घर मे लगाएं तुलसी का पौधा, दूर होंगे सभी वास्तु दोष

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Deepika Maheshwari 23rd Sep 2019

💐हिन्दु धर्म में तुलसी का बहुत ही प्रमुख स्थान है । #शास्त्रों के अनुसार तुलसी को बहुत ही पूजनीय और पवित्र माना गया है। तुलसी भगवान #विष्णु को विशेष प्रिय है इसलिए मान्यता है कि जिस घर में तुलसी को स्थापित करके उसकी सेवा, पूजा #अर्चना की जाती है उस घर में माँ लक्ष्मी की सदैव कृपा बनी रहती है। 💐शायद इसी लिए आमतौर पर यह सभी हिंदू परिवारों के घरों में अवश्य ही होती है। मान्यताओं के अनुसार इसे तुलसी व वृंदा के नाम से माँ लक्ष्मी का ही रूप बताया गया है। इसीलिए भगवान शालिग्राम-तुलसी विवाह की पूजा असीम सुख-समृद्ध प्रदान करने वाली कही गई है। तुलसी घर में होने से उस घर में दैवीय कृपा के साथ साथ घर के सदस्यों को अनेकों चिकित्सकीय लाभ भी प्राप्त होते हैं। म तुलसी के बारे में कुछ आसान सी बातों को ध्यान में रखे तो हमें निश्चित ही माँ लक्ष्मी की कृपा के साथ साथ मनवाँछित फलों की प्राप्ति होती है।यहां हम आपको कुछ ऐसी ही उपायों के बारे में बता रहे है जो आप को निरोगी रखने के साथ साथ मालामाल भी बना सकते है जो आप को निरोगी रखने के साथ साथ मालामाल भी बना सकते ह ै 💐हिन्दू शास्त्रों के अनुसार वैसे तो तुलसी पौधा लगाने के लिए आषाढ़ व ज्येष्ठ माह का विशेष महत्व है, किंतु यह किसी भी पवित्र तिथि, शुक्ल पक्ष, एवं पूर्णिमा व एकादशी तिथि आदि को भी लगाया जा सकता है । इसको लगाने के लिए सुबह के समय किसी भी देव मंदिर या जिस घर मे नित्य तुलसी की पूजा होती हो, वहीँ से तुलसी का छोटा-सा पौधा लाना उचित रहता है। इसे बाजार से भी खरीद कर लगाया जा सकता है। 💐पवित्र तुलसी की स्थापना ठीक उसी तरह से करनी चाहिए जैसे हम किसी देवी देवता की मूर्ति की स्थापना करते है । तुलसी के पौधे को घर में जिस जगह लगाना हो उस जगह को पहले गंगाजल से पवित्र करें फिर साफ मिट्टी से भरे गमले में रोपें । लगाने के बाद तुलसी के पौधे को जल, इत्र, फूल, फल, दूर्वा अर्पित करते हुए वस्त्र, चुनरी वा पीला कलावा अर्पित करें एवं मिठाई से भोग लगाएं। उसके पश्चात किसी सुहागिन स्त्री से ही तुलसी के चारों ओर दूध व जल की धारा अर्पित करके उन्हें प्रणाम करें। इस विधि से स्थापना करने से उस घर में माँ तुलसी की असीम कृपा प्राप्त होती है । 💐तुलसी को घर के मुख्य दवार के दोनों ओर ऊँचाई पर लगाना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि तुलसी के पौधे को इस स्थान में लगाने से घर वालों को बुरी नजर नहीं लगती है और अन्य किसी भी तरह की बुराइयां भी घर से कोसो दूर रहती है, तुलसी को घर के आँगन में भी लगाया जा सकता है । यह ध्यान रहे की तुलसी का पौधा अथवा गमला नीचे ना हो उसके लिए पर्याप्त ऊँचाई वाला स्थान ही उचित है । 💐तुलसी के पौधे के आस पास कुछ भी गन्दगी नहीं रहनी चाहिए, इसके चारो ओर रोज़ उसी तरह से सफाई कराएं जिस तरह आप अपने घर की करते है । 💐रविवार को छोड़कर नित्य सुबह तुलसी में जल चढ़ाना चाहिए । इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा रहती है एवं घर के सदस्यों में प्रेम बना रहता है । 💐तुलसी के पत्ते बिना उपयोग कभी भी नहीं तोडने चाहिए। ऐसा करने पर व्यक्ति पाप भागी होता है । तुलसी को बिना नहाये, संध्या के समय और रविवार, एकादशी, सूर्य एवं चन्द्र ग्रहण , अमावस्या , संक्रांति और रात्रि के समय बिलकुल भी नहीं तोडना चाहिए। रजस्वला स्त्री को भी तुलसी को छूना नहीं चाहिए । 💐जिस घर में प्रत्येक गुरुवार को सुबह तुलसी को दूध से सींचा जाता है उस घर से माता लक्ष्मी कभी भी नहीं जाती है । 