व्यवसाय और आजीविका विचार

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Pandit dilip 05th Mar 2017

दशम भाव राजकीय व्यवसाय और सप्तम् भाव हमारी रोज की  आमदन का है, एकादष भाव आय का द्वितीय भाव कोष का है। पैसा कैसे आएगा क्या व्यवसाय होगा इसका सही निर्धारण होना जरुरी है। विद्या जिशके द्वारा करियर का निर्धारण हो यदि उसका सही निर्धारण किया जाये तो सब कुछ जिंदगी में सही हो सकता है। सही विषय का चुनाव हमे सही दिशा दिखा सकता है। कैरियर को बनाने में ग्रहो की मुख्य भूमिका होती है। यदि जीवन में डॉक्टर बनने का योग है और हम इंजिनियर की पढाई करते है तो न तो डॉक्टर बनते है न इंजिनियर, इश्लिये ये चुनाव अवश्य हो जाता है। 

आएये देखते है कि कोन से ग्रह से क्या अजीविका मिलती  है

कॅरिअर निर्धारण में सबसे प्रमुख है सही विषय का चुनाव! बच्चे की जिस विषय में (विज्ञानं कला और वाणिज्य)  सबसे ज्यादा रूचि होगी, उसी में वह अपनी प्रतिभा का सही प्रदर्शन कर सकेगा और उसका भविष्य भी उज्ज्वल होगा। दूसरा तरीका है किसी विशेषज्ञ की सलाह लें। यदि आप चाहें, तो ज्योतिष की सहायता से भी करियर निर्धारण में सहायता ले सकते हैं।करियर निर्धारण में जन्म कुंडली से दशम भाव एवं दशमेश, दशमेश की नवांश राशि का स्वामी ग्रह और कुंडली में बनने वाले अन्य योगों से करियर निर्धारण में मदद मिलती है। 

  1. इंजीनियर बनने के योग ज्योतिषशास्त्र में सूर्य, मंगल, शनि व राहु-केतु को पाप ग्रह माना है, किंतु पंचम भाव या पंचमेश से संबंध करने पर ये ग्रह जातक की तकनीकी क्षमता बढ़ा देते हैं। दशम भाव या दशमेश से मंगल, शनि, राहु-केतु का संबंध होने पर जातक को तकनीकी क्षेत्र में आजीविका मिलती है। अर्थात वह इंजीनियरिंग के क्षेत्र में सफल होता है।दशमं भाव का सम्बंध हमारे रोजगार से होता है।
  2. डॉक्टर बनने के योग सूर्य स्वास्थ्य का कारक माना गया है। मंगल भुजबल, उत्साह व कार्य शक्ति का कारक है। गुरू ज्ञान और सुख का। इसलिए सूर्य, मंगल व गुरू यदि जन्म कुंडली में बली हों, तो व्यक्ति कुशल चिकित्सक बनता है।
  3. वकील या न्यायाधीश बनने के योग नवम भाव द्वारा धर्म, नीति-नियम व न्याय प्रियता का तथा षष्ठ भाव से कोर्ट कचहरी संबंधी विवादों का विचार किया जाता है। दशमेश का नवम या षष्ठ भाव से संबंध होने पर व्यक्ति वकील बनता है। दंड व सुख का कारक शनि, यदि दशम भाव में उच्चस्थ हो अथवा गुरू उच्चस्थ या स्वक्षेत्री होकर, दशम भाव या दशमेश से दृष्टि-युति संबंध करें, तो जातक वकील या जज बनता है।
  4. उद्योगपति व व्यवसायी बनने के योग सूर्य, चंद्र व मंगल इस वर्ग के महत्वपूर्ण ग्रह है। व्यापार का कारक बुध को माना गया है। कुंडली में प्रबल धन योग, जातक को कुशल व्यवसायी या उद्योगपति के रू प में प्रतिष्ठित कर उसे धनी बनाता है।
  5. सेना या पुलिस अधिकारी बनने के योगमंगल को बल, पराक्रम व साहस का प्रतीक माना है। कुंडली में मंगल बली होने पर जातक को सेना या पुलिस में करियर प्राप्त कराता है। दशमेश या दशमेश का नियंत्रक मंगल जातक को सेना या पुलिस में आजीविका दिलाता है और उसका करियर सफल रहता है।

 

  1. सीए  या लेखाकार  का संबंध व्यापारिक खातों से तथा गुरू का संबंध उच्च शिक्षा, परामर्श एवं मंत्रणा से है। बुध व गुरू का बली होकर दशम भाव से संबंध करना जातक को लेखाकर बनाता है। द्वितीय भाव का संबंध वित्त व वित्तीय प्रबंध से है। बुध का संबंध द्वितीय, पंचम अथवा दशम भाव से हो तो चार्टर्ड एकाउंटेंट(सी ए)बनाता है।
  2. बैंक अधिकारीकुंडली में यदि बुध, गुरू व द्वितीयेश का दृष्टि-युति संबंध दशम भाव या दशमेश से हो, तो जातक बैंक अधिकारी, वित्त प्रबंधक या लेखाकार बनता है। गुरू मंत्रणा का नैसर्गिक कारक ग्रह यदि दशम भाव, पंचम भाव, बुध या द्वितीय भाव से संबंध करे, तब भी जातक लेखाकार बनकर धन व मान-प्रतिष्ठा पाता है। और एक उच्च प्रतिष्ठित संसथान में कार्यरत होकर धन और मान दोनों प्राप्त करता है।
  3. लेक्चरार(प्राध्यापक) या प्रोफेसर बनने के योग पंचमेश व चतुर्थेश का राशि परिवर्तन, दशमेश शुक्र का लाभस्थ होकर पंचम भाव को देखना तथा पंचमेश गुरू की दशम भाव पर दृष्टि, शिक्षा के क्षेत्र से आजीविका का योग बनाती है। दशमेश का संबंध बुध व गुरू से होने पर जातक लेक्चरार बनता है।पूर्ण जानकारी के लिए किसी विशेषज्ञ की सलाह लें। 
  4. शुक्र का सम्बंढ़ यदि दशम भाव से हो तो जातक को रसायन शास्त्र से है जातक एक असह वैज्ञानिक भी बन सकता है 
  5. पांचवे घर से बुध गुरु और शुक्र का सम्बन्ध ज्योतिष् की तरफ और जातक को नवम और द्वादश से केतु का सम्बन्ध आध्यत्म की और  और नवम और  दशम से गुरु का सम्बन्ध जातक को ज्योतिष् ओर आध्यत्म दोनों और अग्रसर करता है। 


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Rakesh Periwal

Nice


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आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताआलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।राम।

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