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सप्तम भाव और राहु केतू

Astro Manish Tripathii 29th Jan 2019

*राहु केतु सातवे भाव में होने पर अपना प्रभाव विवाह, वैवाहिक जीवन और दैनिक व्यवसाय पर डालते है जिसका फल सातवे भाव में राहु केतु की स्थिति के अनुसार होता है।

* *राहु एक रहस्यमयी और समझ से परे छाया ग्रह है जो राहु को समझ लेता है वह इसके फल को भी समझ लेता है।केतु भी एक पाप छाया ग्रह है जो राहु का ही मूल हिस्सा है जो लगभग राहु के सामान ही सातवे भाव में फल देता है।

* *कुंडली का सातवा भाव शादी, शादी सुदा ज़िन्दगी और साझेदारी व्यापार, दैनिक व्यवसाय का होता है।यहाँ राहु सातवे भाव में किस ग्रह की राशि में है उस ग्रह की कुंडली में क्या स्थिति है के अनुसार प्रभाव देता है।सामान्य रूप से सातवे भाव में राहु या केतु या कोई भी पाप ग्रह शुभ नही होता।यहाँ बात राहु के सातवे भाव होने की कर रहे है।राहु वायु तत्व राशि मिथुन, तुला और कुम्भ में सबसे ज्यादा शुभ फल देता है।यदि इन तीन राशियों में राहु सातवे भाव में अकेला बैठता है और गुरु शुक्र बुध से देखा जाता है तब वैवाहिक जीवन के लिए शुभ परिणाम देता है हलाकि शादी होने में थोड़ी देर हो सकती है लेकिन सप्तमेश बली है तो राहु जल्द ही शादी करवा देता है।राहु सातवे भाव में किस ग्रह की राशि में है और उस ग्रह की कुंडली में क्या स्थिति है राहु उसके प्रभाव के अनुसार भी फल देगा बिना सप्तमेश की स्थिति के राहु पूर्ण फल अपने नह देगा।चाहे किसी भी भाव में राहु की यह स्थिति कुंडली में हो।। अब राहु सातवे भाव में होने पर शुभ कब नही होता इसकी बात करते है।राहु एक पाप ग्रह है जब यह सातवे भाव में किसी पाप क्रूर ग्रह या सप्तमेश के साथ बैठ जाता है तब सातवे भाव संबंधी अशुभ फल देगा।जैसे राहु के साथ सातवे भाव में शनि, मंगल बैठ जाने से यह वैवाहिक जीवन और व्यापार के सम्बन्ध में कोई शुभ फल न देकर उलटा वैवाहिक जीवन को ख़राब कर देगा।

* *सातवे भाव के राहु को शनि या मंगल का युति या दृष्टि सम्बन्ध का साथ मिल गया है मतलब राहु सातवे भाव में शनि मंगल के साथ हो या शनि मंगल लग्न में हो तब यह वैवाहिक जीवन को कष्टकारी बनाकर तलाक करवा देगा राहु के साथ सातवे भाव में मंगल शनि की स्थिति होने पर यदि शुभ ग्रह बली गुरु शुक्र शुभ बुध की दृष्टि सातवे भाव पर होने से तलाक तो नही होगा लेकिन वैवाहिक जीवन सुखद भी नही होगा और वैवाहिक जीवन कष्ट से ही बीतेगा क्योंकि शुभ ग्रहो की दृष्टि तलाक होने नही देगी और राहु के साथ शनि या मंगल या मंगल शनि शादी को ठीक चलने नही देंगे।राहु के साथ पाप ग्रहो का साथ सातवे भाव पर साझेदारी या दैनिक व्यापार में नुकसान देकर बंद करा देगा।* *राहु के साथ शनि होने से यह जीवनसाथी के साथ बहुत सारे वैचारिक मतभेद की स्थिति पैदा करके जीवनसाथी से अलग करा देगा और मंगल के साथ राहु सातवे भाव में होने से लड़ाई झगड़ो के द्वारा जीवनसाथी से अलग कर देगा यदि सातवे भाव में शनि और राहु होते है तब जीवनसाथी का स्वभाव बहुत ही अजीव और समझ से परे होगा व्यक्ति का जीवनसाथी एक पल में कुछ तो दूसरे पल कुछ ओर होगा अपने स्वभाव और व्यवहार से।।

 

* *राहु सातवे भाव में कोई अशुभ योग बनाता है जैसे सूर्य ग्रहण योग, चन्द्र ग्रहण योग, मंगल के साथ अंगारक योग, गुरु चांडाल योग, शुक्र के साथ स्त्री ऋण दोष आदि यदि इनमे से कोई दो योग भी राहु के साथ सातवे भाव में है तब भी यह वैवाहिक जीवन और सुख का नाश करेगा।।

* *राहु सातवे भाव में सिर्फ अकेला बैठने पर ही शुभ होता है इसमें भी यह अपनी नीच राशि धनु में न हो और शुभ ग्रहो से द्रष्ट हो यदि शुभ ग्रह से भी न देखा जा रहा हो तो सातवे भाव का स्वामी बली होकर केंद्र त्रिकोण में शुभ ग्रह से द्रष्ट या युक्त होने से यह वैवाहिक जीवन के लिए शुभ परिणाम देगा पर हाँ जीवनसाथी से अपनी दशा अन्तर्दशा में वैचारिक मतभेद रखता है या पति पत्नी एक दूसरे के विचारो और बात को कम मानते है या कुछ देर से मानते है।राहु सातवे भाव में शुभ है तो वैवाहिक जीवन के लिए शुभ रहेगा और अशुभ योग में है तब वैवाहिक जीवन को बिगाड़ कर देगा।सातवे भाव में राहु हो तब सप्तमेश कभी भी राहु या केतु के साथ नही होना चाहिए वरना यह स्थिति वैवाहिक जीवन को ख़राब करती है क्योंकि ऐसी स्थिति में सातवा भाव भावेश दोनों राहु केतु की पकड़ में जा जायेंगे जो ठीक नही।यदि सप्तमेश राहु केतु की पकड़ में न है और न किसी पाप ग्रह की पकड़ में है तब स्थिति सामान्य रहती है।

।* *केतु भी सातवे भाव में यदि अशुभ योग, अशुभ स्थिति में है, राहु की तरह किसी पाप ग्रह के साथ है तो वैवाहिक जीवन के सम्बन्ध में अशुभ होगा यदि सातवे भाव में राहु की तरह यह शुभ ग्रहो से देखा जा रहा है बली है अपनी उच्च राशि धनु में है या अग्नि तत्व राशियो मेष सिंह धनु में है तो शुभ फल देगा।यह सातवे भाव में होने पर राहु की तरह ही फल देता है लेकिन राहु की तरह जीवनसाथी का स्वभाव नही देता स्वभाव से जीवनसाथी गंभीर होगा, अध्यात्म की ओर जीवनसाथी का रुझान रह सकता है बाकि स्थिति में यह भी राहु की तरह सातवे भाव में होने पर फल देगा।*


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