💐जिस घर में संध्या के समय तुलसी पर दीपक जलाया जाता है उस घर में कभी भी कोई भी संकट, किसी भी चीज़ का आभाव नहीं रहता है । 💐जिस घर में प्रभु विष्णु को नित्य तुलसी चढ़ाई जाती है, प्रत्येक एकादशी और गुरुवार को उनकी तुलसी दल से विशेष पूजा की जाती है उस घर में कभी भी धन धान्य की कमी नहीं रहती है। एक गमले में एक पौधा तुलसी का तथा एक पौधा काले धतूरे का लगायें। इन दोनों पौधों पर प्रतिदिन स्नान आदि से निवृत होकर शुद्ध जल में थोड़ा सा कच्चा दूध मिलाकर अर्पित करें। ऐसा करने से व्यक्ति को ब्रहमा, विष्णु, महेश, इन तीनों की संयुक्त पूजा फल मिलता है। क्योंकि तुलसी विष्णु प्रिया है, काला धतूरा शिव रूप है एंव तुलसी की जड़ो में भगवान ब्रहमा का निवास स्थान माना गया है। 💐तुलसी के पत्ते बहुत ही पवित्र माने जाते है । यह हमारे जल एवं भोजन को शुद्ध और पवित्र करते हैं। इसीलिए किसी भी सूर्य या चंद्र ग्रहण के समयजल एवं भोजन में तुलसी के पत्ते डालें जाते हैं। 💐हमारे धर्म शास्त्रों के अनुसार इंसान की मृत्यु के बाद उस शव के मुख में तुलसी के पत्ते डाले जाते हैं। मान्यता है कि इससे मृतक को मोक्ष की प्राप्ति होती है। 💐अगर आपको लगता है कि लाख प्रयास के बाद भी आपका व्यापार उन्नति नहीं कर पा रहा है तो आप किसीभी गुरुवार को श्यामा तुलसी के चारो ओर उग आई खर पतवार को किसी पीले वस्त्र में बांधकर अपने व्यापार स्थल में किसी साफ जगह रख दें, व्यापार में गति आ जाएगी । 💐किसी भी शुभ मुहूर्त में तुलसी की जड़ लाएं । रविवार या गुरुवार को जब पुष्य नक्षत्र हो तो उस दिन उस जड़ को गंगा जल से धोकर, धूप दीप दिखाकर, तिलक लगाकर पूजा करके पीले कपड़े में लपेटकर अपने दाहिने हाथ में बांध लें इस आसान उपाय से व्यक्ति का तेज बढ़ता है, कार्यों में सफलता की सम्भावना बढ़ जाती है, अधिकारी वर्ग प्रसन्न रहता है। 💐अगर किसी व्यक्ति की संतान बहुत ज्यादा जिद्दी हो, बड़ो का कहना ना मानती हो तो उसे घर के पूर्व दिशा में रखे तुलसी के पौधे के तीन पत्ते रविवार को छोड़कर प्रतिदिन किसी भी तरह अवश्य ही खिलाएं, सन्तान का व्यवहार सुधरने लगेगा । ऐसी भी मान्यता है कि यदि पूर्व दिशा में खिड़की के पास तुलसी का पौधा रखा जाए तो भी संतान आज्ञाकारी होती है। 💐यह भी माना जाता है कि यदि आपकी कन्या का विवाह नहीं हो रहा हो तो कन्या तुलसी के पौधे को घर के दक्षिण-पूर्व में रखकर उसे नियमित रूप से जल अर्पण करें। इससे भी शीघ्र ही योग्य वर की प्राप्ति होती है । 💐तुलसी का पौधा किचन के पास रखने से घर के सदस्यों में आपसी प्रेम, सामंजस्य बना रहता है। #नवीन गृह में तुलसी का पौधा, देवता का चित्र, गौमूत्र, गंगाजल, और पानी का कलश लेकर घर के अंदर प्रवेश करना चाहिए । इससे घर में सदैव सुख शांति, प्रसन्नता का वातावरण बना रहता है, घर में धन की कभी भी कमी नहीं रहती है। #घर से निकलने से पूर्व तुलसी के दर्शन करना बहुत ही शुभ एवं सफलता की निशानी माना जाता है। #प्रतिदिन दही के साथ चीनी और तुलसी के पत्तों का सेवन करना बहुत ही शुभ माना गया है। तुलसी के पत्तों का घर से निकलते समय सेवन करने से कार्यों में कोई भी संकट नहीं आते है । #हिन्दु धर्मशास्त्रों में तुलसी के आठ नाम बताए गए हैं- वृंदा, वृंदावनि, विश्व पूजिता, विश्व पावनी, पुष्पसारा, नन्दिनी, तुलसी और कृष्ण जीवनी। सुबह तुलसी में जल चढ़ाते समय इनका नित्य नाम लेने जातक को जीवन में कोई भी संकट कोई आभाव नहीं रहता है । उसे सभी तरह के भौतिक सुख सुविधाओं की प्राप्ति होती है । 💐तुलसी का पत्तों के नित्य सेवन करना बहुत ही पुण्यदायक लाभदायक माना जाता है। लेकिन ध्यान रहे कि उसे दाँतों के बीच चबाना नहीं चाहिए।


