ज्योतिष

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Astro Pawan Kumar Pandey Ji 26th Dec 2022

*कुंडली के  (1) भाव मंगल का फल*

मंगल जातक में धैर्य, पराक्रम एवं साहस बताता है छोटे भाई की स्थिति भी पत्रिका में मंगल से देखी जाती हैं। मंगल शत्रु, , विजय, क्रोध, बाहुबल और अस्त्र शस्त्र का कारक है। मंगल धैर्य, कीर्ति, नेतृत्व, आपरेशन, कृषि, उत्साह, दण्ड नीति, गंभीरता एवं स्वतंत्रता का भी द्योतक है। भूमि पुत्र होने की वजह से मंगल से भूमि, जमीन, जायदाद इत्यादि का विचार भी करते हैं।

प्रथम स्थन में मंगल का प्रभावः
स्वभावः लग्न में मंगल के प्रभाव से जातक क्रोधी, भावन-शून्य, महत्वाकांक्षी और साहसी गुस्सा बहुत जल्दी और बहुत ज्यादा आता है। जातक दृढ़ शरीर वाला होता है। प्रायः , मुख या सिर पर चोट का निशान होता है। जातक सुंदर स्वरूप  ताम्र वर्ण होता है। जातक दीर्घायु होता है। लग्न में स्थित मंगल से जातक को सिर और शरीर में चोटें लगती हैं। बचपन में दांत निकलते समय कष्ट होता है। जातक को उदर विकार, रक्त विकार हो सकते हैं।  वह सेना या पुलिस में पद प्राप्त करना है।  शल्य-चिकित्सक (सर्जन) या भूगर्भ वैज्ञानिक हो सकता है। जातक भूमि संबंधित कार्यों में विशेष सफलता प्राप्त करता है।
पूर्ण दृष्टिः प्रथम भाव में स्थित मंगल की पूर्ण दृष्टि सप्तम स्थान पर पड़ती है जो पत्नी का स्थान है इस कारण प्रायः जातक की उसकी पत्नी से अनबन बनी रहती है। प्रथम भाव स्थित मंगल की चतुर्थ स्ट्री चतुर्थ भाव पर होती हैं जो जातक की माता के लिए कष्टकारी है। जातक मातृभक्त होता है। प्रथम भाव स्थित मंगल की अष्टम पूर्ण दृष्टि भाव पर होती है जिससे जातक को पेट संबंधी बीमारियाँ हो सकती है।

मित्र/शत्रु राशिः स्वराशि, मित्र राशि और उच्च राशि का मंगल होने पर जातक साधारण परिस्थियों से उठकर उच्च पद प्राप्त करता है। प्रायः जातक स्वस्थ और हष्ट-पुष्ट होता है। चेहरे पर लालिमा । उच्च अधिकारीयों का सहयोग मिलता है। नीच का होने से जातक क्रूर कर्म करने की और प्रवृर्त होता है। शत्रु राशि का मंगल होने के कारण ज। जातक का वैवाहिक जीवन सुखमय नहीं होता है। मुकदमेबाजी से परेशान होता है

भाव विशेषः लग्न में मंगल ऐसा जातक नेतृत्व क्षमता  सेना, पुलिस, में अधिकारी बन सकता है। चेहरे पर दाग अपने कार्य में हस्तक्षेप पसंद नहीं होता।  आक्रमण स्वभाव का व आवेश में आने पर असंतुलित व्यवहार हो जाता है।


कुंडली के  (,२) भाव मंगल का फल

मंगल जातक में धैर्य, पराक्रम एवं साहस बताता है छोटे भाई की स्थिति भी पत्रिका में मंगल से देखी जाती हैं। मंगल शत्रु, , विजय, क्रोध, बाहुबल और अस्त्र शस्त्र का कारक है। मंगल धैर्य, कीर्ति, नेतृत्व, आपरेशन, कृषि, उत्साह, दण्ड नीति, गंभीरता एवं स्वतंत्रता का भी द्योतक है। भूमि पुत्र होने की वजह से मंगल से भूमि, जमीन, जायदाद इत्यादि का विचार भी करते हैं।


 द्वितीय भाव  में मंगल

स्वभावः द्वितीय स्थान में स्थित मंगल के प्रभाव से जातक उग्र स्वभाव का, असभ्य और कटु वाणी बोलने वाला होता है। जातक निर्बुद्धि, धनहीन और फिजूल के साधनों में अपव्यय करने वाला होता है। खर्च आता रहता है


