निसन्तान दम्पती हेतु ज्योतिषिय उपाय

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निसन्तान दम्पती हेतु ज्योतिषिय उपाय

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Ravinder Pareek 16th Jul 2020

भारत वर्ष में कई ऐसे दम्पत्ति है जिन्होंने हर प्रयास कर लिए लेकिन उनको कोई सन्तान नहीं हुई। कभी कभी तो डाक्टर की हर जांच अनुसार दोनों में कोई अवगुण नहीं पाया गया कि इन कारणों से सन्तान नहीं हो पा रही। ज्योतिष अनुसार संतान नहीं होने के बहुत से कारण है जिसमें पितृ दोष से लेकर श्रापित दोष तक एवं सर्प को मारने से लेकर बिल्ली अथवा गाय या बैल की हत्या का श्राप भी परिवार को लगा हो उनके भी वंश व्रद्धि में व सन्तानोउतप्ति में बाधक माना जाता है । मुख्य पहचान यदि घर मे दीमक बहुत हो जाय या कीड़े मकौड़े बहुत निकले या प्राकृतिक जीवों बार बार घर से निकलना व दवाईयों से उन्हें बार बार मारना अति घातक हो जाता है ऐसे में उपरोक्त दोष होता है जब किसी को कोई सन्तान नहीं होती तो वह हर मन्दिर देवी देवता ,संत ,साधु आदि की शरण में भी जाता किन्तु फल नहीं मिलता। आपको ज्योतिषीय कुछ उपाय बता रहा हूं जिनके प्रयोग से ईश्वर ने चाहा तो सन्तान होने के प्रबल योग बनते है। *सन्तान होने के प्रयोग* ******************** 1. जिन स्त्रियों के घर संतान नही है उन स्त्रियों को प्रतिदिन पीपल की परिक्रमा करनी चाहिए, पीपल के पेड़ पर दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है, रविवार के दिन यह उपाय नहीं करते। 2. संतान की इच्छा रखने वाली स्त्रियों को "सर्प-पूजन" करना चाहिए, इससे संतान दोष दूर हो जाता है। 3. ऐसा माना जाता है कि जिन स्त्रियों को संतान की चाह होती है उन्हें रामेश्वरम (जिसे पूरी के नाम से भी जाना जाता है) उसकी यात्रा करनी चाहिए। 4. "नवग्रह शांति पाठ", संतान प्राप्ति में बेहद मददगार होता है इस पाठ से सारे दोष से निवारण मिलता है। 5. संतान प्राप्ति की इच्छुक स्त्रियों को 9 वर्ष से कम आयु की कन्याओं के चरण चुने चाहिए, इस प्रकार जल्द ही उनके घर मे बच्चो की किलकारियां गूंज सकती है। 6. संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाली स्त्रियों को अपने कमरे (Room) में "श्री कृष्णा भगवान" की बाल रूपी फ़ोटो लगाए या लड्डू गोपाल को प्रतिदिन माखन-मिशरी का भोग अर्पण करें। 7. गुरुवार के दिन स्त्रियों को पीले धागे में पिसी कौड़ी को कमर पर बांधने से प्रबल संतान के योग बनते है। 8. "राधा-कृष्ण" के मंदिर में चांदी की बांसुरी भगवान के चरणों मे अर्पित करना भी शुभ होता है। 9. मंगलवार के दिन गरीबो को गुड़ बांटे, तथा हनुमान जी को गुलाब की माला अर्पित करें। 10. संतान प्राप्ति के लिए स्त्रियों को प्रतिदिन खाली पेट गुड़हल का फूल 90 दिनों तक खाने से भी लाभ मिलता है। 11. बुधवार के दिन गेंहू के आटे की गोलियां बनाकर उसमें चने की दाल और थोड़ी हल्दी मिलाकर गाय को खिलाना चाहिए। 12. संतान गोपाल यंत्र की स्थापना करें व सवा लाख संतान गोपाल मंत्र का जाप करने से और दस मुखी रुद्राक्ष धारण करने से भी जल्दी ही संतान प्राप्ति होती है। 13. सन्तान प्राप्ति हेतु आप इधर उधर न भटक कर अपने कुल देव या कुल देवी की शरण में परिवार सहित जाकर प्रार्थना करे। 14. घर में सांप या नाग आने पर किसी भी स्थति में उसे मारे या मरवाए नहीं। 15. किसी कूतिया जिसे हाल में प्रसव हुआ उसकी सेवा करे उसे दूध या रोटी खिलावें। 16- जिनके संतान नहीं है वे दम्पती काली गाय अथवा किसी भी गाय की प्रतिदिन सेवा करें या गौशाला में गाय गोद ले उनकी सेवा अपने हाथों से करें तो निश्चित लाभ होगा गऊ माता रानी की कृपा से आपकों सन्तान सुख अवश्य मिलेगा। ईश्वर आपकी मनोकामना पूर्ण करे । 🙏🏻 *रविन्द्र पारीक ज्योतिषी व वास्तु सलाहाकार*🙏🏻