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Post

very nice


very useful


anshmaheshwari

nice article


RahulRathi

good


rpareek

बहुत ही अच्छा बताया आपने


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*वसंत नवरात्र 13 अप्रैल से 21 अप्रैल 2021 तक* चैत्र नवरात्रि घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 13 अप्रैल दिन मंगलवार प्रातः 5:30 से 10:15 तक। अभिजीत मुहूर्त 11:56 से दोपहर 12: 47 तक होगा। 13 अप्रैल से नव संवत्सर भारतीय नववर्ष की शुरुआत भी होगी। क्रमश: नवरात्र 13 अप्रैल प्रतिपदा ,शैलपुत्री। 14 अप्रैल द्वितीया, ब्रह्मचारिणी। 15 अप्रैल तृतीया, चंद्रघंटा। 16 अप्रैल चतुर्थी ,कुष्मांडा। 17 अप्रैल पंचमी, स्कंदमाता। 18 अप्रैल षष्ठी, कात्यायनी। 19 अप्रैल सप्तमी, कालरात्रि। 20 अप्रैल अष्टमी, महागौरी। 21 अप्रैल नवमी, सिद्धिदात्री मां का पूजन होता है। ज्योतिषाचार्य अजय शास्त्री के अनुसार दुर्गा सप्तशती नारायण अवतार श्री व्यास जी द्वारा रचित महापुराणों में मार्कंडेय पुराण से ली गई है। इसमें 700 श्लोक व 13 अध्यायों का समावेश होने के कारण इसे सप्तशती का नाम दिया गया है। तंत्र शास्त्रों में इसका सर्वाधिक महत्व प्रतिपादित है और तांत्रिक क्रियाओं का इसके पाठ में बहुत उपयोग होता है। दुर्गा सप्तशती में 360 शक्तियों का वर्णन है। ज्योतिषाचार्य ने बताया है कि शक्ति पूजन के साथ भैरव पूजन भी अनिवार्य है। दुर्गासप्तशती का हर मंत्र ब्रह्मवशिष्ठ विश्वामित्र ने शापित किया है। शापोद्धार के बिना पाठ का फल नहीं मिलता दुर्गा सप्तशती के 6 अंगों सहित पाठ करना चाहिए कवच, अर्गला, कीलक और तीनों रहस्य महाकाली महालक्ष्मी महासरस्वती का रहस्य बताया गया है। नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती की चरित्र का क्रमानुसार पाठ करने से शत्रु नाश और लक्ष्मी की प्राप्ति व सर्वदा विजय होती है।

