शनि का प्रभाव 2019 मै किन राशि मै साढ़े साती, ढय्या, तथा उपाय

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Acharya Anurag Gaur 27th Jul 2019

शनि की साढ़े साती 2019: करें ये विशेष उपाय, लौट आएंगे अच्छे दिन शनि न्याय के देवता है। माना जाता है कि हर राशि पर शनि का प्रभाव लगभग साढ़े सात साल तक रहता है। 2019 में वृश्चिक, मकर और धनु राशि पर शनि का प्रभाव रहेगा। मतलब ये तीन राशियां महत्वपूर्ण रूप से शनि की साढ़े साती से ग्रसित रहेगी। इसके अलावा कुछ और राशियों पर भी शनि का प्रभाव रहता है। लोगों में शनि को लेकर अनेक मान्यताएं हैं। कर्इ लोगों का मानना है कि जातक के जीवन में मुश्किलें और विघ्नों को लाने का काम शनि करता है। लेकिन, यह मान्यता गलत है। शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। शनि के शुभ होने पर वह जातकों को शुभ फल दिलाने के अलावा मोक्ष के मार्ग पर भी अग्रसर करता है। शनि के इन उपायों को करने से मिलेगी शांति – शनि मंत्र का नियमित रूप से जप करें। ये मंत्र हैं- (1) ॐ शं शनैश्चराय नमः (2) नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम। छाया मार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।। – संपूर्ण आस्था और श्रद्धा के साथ शनि चालीसा का पाठ करें। – हर शनिवार को शनिदेव के मंदिर में जाकर तेल चढ़ाएं। – हर शनिवार को उड़द की जलेबी या कचौड़ी बनाकर अपंग व दरिद्र व्यक्ति को खिलाने से शनिदेव की कृपा मिलती है। – लोहे की अंगूठी को मध्यमा उंगली में धारण करें। -लोगों में शनि को लेकर अनेक मान्यताएं हैं। कर्इ लोगों का मानना है कि जातक के जीवन में मुश्किलें और विघ्नों को लाने का काम शनि करता है। लेकिन, यह मान्यता सरासर गलत है। शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। शनि के शुभ होने पर वह जातकों को शुभ फल दिलाने के अलावा मोक्ष के मार्ग पर भी अग्रसर करता है। – विशेषज्ञ की राय से शनि का रत्न नीलम पंचधातु की अंगूठी में जड़वाकर पहनने से शनिदेव के लाभदायी प्रभाव में बढ़ोतरी की जा सकती है। – शनि यंत्र की पूजा करने से शनिदेव का आशीर्वाद मिलता है। – हर शनिवार को उड़द की दाल, काला कपड़ा अथवा काला चादर किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान में देने से शनिदेव खुश होते हैं। – संध्याकाल के बाद और रात में सोने से पहले उत्तर दिशा की ओर मुख करके हनुमान चालीसा का पाठ करने से शनिदेव के दुष्प्रभाव को कम किया जा सकता है। – हर शनिवार को बजरंगबली हनुमानजी को आक (आंकड़ा) के फूल की माला चढ़ाएं। – शनिवार को पवनपुत्र हनुमानजी को तेल-सिंदूर चढ़ाकर शनिदेव की आराधना करें। -कौआ , को काले तिल अट्टा की लोई, मै डाल कर दे, हर शनिवार को शनि की दशा मै लाभ होगा – कुपित शनि को शांत करने के लिए सुंदरकांड या बजरंग बाण का पाठ करना फलदायी होता है। – हर शनिवार को *ॐ हं हनुमते नमः * की माला का जप करिये। शनि का पाठ करते समय खास ध्यान में रखने योग्य बातेंः- – पाठ करते समय हमेशा उत्तर दिशा की तरफ बैठें। – मिट्टी के दीपक में तिल या सरसों का तेल भरकर ज्योति जलाएं। – हनुमान जयंती अथवा शनि अमावस्या के दिन हवन कराकर शनिदेव की उपासना की जा सकती है। - मजदूर को पुरी मजदूरी दे, शनि देव, कर्म के देवता है, मजदूर से , रिक्शे वाले , मेहनत से कर्म करनेवाले को पूरा पैसे दे, भाव तोल ना करें, जातकों पर शनिदेव की कृपा बनी रहती है। इससे जीवन के कष्टों व विघ्नों का शमन होता है। शनि की साढ़े साती के दौरान यदि इन उपायों को पूरी आस्था व विश्वास के साथ किया जाए तो शनिदेव अवश्य ही प्रसन्न होकर वक्त की मार झेल रहे व्यक्ति को मुसीबतों से बाहर लाते हैं। शनिदेव दयालु हैं और अपने भक्तों की सभी दुःखों से रक्षा करते हैं। जिन जातकों के जीवन में इस समय शनि की साढ़े साती चल रही हो, यदि वे सुझाए गये सभी उपायों को अपनाएंगे तो निश्चित रूप से शनि के अनिष्टकारी प्रभाव से बचे रहकर राहत का अनुभव करेंगे। नीचे दी गई राशि के जातकों को ये उपाय अवश्य ही करना चाहिएः- वृश्चिक राशि (न, च) – शनि की पनौती का अंतिम चरण (चंद्र से दूसरे स्थान पर शनि) धनु राशि (भ, ध, फ, थ)– शनि की पनौती के मध्य का चरण (चंद्र के ऊपर से शनि) मकर राशि (ख, ज) – शनि की साढ़े साती का प्रथम चरण (चंद्र से बारहवें में शनि) कन्या राशि (प, ठ, ण) – शनि की ढैया (चंद्र से चौथे स्थान पर शनि) वृषभ राशि (ब,व,उ) – शनि की ढैया (चंद्र से आठवें में शनि की उपस्थिति) इसके अलावा, जातक की कुंडली में शनि वक्री या अस्त का हो, नीच का हो, पाप ग्रह मंगल, केतु या राहु के साथ संबंध में हो तो इन तमाम जातकों के लिए बताए गए ज्योतिषीय उपाय कारगर साबित होंगे। इन उपायों को अमल में लाने से जीवन में आ रही समस्याएं दूर हो जाती हैं। शनि के कष्ट निवारण हेतु हमारे द्वारा बताए गए उपायों को अपनाकर कष्टमुक्त जीवन जी सकेंगे।अन्य जानकारी, कुंडली विश्लेषण, के लिए सम्पर्क करें - अनुराग गौड़,