पूर्ण दृष्टिः द्वितीय भाव में स्थित मंगल की सप्तम पूर्ण दृष्टि अष्टम स्थान पर पड़ती है जिसके प्रभाव से जातक दुःखी हा है। पेट संबंधी बीमारियाँ हो सकती है।  मंगल की चतुर्थ दृष्टि पंचम भाव पर पड़ती है जिससे जातक को संतान की चिंता रहती1 है। द्वितीय भाव स्थित मंगल की अष्टम पूर्ण नवम भाव पर पड़ती है। जिससे जातक को भाग्य में प्रगति होती है।

शत्रु/मित्र राशिः उच्च स्वराशि व मित्र राशि में स्थित मंगल जातक पराक्रमी एवं परदेशवासी होता हैं। शत्रु व नीच राशि में मंगल के होने पर जातक क्रोधी, चोरी का भय, कटु बोलने वाला होता हैं। और उसे भारी आर्थिक हानि होती है।  पैतृक संपत्ति को लेकर हमेशा चिंतित रहता है।  निर्बुध्दी एवं धनहीन होता है।
द्वितीय भाव  में मंगल के स्थित होने से जातक की तर्फ शक्ति प्रबल होती है.। इससे विवादों में लाभ प्राप्त होता है। लेन-देन से जातक को सफलता  प्राप्त होती है। जातक कटु तिक्त रस प्रिय होता है। अपार जीवन शक्ति से जातक बिना थके लगातार काम करता है। द्वितीय भाव का मंगल से जातक को विष व शास्त्र का डर रहता है

तृतीय भाव में मंगल का प्रभावःभाग (3)
स्वभावः जातक की जन्म पत्रिका में तृतीय भाव का मंगल प्रबल कारक होता है जातक साहसी, धैर्यवान, सर्वगुणसम्पन्न, बलवान, शूरवीर और उदार होता है। जातक  अधिक भोजन करता है। जातक सारे सुख अपने पराक्रम से प्राप्त करता है।
पूर्ण दृष्टिः तृतीय स्थान में मंगल की पूर्ण सप्तम दृष्टि नवें स्थान पर पड़ती है। जिसके कारण जातक धनी, पराक्रमी और बुद्धिमान होता है परंतु फलों की प्राप्ति मंगल के शुभ व अशुभ स्थिति पर निर्भर रहेगी। तृतीयमंगल की पूर्ण चतुर्थ दृष्टि षष्ट भाव पर पड़ती है जिसके प्रभाव से जातक शत्रुओं को परास्त करता है। मंगल की अष्टम पूर्ण दृष्टि दशम भाव पर पड़ती है जिसके  जातक राज्यधिकार व उच्च स्थान की प्राप्ति होती है।
मित्र/शत्रु राशिः मित्र राशि, स्व राशि और उच्च राशि में स्थित मंगल के प्रभाव से जातक में शौर्य एवं पराक्रम अधिक होता है एवं वह अपने पराक्रम से सब कुछ प्राप्त करते हुए भी सदैव अंसतुष्ट रहता है। शत्रु व नीच राशि में होने पर जातक को भाइयों से सुख नहीं मिलता है। रूखापन तथा कटुता में वृद्धि होती है। शत्रु राशि में जातक होने से जातक अपनी शक्ति तथा बुद्धि का उपयोग गलत दिशा में कर सकता है। जातक प्रायः विद्रोही स्वभाव का होता है।
तृतीय भाव विशेषः जातक अपने पुरूषार्थ (प्रयासों) से धन अर्जन करता है। जातक को भाईयों से विशेष सहयोग नहीं मिलता है। जातक अपने भाईयों को लेकर चिंतिच रहता है। जातक में शारीरिक स्फूर्ति अधिक होती है। जातक शस्त्र कला में विशेष रूचि रखता है


चतुर्थ स्थान में मंगल का प्रभावः

स्वभावः चतुर्थ स्थान में मंगल के प्रभाव से जातक का हृदय कठोर होता है। जातकल सुखी, सन्ततिवान, अभिमानी एवं प्रवासी होता है। जातक का अपने पिता से वैचारिक मतभेद रहता है।

