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ज्योतिष के आधार पर विद्या अध्ययन हेतु विषय के चयन की संभावनाऐं
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Ravindra Kumar Wadhwa
27th Aug 2020
ज्योतिषीय आधार पर विध्या अध्ययन एवं आजीविकोपार्जन के लियें साइंस बाईलोजी एवं साइंस मैथस विषय को लेकर मैने अपने विचार आप लोगों से साझा अपने पूर्व के आलेखों में साझा कियें थें । पौराणिक ग्रन्थों एवं मेरे अनुभव में मैने पाया है कि जिस जातक का सूर्य-मंगल प्रबल हो ऐसे जातकों को या तो साइंस बायोलाॅजी से अपना अध्ययन करना चहियें अथवा शिक्षा के नैसर्गिक कारक ग्रहों बृहस्पति एवं बुध की स्थिति जातक की कुंड़ली में अच्छी न हो किन्तु सूर्य मंगल जातक के नवम,दशम एवं एकादश भाव पर प्रभाव ड़ाल रहे हो तो तो ऐसे जातकों को चिकित्सीसा,विद्युत एवं अग्नि तत्व संबधी व्यवसायों को अपना आजीविकोपार्जन का माध्यम बनाना चाहियें । इसी प्रकार मैने अपने पूर्व के आलेख में स्पष्ट किया है कि शिक्षा कारक नैसर्गिक कारक ग्रह बृहस्पति एवं बुध किसी जातक की कुण्ड़ली में बलवान हो एवं शनि भी योगकारक ग्रह होकर पंचम,दशम एवं एकादश भाव पर प्रभाव ड़ाल रहा हो तो ऐसे जातकों को उच्च तकनीकी शिक्षा के अध्ययन की ओर अग्रसर होना चाहियें एवं यदि षिक्षा के नैसर्गिक कारक ग्रहों बृहस्पति एवं बुध की कुण्ड़ली में स्थिति अच्छी न हो किन्तु शनि योगकारक ग्रह होकर कुण्ड़ली के नवम एवं दशम अथवा एकादश भाव पर प्रभाव ड़ाल रहा है तो जातक को शनि से संबधित व्यावसायों यथा मशीनरी,निर्माणकार्य,कलकारखानें,माईन्स, पत्थर,बिल्ड़िगमेटेरियल,मोटरपार्टस,गैस,पैट्रोलियम,टायर, रबर,प्लास्टिक,कृषि आदि कार्याे में अपना माग्य अजमाना चाहियें ।
आज में ज्योतिशीय आधार पर वाणिज्य(काॅमर्स) सब्जेक्ट की चर्चा करूगाॅ ।जिस जातक की कुण्ड़ली में उच्च शिक्षा अध्ययन हेतु, शिक्षा के दोनों नैसगिक कारक ग्रहों बृहस्पति एवं बुध को बलशाली हो, साथ ही कुण्ड़ली का पंचम एवं नवम् भाव एवं पंचमेश एवं नवमेश को भी अच्छी स्थिति में हो तो जातक अच्छी शिक्षा प्राप्त करता है । किसी जातक की कुण्ड़ली में बुध योगकारक ग्रह होकर उच्च का या मित्र राशि का हो हो एवं अंशों एवं षड़बल के आधार भी बलशाली को जातक की कुण्ड़ली के चतुर्थ,पंचम,दशम एवं एकादश भाव पर प्रभाव ड़ाल रहा हो तो जातक वाणिज्य(काॅमर्स) सब्जेक्ट में अच्छें परिणाम प्राप्त करता है । बुध प्रबन्धन का कारक है । बुध ही संचार माध्यमों को नियंत्रित करता है । बुध से वाणी कोेैशल को भी देखा जाता है ।बुध प्रधान जातकों को कामर्स सब्जेक्ट लेना चाहियें ऐसे जातक चार्टड एकाउन्टेन्ट,एम0बी0ए0 एवं अन्य प्रबन्धकीय उपाधियाॅ प्राप्त करतें है । जन्म कुंड़ली में बुध के साथ यदि गुरू भी दशम अथवा एकादश भाव पर प्रभाव ड़ाल रहा हो तो जातक चार्टड एकाउन्टेन्ट आदि उपाधियाॅ प्राप्त कर परामर्श (कन्सलटेंसी ) आदि के व्यावसाय से जुड़तें है यदि बुध के साथ शनि का प्रभाव जातक की कुण्ड़ली के दशम अथवा एकादश भाव में हो तो जातक एमबीए, सीए आदि क उपाधि प्राप्त कर किसी निजी कंपनी में उच्च पदासीन होता है इसी प्रकार यदि बुध का साथ दशम अथवा एकादश भाव पर सूर्य का भी प्रभाव हो तो जातक राजकीय सेवा में अथवा राष्ट्रीयकृत बैंकों में लेखाकार आदि पदों पर पदस्थापित होता है । जातक की कुण्ड़ली में गुरू नीच राषि में हो अथवा वक्री हो एवं बुध संषक्त हों एवं नवम,दशम एकादश भाव पर प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष प्रभाव ड़ाल रहा हो तो जातक को उच्च षिक्षा प्राप्त करने में बाधा आती है किन्तु बलषाली बुध के दशम अथवा एकादश भाव पर प्रभाव के कारण जातक बुध संबधी कार्याे यथा कमीशन एजेन्ट,ब्याज,किराया आदि से आय प्राप्त करता है साथ ही ऐसे जातक अपने व्यवसाय में भी काफी उन्नति करतें है बशर्ते कि ऐसे लोग बुध के कारकत्व वालें अथवा दशम भाव पर प्रभाव ड़ालने वाले किसी अन्य ग्रह के कारकत्व से संबधित वस्तुओं का व्यवसाय करें ।
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