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Suman Sharma

👍👍


Suman Sharma

very good knowledge


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*वसंत नवरात्र 13 अप्रैल से 21 अप्रैल 2021 तक* चैत्र नवरात्रि घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 13 अप्रैल दिन मंगलवार प्रातः 5:30 से 10:15 तक। अभिजीत मुहूर्त 11:56 से दोपहर 12: 47 तक होगा। 13 अप्रैल से नव संवत्सर भारतीय नववर्ष की शुरुआत भी होगी। क्रमश: नवरात्र 13 अप्रैल प्रतिपदा ,शैलपुत्री। 14 अप्रैल द्वितीया, ब्रह्मचारिणी। 15 अप्रैल तृतीया, चंद्रघंटा। 16 अप्रैल चतुर्थी ,कुष्मांडा। 17 अप्रैल पंचमी, स्कंदमाता। 18 अप्रैल षष्ठी, कात्यायनी। 19 अप्रैल सप्तमी, कालरात्रि। 20 अप्रैल अष्टमी, महागौरी। 21 अप्रैल नवमी, सिद्धिदात्री मां का पूजन होता है। ज्योतिषाचार्य अजय शास्त्री के अनुसार दुर्गा सप्तशती नारायण अवतार श्री व्यास जी द्वारा रचित महापुराणों में मार्कंडेय पुराण से ली गई है। इसमें 700 श्लोक व 13 अध्यायों का समावेश होने के कारण इसे सप्तशती का नाम दिया गया है। तंत्र शास्त्रों में इसका सर्वाधिक महत्व प्रतिपादित है और तांत्रिक क्रियाओं का इसके पाठ में बहुत उपयोग होता है। दुर्गा सप्तशती में 360 शक्तियों का वर्णन है। ज्योतिषाचार्य ने बताया है कि शक्ति पूजन के साथ भैरव पूजन भी अनिवार्य है। दुर्गासप्तशती का हर मंत्र ब्रह्मवशिष्ठ विश्वामित्र ने शापित किया है। शापोद्धार के बिना पाठ का फल नहीं मिलता दुर्गा सप्तशती के 6 अंगों सहित पाठ करना चाहिए कवच, अर्गला, कीलक और तीनों रहस्य महाकाली महालक्ष्मी महासरस्वती का रहस्य बताया गया है। नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती की चरित्र का क्रमानुसार पाठ करने से शत्रु नाश और लक्ष्मी की प्राप्ति व सर्वदा विजय होती है।

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न भारतीयो नववत्सरोSयं तथापि सर्वस्य शिवप्रद: स्यात् । यतो धरित्री निखिलैव माता तत: कुटुम्बायितमेव विश्वम् ।। *यद्यपि यह नव वर्ष भारतीय नहीं है। तथापि सबके लिए कल्याणप्रद हो ; क्योंकि सम्पूर्ण धरा माता ही है।*- ”माता भूमि: पुत्रोSहं पृथिव्या:” *अत एव पृथ्वी के पुत्र होने के कारण समग्र विश्व ही कुटुम्बस्वरूप है।* पाश्चातनववर्षस्यहार्दिकाःशुभाशयाः समेषां कृते ।। ------------------------------------- स्वत्यस्तु ते कुशल्मस्तु चिरयुरस्तु॥ विद्या विवेक कृति कौशल सिद्धिरस्तु ॥ ऐश्वर्यमस्तु बलमस्तु राष्ट्रभक्ति सदास्तु॥ वन्शः सदैव भवता हि सुदिप्तोस्तु ॥ *आप सभी सदैव आनंद और, कुशल से रहे तथा दीर्घ आयु प्राप्त करें*... *विद्या, विवेक तथा कार्यकुशलता में सिद्धि प्राप्त करें,* ऐश्वर्य व बल को प्राप्त करें तथा राष्ट्र भक्ति भी सदा बनी रहे, आपका वंश सदैव तेजस्वी बना रहे.. *अंग्रेजी नव् वर्ष आगमन की पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं* ज्योतिषाचार्य बृजेश कुमार शास्त्री

आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताआलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।राम।

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