पूर्ण दृष्टिः दशम भाव पर मंगल की पूर्ण दृष्टि के प्रभाव से जातक राजसेवक होता है। प्रायः जातक का अपने पिता से वैचारिक मतभेद रहता है। जातक मेहनती भी होता है। चतुर्थस्थ मंगल की चतुर्थ पूर्ण दृष्टि सप्तम भाव पर पड़ती हैं जिसके प्रभाव से जातक की पत्नी से अनबन रहती है। चतुर्थस्थ मंगल की अष्टम दृष्टि एकादश भाव पर पड़ती है जिससे जातक को भूमि संबंधी कार्यो से आय होती है।
मित्र/सत्रु राशिः स्व, मित्र या उच्च राशि में होने पर जातक को जमीन, मकान वाहन आदि के सुख प्राप्त होते हैं. यह राज योग कारक होता है। जातक स्वनिर्मित मकान में रहता है। शत्रु व नीच राशि में होने से जातक के घर या व्यवसाय में सदैव अग्नि से भय रहता है। चोरी  का भय रहता है। माता को अरिष्ट होता है। जातक जन्म स्थान से दूर गरीबी में रहता है जातक को जमीन, वाहन आदि के सुख प्राप्त नहीं होते।
चतुर्थ भाव विशेषः चतुर्थ भाव विशेष में मंगल स्थित होने से जातक विशेष रूप से मातृ भक्त होता है। किंतु जातक को मातृ सुख पूर्ण नहीं मिल पाता है। जातक को भूमि एवं वाहन का सुख भी मुश्किल से प्राप्त होता हैं। घरेलू झगड़े होने की संभावना रहती है। चतुर्थस्थ मंगल जातक को भ्रमणशील बनाता हैं। घरेलू झगड़े होने की संभावना रहती है। चतुर्थस्थ मंगल जातक को किसी तकनिकी क्षेत्र में जाता है


5, पाँचवे घर का मंगल व्यक्ति को ज्ञानी ओर विद्वान बनाता है ।जहाँ बैठा जातक व्यक्ति को बहुत अच्छा वक्ता बना देता है । व्यक्ति वकील ।,डॉक्टर , मे बहुत अच्छा कर सकता है जहाँ बैठा मंगल इंसान की बौद्विक क्षमता को बढाता है । जातक पढ़ाई अछि कर लेता मगर वो जब तक किसी विषय का निचोड न निकाल दे तब तक बोल सकता है । जहाँ बैठा मंगल 8 घर पर दृष्टि डालता तो जातक सिर्फ बोलता नही उसकी आत्मा से जो आता है वो बोलता । किताबी ज्ञान नही अंदरूनी भी होता है ।थोड़ा गर्म मिजाज का होता है । सन्तान पीड़ा भी सहता है अगर पाप प्रभाव हो । अंत ,पेट संबंधी प्रॉब्लम होती है । 11 भाव पर दृष्टि से आय का स्त्रोत बना रहता है । वहा कोई और ग्रह हो तो धन आता रहेगा । 12 भाव पर दृष्टि जहा धन खर्च करवाता है ।वही कौर्ट , वकील , डॉक्टर के क्षेत्र मे सफलता दिलाता है ।

6, छठे घर का मंगल शत्रु हर्ता होता है । शरीर से बलशाली ओर अंदर से दुस्ट होता है ।जब तक शत्रु को पराजित न कर दे तब तक सांस नही लेता है । जीवन भर ऋणी रहता है । उत्साही होता है सेना पुलिस मे यह जातक अच्छा करता है । जहा बैठा मंगल 4 दृष्टि भाग्य भाव पर डालता तो भाग्य निर्माण करेगा । दृष्टि हमेशा गलत फल नही देती । अगर शत्रु घर को देखे तो ही नुकसान होगा ।  7 दृष्टि 12 भाव पर होगी जातक का खुब धन खर्च होगा जातक कमायेगा बहुत मगर खर्च भी बहुत होगा । कमायेगा ओर दूसरे का घर भरेगा । 8 दृष्टि लगन पर पड़ेगी तो जातक उत्साही ,जल्दी निर्णय लेने वाला , जल्दबाज होगा ।

7 , सातवें भाव में बैठा मंगल जहा जातक को मांगलिक बनाता है । और जहा बैठ दाम्पत्य जीवन को खराब करता है । पेट अंत की खराबी देगा । इच्छा शक्ति उग्र होगी । जहा बैठा मंगल चाहें लड़की का हो या लड़के का इच्छा शक्ति बहुत होगी । पति पत्नी दोनों ही उग्र होंगे । जहा मैं बता दु । जब भी मंगल का संबंध लगन से होगा जातक जल्दबाज, उत्साही, ओर गलती करने वाला बाद मे पछताने वाला होगा । जहा एक बात और बता दु अगर मंगल सातवे भाव मे हो तो उसपर शनि की दृष्टि हो तो पुरूष मे एक दोष होता है । वो बीवी को शरीरक सुख कम देता है । और ग्रहस्थ जीवन को खत्म करता है । एक ओर बात शनि और मंगल का सबंध जब भी लगन से हो जातक शक़्क़ी प्रविर्ती का होता है । जिस वजह से उसके संबंध खराब होते है ।
जहाँ बैठा मंगल 4 दृष्टि 10 पर डालता है तो जातक जल्द बाजी मे कर्म कर जाता है । 7 दृष्टि लगन पर तो जल्दबाजी उत्साही । 8 दृष्टि धन भाव पर हो जल्दबाजी में धन लगा देते है । अगर पाप प्रभाव हो धन फस जाता है ।