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*वसंत नवरात्र 13 अप्रैल से 21 अप्रैल 2021 तक* चैत्र नवरात्रि घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 13 अप्रैल दिन मंगलवार प्रातः 5:30 से 10:15 तक। अभिजीत मुहूर्त 11:56 से दोपहर 12: 47 तक होगा। 13 अप्रैल से नव संवत्सर भारतीय नववर्ष की शुरुआत भी होगी। क्रमश: नवरात्र 13 अप्रैल प्रतिपदा ,शैलपुत्री। 14 अप्रैल द्वितीया, ब्रह्मचारिणी। 15 अप्रैल तृतीया, चंद्रघंटा। 16 अप्रैल चतुर्थी ,कुष्मांडा। 17 अप्रैल पंचमी, स्कंदमाता। 18 अप्रैल षष्ठी, कात्यायनी। 19 अप्रैल सप्तमी, कालरात्रि। 20 अप्रैल अष्टमी, महागौरी। 21 अप्रैल नवमी, सिद्धिदात्री मां का पूजन होता है। ज्योतिषाचार्य अजय शास्त्री के अनुसार दुर्गा सप्तशती नारायण अवतार श्री व्यास जी द्वारा रचित महापुराणों में मार्कंडेय पुराण से ली गई है। इसमें 700 श्लोक व 13 अध्यायों का समावेश होने के कारण इसे सप्तशती का नाम दिया गया है। तंत्र शास्त्रों में इसका सर्वाधिक महत्व प्रतिपादित है और तांत्रिक क्रियाओं का इसके पाठ में बहुत उपयोग होता है। दुर्गा सप्तशती में 360 शक्तियों का वर्णन है। ज्योतिषाचार्य ने बताया है कि शक्ति पूजन के साथ भैरव पूजन भी अनिवार्य है। दुर्गासप्तशती का हर मंत्र ब्रह्मवशिष्ठ विश्वामित्र ने शापित किया है। शापोद्धार के बिना पाठ का फल नहीं मिलता दुर्गा सप्तशती के 6 अंगों सहित पाठ करना चाहिए कवच, अर्गला, कीलक और तीनों रहस्य महाकाली महालक्ष्मी महासरस्वती का रहस्य बताया गया है। नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती की चरित्र का क्रमानुसार पाठ करने से शत्रु नाश और लक्ष्मी की प्राप्ति व सर्वदा विजय होती है।

यस्मिन् जीवति जीवन्ति बहव: स तु जीवति | काकोऽपि किं न कुरूते चञ्च्वा स्वोदरपूरणम् || If the 'living' of a person results in 'living' of many other persons, only then consider that person to have really 'lived'. Look even the crow fill it's own stomach by it's beak!! (There is nothing great in working for our own survival) I am not finding any proper adjective to describe how good this suBAshit is! The suBAshitkAr has hit at very basic question. What are all the humans doing ultimately? Working to feed themselves (and their family). So even a bird like crow does this! Infact there need not be any more explanation to tell what this suBAshit implies! Just the suBAshit is sufficient!! *जिसके जीने से कई लोग जीते हैं, वह जीया कहलाता है, अन्यथा क्या कौआ भी चोंच से अपना पेट नहीं भरता* ? *अर्थात- व्यक्ति का जीवन तभी सार्थक है जब उसके जीवन से अन्य लोगों को भी अपने जीवन का आधार मिल सके। अन्यथा तो कौवा भी भी अपना उदर पोषण करके जीवन पूर्ण कर ही लेता है।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।

न भारतीयो नववत्सरोSयं तथापि सर्वस्य शिवप्रद: स्यात् । यतो धरित्री निखिलैव माता तत: कुटुम्बायितमेव विश्वम् ।। *यद्यपि यह नव वर्ष भारतीय नहीं है। तथापि सबके लिए कल्याणप्रद हो ; क्योंकि सम्पूर्ण धरा माता ही है।*- ”माता भूमि: पुत्रोSहं पृथिव्या:” *अत एव पृथ्वी के पुत्र होने के कारण समग्र विश्व ही कुटुम्बस्वरूप है।* पाश्चातनववर्षस्यहार्दिकाःशुभाशयाः समेषां कृते ।। ------------------------------------- स्वत्यस्तु ते कुशल्मस्तु चिरयुरस्तु॥ विद्या विवेक कृति कौशल सिद्धिरस्तु ॥ ऐश्वर्यमस्तु बलमस्तु राष्ट्रभक्ति सदास्तु॥ वन्शः सदैव भवता हि सुदिप्तोस्तु ॥ *आप सभी सदैव आनंद और, कुशल से रहे तथा दीर्घ आयु प्राप्त करें*... *विद्या, विवेक तथा कार्यकुशलता में सिद्धि प्राप्त करें,* ऐश्वर्य व बल को प्राप्त करें तथा राष्ट्र भक्ति भी सदा बनी रहे, आपका वंश सदैव तेजस्वी बना रहे.. *अंग्रेजी नव् वर्ष आगमन की पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं* ज्योतिषाचार्य बृजेश कुमार शास्त्री

आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताआलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।राम।

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