंद्रघंटा। 16 अप्रैल चतुर्थी ,कुष्मांडा। 17 अप्रैल पंचमी, स्कंदमाता। 18 अप्रैल षष्ठी, कात्यायनी। 19 अप्रैल सप्तमी, कालरात्रि। 20 अप्रैल अष्टमी, महागौरी। 21 अप्रैल नवमी, सिद्धिदात्री मां का पूजन होता है। ज्योतिषाचार्य अजय शास्त्री के अनुसार दुर्गा सप्तशती नारायण अवतार श्री व्यास जी द्वारा रचित महापुराणों में मार्कंडेय पुराण से ली गई है। इसमें 700 श्लोक व 13 अध्यायों का समावेश होने के कारण इसे सप्तशती का नाम दिया गया है। तंत्र शास्त्रों में इसका सर्वाधिक महत्व प्रतिपादित है और तांत्रिक क्रियाओं का इसके पाठ में बहुत उपयोग होता है। दुर्गा सप्तशती में 360 शक्तियों का वर्णन है। ज्योतिषाचार्य ने बताया है कि शक्ति पूजन के साथ भैरव पूजन भी अनिवार्य है। दुर्गासप्तशती का हर मंत्र ब्रह्मवशिष्ठ विश्वामित्र ने शापित किया है। शापोद्धार के बिना पाठ का फल नहीं मिलता दुर्गा सप्तशती के 6 अंगों सहित पाठ करना चाहिए कवच, अर्गला, कीलक और तीनों रहस्य महाकाली महालक्ष्मी महासरस्वती का रहस्य बताया गया है। नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती की चरित्र का क्रमानुसार पाठ करने से शत्रु नाश और लक्ष्मी की प्राप्ति व सर्वदा विजय होती है।

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