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लग्न कैसे ज्ञात करें

Astro Manish Tripathii 10th Jan 2018

इस लेख मे आपको बताया जायेगा कि लग्न कैसे निकाला जाता है। अर्थात लग्न स्पष्ट कैसे करते है? 

 

लग्न निकालने हेतु हमे व्यक्ति का सही जन्म समय ,जन्म तरीख ,जन्म महीना ,जन्म साल और जन्म स्थान पता होना चाहिये । इसी के साथ हमे एक पंचाग की जरूरत पडती है जो आपको किसी भी धार्मिक पुस्तको की दुकान से मिल जायेगा । 

 

लग्न निकालने का तरीका 

 

Question ; यदि जातक का जन्म निम्नलिखित है तो लग्न क्या होगा?

 

जन्म तारीख - 16-12-2017

समय - 11:44am 

जन्म स्थान - जालंधर 

 

सबसे पहले तो हमे अपने जन्म समय से सूर्योदय का समय घटाना पडेगा । सूर्योदय का समय आप पंचाग मे देख सकते है। 

          घं - मि - सैं

Time 11 - 44 - 00

सूर्योदय 7 - 24 - 00

__________________

शेष  04 - 20 - 00

__________________

 

जो समय घटाने पर आया है ये इष्टकाल कहा जाता है। अब इसको हम घटी पल मे बदल लेते है। 

               हम जानते है - 

कि__  24 मिनट = 1 घटी

         24 सैकंड = 1 पल

 

इसलिये , 04घंटे 20 मिनट = 10 घटी 50 पल

ये हमारा इष्ट काल घटी पल मे आ गया।

 

इसके बाद जिस चीज की हमे जरूत पडेगी वो हेै सूर्यस्पष्ट की । इसके लिये आपको फिर से पंचाग खोलना होगा और देखना होगा कि प्रात: साढे पांच बजे के ग्रह स्पष्ट कहां दिये है पंचाग मे वहां पर जाये और जिस तारीख का आपको सूर्य स्पष्ट देखना है वो मिल जायेगा । 

हमने देखा है कि  16 December 2017 का सूर्य स्पष्ट धनु राशि के 00° 06'22''  लिखा है। पंचाग मे सूर्य स्पष्ट आपको इस तरह ना लिखा होकर कुछ इस तरह लिखा मिलेगा- 8 0 06 22 अर्थात धनु राशि की जगह 8 लिखा मिलेगा  अर्थात राशि का संकेत 1 घटाकर दिया होता है पंचाग मे। 

इसके बाद हमे लग्न सारणी की जरूत पडेगी लग्न सारणी किस तरह की होती है वो मैने फोटो मे दिखाया हुआ है। 

 

लग्न सारणी मे हमे धनु राशि के आगे और 0 अंश के नीचे  46घटी 18पल  लिखा मिलेगा । सूर्य स्पष्ट मे 00 अंश के बाद 06 कला भी है इसलियेे हमे इसकी गणना भी करनी करनी होगी । लग्न सारणी देखने पर पता चलता है कि धनु राशि के 0 अंश के नीचे 40घटी18पल लिखा है और 01 अंश के नीचे  40घटी 30 पल लिखा है और इनका अंतर निकालने पर  12पल का अंतर आता है। धनु राशि के अंशो के घटी पलो में। कुछ इस तरह__

 

40:18 - 40:30= 12

 

इस तरह हम कह सकते है कि एक अंश बढने पर 12पल बढते है । सुविधा के लिये हमे अंश को कला और कला को विकला मे मानकर गणना करनी होगी कुछ इस तरह_____

 

1अंश = 60कला

1कला= 60विकला

 

इस प्रकार अगर  12 पल  1अंश पर पढते है तो 6कला पर कितने पल पर बढेंगे । (हमारा सूर्य स्पष्ट 00अंश 06कला पर है तो इसलिये 06 कला की गणना की जा रही है) 

 

6कला × 12पल ÷ 60 = 1पल  2विपल 

 

इसी तरह जो हमारे सूर्य स्पष्ट के  धनु राशि के सामने  46पल 18 कला मिले थे उनमे ये जोडना होगा_____

 

46:18+1:02= 46घटी 9पल 02विपल 

 

अब इसमे हमे अपना इष्ट काल जोडना होगा। 

 

46 : 9 + 10 : 50 = 57 घटी 9पल प्राप्त हुआ है। 

 

अब हमे ये देखाना होगा कि लग्न सारणी  मे 57 कला 9 पल कहां पर लिखा है । जब आप ये देखेंगे तो बिलकुव यही  घटी पल तो आपको नही मिलेंगे लेकिन इसके नजदीकी घटी पल मिल जायेंगे।  हमे देखने पर लग्न सारणी मे 57घटी 7पल  कुंभ राशि के आगे 11अंश के नीचे लिखा मिलेगा। ये हमारे 57घटी 9पल से 2पल कम है इसलिये हमे 2 पल के कला निकालकर 11अंश मे जोडने होंगें। 

 

इसके लिये सबसे पहले हमे देखना होगा कि जब 11 अंश के नीचे 57घटी 7पल लिखा है तो 12अंश के नीचे क्या लिखा है । हम देखते है कि वहां पर 57 घटी 14पल लिखा है। इसलिये हमे दोनो का अंतर निकालना होगा इससे ये पता चल जायेगा कि 1 पल मे कितने अंश कला विकला आगे बढता है लग्न ? 

 

57 : 14 - 57 : 09 = 7पल 

 

इस तरह हम कह सकते है कि 7 पल मे 1 अंश या 60 कला या 3600विकला बढते है । 

 

गणना की सरलता के लिये हम विकला ही लें तो अच्छा होगा । इसलिये हम अब उन 2 पलो के अंतर के कला विकला बनायेंगे जो हमे प्राप्त हुये थे । 

 

हम जानते है ,___ 

 

7पल = 3600 विकला

 

तो, 

 

2पल = ? विकला

 

3600×2÷7= 1कला 42विकला

 

इसप्रकार अब हम कुंभ राशि के 11अंशो मे 1 कला  42 विकला जोडेंगे और फिर हमारा लग्न स्पष्ट हो जायेगा। 

 

___

 

राशि - अंश - कला - विकला

10® : 11°: 01' : 42

 

अर्थात कु़ंभ राशि के 11अंश 1कला 42विकला का हमारा लग्न स्पष्ट हो गया है। 

 

Note : अगर आप इस विधि से लग्न निकालकर किसी साफ्टवेयर से तुलना करेंगे तो एक-आधे अंश का फर्क आ सकता है क्युंकि साफ्टवेयर अधिकांशत: सांपातिक काल ( sideral time) पर आधारित होते है ।


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