श्री कृष्ण की 64 कलाएं

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Ravinder Pareek 27th Aug 2020

श्री कृष्ण की 64 कला जब भगवान श्री कृष्ण शिक्षा ग्रहण कर अपने गुरु सांदीपनि जी के आश्रम में अवन्तिपुर गये थे | जब भगवान् कृष्ण वहा 64 दिन रुके थे | और अपने गुरु से उन्होंने प्रतिदिन एक विद्या प्राप्त की थी उस तरह 64 दिन तक 64 विद्याये प्राप्त की थी | इसे ही 64 कला के नाम से जाना जाता है | 64 कला | श्री कृष्ण की 64 कलाये | 64 Kala | श्री कृष्ण की 64

कला
१ - नृत्य |
२ - वाद्य |
३ - गायनविद्या |
४ - नाट्य |
५ - इंद्रजाल |
६ - नाटक |
७ - सुगन्धित वास्तु बनाना |
८ - पुष्प श्रृंगार
९ - वैताल आदि वशीकरण |
१० - बच्चो के खेल |
११ - विजय विद्या |
१२ - मंत्र विद्या |
१३ - शकुन-अपशकुन |
१४ - रत्नो को आकार देना |
१५ - मातृका यंत्र |
१६ - सांकेतिक भाषा बनाना |
१७ - पानी को बांधना |
१८ - बेल बूते बनाना |
१९ - धान्य और पुष्पों से सजावट करना |
२० - फूलो की सेज बनाना |
२१ - तोता-मैना की भाषा बोलना |
२२ - वृक्ष चिकित्सा |
२३ - भेड्। -बकरो-मुर्गो को लड़ाना |
२४ - उच्चाटन विद्या |
२५ - घर बनाना |
२६ - गलीचा बनाना |
२७ - बाण-आसन आदि बनाना |
२८ - पकवान बनाना |
२९ - इच्छाधारी वेश बनाना |
३० - पेय पदार्थ बनाना ( पिने के पदार्थ ) |
३१ - क्रीड़ा करना |
३२ - छंद ज्ञान |
३३ - वस्त्रो की छिपाने बदलने की विद्या |
३४ - व्यक्ति या वास्तु का आकर्षण |
३५ - कपडे या गहने बनाना |
३६ - माला बनाना |
३७ - शत्रु को कमज़ोर बनाने की विद्या |
३८ - चोटी के बालो को सजाना ( फूलो से ) |
३९ - कटपुतली बनाना |
४० - मुर्तिया-प्रतिमा आदि बनाना |
४१ - पेहलिया बुझाना |
४२ - सिलाई काम करना |
४३ - बालो की सफाई रखना |
४४ - मन की बात बता देना |
४५ - कई भाषाओ का ज्ञान रखना |
४६ - काव्य ज्ञान-म्लेच्छ सांकेतिक भाषा का ज्ञान रखना |
४७ - सोने-चांदी रत्नो को पहचानना |
४८ - स्वयं सोना चांदी बनाना |
४९ - मणियों के रंगो को पहचानना |
५० - खानो की पहचानना |
५१ - चित्रकृति बनाना बनाना |
५२ - दांत-वस्त्र अंगो को रंगना |
५३ - शय्या रचना |
५४ -घर के फर्श को हीरे-मोती से सजाना |
५५ - कूटनीति |
५६ - ग्रंथो को पढ़ने की चतुराई |
५७ - नई बाते निकालना |
५८ - समस्यापूर्ति करना |
५९ - समस्त कोशो का ज्ञान |
६० - मन में कटक रखना |
६१ - छल से काम निकालना |
६१ - शंख या हाथी दांतो से गहने बनाना |
६२ - चित्रकारी |
६३ - पट्टी-बेंत-चटाई आदि बनाना |
६४ - विद्या प्रदान करना या ग्रंथो को पढ़ाने की चतुराई करना ||

|| द्वारा रविन्द्र पारीक || 💐


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Comments

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Chander Mukhi

Good sir ji


Suman Sharma

कला


Suman Sharma

👌👍👍


Suman Sharma

🙏🙏


Suman Sharma

very nice article by Astro Ravi ji


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