यस्मिन् जीवति जीवन्ति बहव: स तु जीवति | काकोऽपि किं न कुरूते चञ्च्वा स्वोदरपूरणम् || If the 'living' of a person results in 'living' of many other persons, only then consider that person to have really 'lived'. Look even the crow fill it's own stomach by it's beak!! (There is nothing great in working for our own survival) I am not finding any proper adjective to describe how good this suBAshit is! The suBAshitkAr has hit at very basic question. What are all the humans doing ultimately? Working to feed themselves (and their family). So even a bird like crow does this! Infact there need not be any more explanation to tell what this suBAshit implies! Just the suBAshit is sufficient!! *जिसके जीने से कई लोग जीते हैं, वह जीया कहलाता है, अन्यथा क्या कौआ भी चोंच से अपना पेट नहीं भरता* ? *अर्थात- व्यक्ति का जीवन तभी सार्थक है जब उसके जीवन से अन्य लोगों को भी अपने जीवन का आधार मिल सके। अन्यथा तो कौवा भी भी अपना उदर पोषण करके जीवन पूर्ण कर ही लेता है।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।

न भारतीयो नववत्सरोSयं तथापि सर्वस्य शिवप्रद: स्यात् । यतो धरित्री निखिलैव माता तत: कुटुम्बायितमेव विश्वम् ।। *यद्यपि यह नव वर्ष भारतीय नहीं है। तथापि सबके लिए कल्याणप्रद हो ; क्योंकि सम्पूर्ण धरा माता ही है।*- ”माता भूमि: पुत्रोSहं पृथिव्या:” *अत एव पृथ्वी के पुत्र होने के कारण समग्र विश्व ही कुटुम्बस्वरूप है।* पाश्चातनववर्षस्यहार्दिकाःशुभाशयाः समेषां कृते ।। ------------------------------------- स्वत्यस्तु ते कुशल्मस्तु चिरयुरस्तु॥ विद्या विवेक कृति कौशल सिद्धिरस्तु ॥ ऐश्वर्यमस्तु बलमस्तु राष्ट्रभक्ति सदास्तु॥ वन्शः सदैव भवता हि सुदिप्तोस्तु ॥ *आप सभी सदैव आनंद और, कुशल से रहे तथा दीर्घ आयु प्राप्त करें*... *विद्या, विवेक तथा कार्यकुशलता में सिद्धि प्राप्त करें,* ऐश्वर्य व बल को प्राप्त करें तथा राष्ट्र भक्ति भी सदा बनी रहे, आपका वंश सदैव तेजस्वी बना रहे.. *अंग्रेजी नव् वर्ष आगमन की पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं* ज्योतिषाचार्य बृजेश कुमार शास्त्री

आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताआलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।राम।

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