8 , आठवा मंगल जातक को मांगलिक तो बनाता है । साथ मे ज्ञानी भी बनाता है । 8 भाव गुप्त विद्या धन का भी होता है ।यह शारीरक खराबी ,बीमारी पर खर्च ,क्रोधी, रक्त विकार , दांत ,आँख , स्किन का रोग देता है ।चोट चपेट, एक्सीडेंट ,दुर्घटना भी देता है ।अगर शुभ प्रभाव मे हो तो जातक को अचानक धन प्राप्त होता है । जैसे लाटरी ।जहा बैठा मंगल चौथी दृष्टि  11 भाव पर दृष्टि डालता तो धन की स्थिति बनी रहती है उतार चड़ाव होगा मगर धन आता रहेगा । 7 दृष्टि 2 भाव पर होती है तो जातक को पैतृक संपत्ति दिलाता है । 8 दृष्टि 3 भाव पर डालता है तो छोटे भाई से क्लेश करा देगा ।। क्योंकि 8 दृष्टि 8 भाव से पड़ रही है ।जातक पराक्रमी बहुत होगा ।

9 भाव मे बैठा मंगल जातक को भाग्यवान बनाता है । कियुकि 9 भाव हमारे भाग्ये का है । जहाँ बैठा मंगल 12 भाव पर अपनी चौथी दृष्टि डालता है तो जातक के व्यय भी धर्मिक कार्यों मे करवाता है ।और 7 दृष्टि 3 घर पराक्रम पर डालता है तो जातक अपने पराक्रम से अपने भाग्य का निर्माता खुद ही होता है , जहाँ से 8 दृष्टि 4 घर पर डालता है तो जातक घर भूमि वाहन का मालिक बनता है।

10 भाव मे बेठा मंगल दिगबली हो जाता है । जातक को दलाली , भूमि , के कार्यों मे बहुत सफलता मिलती है । enginering की लाइन मे अच्छा कैरियर होता है ।अब देखिए 10 मे मंगल बली इसलिए होता है कियुकि कर्म स्थान है । जहाँ बैठा मंगल लगन को देखता है तो जातक को जल्दबाज तो बनाता है ।जहां चन्दर की स्थिति को भी देखे अगर वो भी खराब हुआ तो जातक जल्दबाजी में कुछ भी कर बैठे गा, जहाँ से मंगल 4 घर को देखेगा तो माँ के स्वास्थ्य में थोड़ी कमी लाएगा इसके लिए 4 भाव के स्वामी की स्थिति देखनी होगी । जहाँ बेठा मंगल 5 घर को देखता तो कभी गर्ब को कमजोर करता है ।और गर्बपात करवाता है ।

11 भाव मे मंगल जहाँ आय के स्त्रोत हमेशा बनाये रखता है ।और जातक के पास आय होती रहती हूं । जहाँ बैठा मंगल 2 घर को देखता है और जातक की वाणी को कड़वा बनाता है । जिस से उसके दुश्मन बनते है ।जहां 5 घर पर दृष्टि डालते है तो जैसे बताया गर्बपात की स्थिति बनाते है ।और पढ़ाई मे भी अड़चने पैदा करते है । जहाँ से मंगल 6 भाव को देखते है । तो जातक क़र्ज़ जितना मर्जी ले मगर किसी को क़र्ज़ दे नही । 

12 भाव मे  मंगल जहाँ जातक को थोड़ा अलसी बनाता है । अगर पाप प्रभाव मे हो तो व्यसनी भी बनाता है । जहाँ बेठा मंगल 3 घर को देखता तो जातक पराक्रम से सब हासिल करता है   6 भाव को देखता तो पहले भी कहा क़र्ज़ देना नही किसी को भी ।7 भाव पर  दृष्टि डाल पत्नी से मतभेद करवाता है ।


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आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताआलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।राम।