Astrology Simplified

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Astro Suresh Chawla 31st Jul 2019

Imagine how 1000s of years ago, our ancestors thought of our galaxy, how our planets affect us. How they observed how sun revolves around or other planets revolve.

How much time Sun takes to rotate or for that matter how much time moon takes to rotate. How they observed that some planets remain static while some planets move.

It was clear later on that it not sun that rotates but other planets rotate around sun

Earth takes one year to rotate one full circle and comes back to a point where static stars are located in the universe.

Moon takes one month to rotate or circle the sun to come back to same point in universe which is considered as reference point.

How many efforts would have been made to study the full circle of Saturn which takes 30 years to complete and come back to a point of reference in the universe?

The life span of a man was around 100 years and how after each ancestor to other ancestor the task would have been accomplished.

The principles they set thousands of years ago are still valid. 

पूर्वजों ने हमारी आकाशगंगा के बारे में सोचा, हमारे ग्रह हमें कैसे प्रभावित करते हैं। उन्होंने कैसे देखा कि सूरज कैसे घूमता है या अन्य ग्रह घूमते हैं।

सूर्य को परिक्रमा करने में कितना समय लगता है या इस बात के लिए कि चंद्रमा को घूमने में कितना समय लगता है। उन्होंने कैसे देखा कि कुछ ग्रह स्थिर हैं जबकि कुछ ग्रह चलते हैं।

बाद में यह स्पष्ट हुआ कि यह सूरज नहीं है जो घूमता है लेकिन अन्य ग्रह सूर्य के चारों ओर घूमते हैं

पृथ्वी को एक पूर्ण चक्र को घुमाने में एक वर्ष लगता है और एक ऐसे बिंदु पर वापस आता है जहां स्थिर तारे ब्रह्मांड में स्थित होते हैं।

चंद्रमा को ब्रह्मांड में उसी बिंदु पर वापस आने के लिए सूर्य की परिक्रमा या चक्कर लगाने में एक महीने का समय लगता है जिसे संदर्भ बिंदु माना जाता है।

शनि के


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आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताआलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।राम।

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