Depression

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Acharya Ashu Sharma 31st Jul 2020

#अवसाद क्या है? #Depression आज के भौतिक युग मे प्रतियोगिता भरी जिंदगी मे हर एक आदमी ऐसे जैसे भाग रहा है जिसमे सभी अनगिनत लोग वास्तव मे चुनौतिपूर्ण जिंदगी का सामना कर रहे है। सभी के ऊपर जिम्मेदारियों और लक्ष्य का बोझ सा है, जिसमे मज़बूत आत्मविश्वास और साहस है वह तो कुछ हद तक इस दबाव मे सम्भल जाएगा, बाकि जिसका मनोबल कमज़ोर हुआ और वह जीवन की चुनौतियों से लड नही सका तो उसके नियंत्रण से सब बाहर आजाता है जिससे उसके व्यवहार मे भी बदलाव आने लगते है और वह #उदासी व #मानसिक अवसाद का शिकार होने लगता है।

जिससे उसका घर और कार्य-स्थल मे कार्य करने का मन नही करता और कार्य की क्षमता कम होने लगती है। अवसाद मे आया व्यक्ति किसी को भी अपने इस तरह के अकेलेपन, कमज़ोरी, निराशा, तनाव या दबाव के बारे मे समझा नही सकता है कि हम किन परिस्थितियों से गुजर रहे है या चुनौतियों का सामना कर रहे है।

इस समय मे वह सबसे अलग हो कर अपनी रुचियो को कम करना शुरु करता है, जो बहुत बडी गलती है कि वह किसी को अपना नही समझता और सबमे कमी निकाल कर उन पर शक करता है। यह समय बहुत ही मुश्किल होता है और इस समय मे बहुत ही सकारात्मक, व्यवहारिक व शांत होकर समस्या के समाधान तक पहुंचना होता है।

हम अपने चारो ओर देखे तो आसपास के वातावरण मे हमारी चिंताओ और अवसाद के कारण है- शिक्षा, नौकरी, व्यवसाय, प्रेमी, विवाह, कर्ज़, नाम और मुकद्दमे आदि।

विशेषकर शहरी क्षेत्रो मे इस तरह की मानसिक परेशानी और भावनात्मक तनाव आम होने लगा है क्योंकि हर तरह के उम्र के लोगो मे इच्छाओं की वृद्धि होने लगी है जिससे अवसाद की समस्या बढ रही है। पुरुषो की तुलना मे महिलाओ के अवसाद की अधिक सम्भावना रहती है। प्रतियोगिता और दिखावा इतना बढ गया है कि लोग जितना भी अच्छा कर ले उन्हें संतोष नही होता है क्योंकि वह दूसरों से तुलना करने लगते है और खुद को कम आंकते है। बच्चों को अपने माता-पिता का दबाव और उनकी उम्मीदो का सामना करना पड़ता है। युवाओ को अपने व्यवसाय से जुडे क्षेत्रो मे खुद को आगे लाने के लिए हर तरह के मापदंडो से गुज़रना पडता है।

हम अपने परिवार मे किसी न किसी दायित्व को निभा रहे है जिसमे भी हम भावनात्मक या मानसिक रुप से तनाव मे घिरे रहते है। ऐसी बहुत सी चिंताएं मन को कमज़ोर करके मन के भीतर गंभीर मनौवैज्ञानिक मानसिक अशान्ति पैदा करती है। जिसका कारण है वही उदासी और अवसाद!

इसी अवसाद की वज़ह से जीवन मे खुशी नही मिलती और सब कुछ होने पर भी अकेलापन और तनाव ही घिरा रहता है। #अवसाद के लक्षण- ऐसे मे व्यक्ति #उदास महसूस करना, बार-बार मूड का बदलना, आनंद लेने वाली रुचियों मे कमी आना, भूख कम लगना, वज़न कम होना, नींद कम य अधिक आना, कमज़ोरी और थकान होना, खुद को दोषी मानना, हाथो मे कम्पन्न, जीवन बोझ लगना, #आत्महत्या के विचार, धीरे चलना, निर्णय न ले पाना, एकाग्रता मे कठिनाई या अकेलेपन का शिकार रहता है।

इसके अलावा थायरॉयड, ट्युमर, विटामिन की कमी से भी अवसाद होने की सम्भावना रहती है। उदासी या किसी बात का दुख जैसे किसी प्रिय की मृत्यु, कार्य-स्थल मे हानि, कर्ज़, किसी रिश्ते का अंत, प्रेमी से दूरी, गरीबी, उम्मीदो की अधिकता और खुद को दूसरो की तुलना मे कम आंकना आदि से भी जीवन मे निराशा आती है। लेकिन यह उदासी अधिक समय तक बनी रहे तो अवसाद का कारण बनती है। मस्तिष्क मे कुछ रसायन का संतुलन बिगडना, अनुवांशिक, आत्मसम्मान कम मिलना और निराशावादी होना भी अवसाद का कारण है।

#अवसाद का #ज्योतिषिय संबंध- अब हम इन सभी पहलूओ को ज्योतिषिय दृष्टिकोण से समझते है कि किन ग्रहों की वज़ह से हम कुंडली मे अवसाद के योग को समझ सकते है। जिससे व्यक्ति के मन की स्थिति, व्यवहार और बाहरी स्वरुप का पता चलता है। हम मानसिक रुप से कमज़ोर होने पर अवसाद महसूस करते है जिसमे सबसे सौम्य ग्रह चंद्रमा का राहु-केतु, शनि और अन्य कारणो से पीडा मे होना महत्वपूर्ण है।

चंद्रमा के कमज़ोर होने पर जीवन मे बाधाओ या असफलताओ की स्थिति उत्पन्न होती है और व्यक्ति इन सबसे हार कर मानसिक अवसाद का शिकार होने लगता है। चंद्रमा का इन सबमे किसी के प्रभाव मे होना व्यक्ति का मानसिक स्वास्थ्य कमज़ोर बनाता है, जिसका समय दशा के माध्यम से एक अच्छा ज्योतिष समझा सकता है और जो समय से पहले उस नकारात्मकता से लडने का उपाय भी बता सकता है। चंद्रमा मन का कारक है जिसमे राहु भ्रम व अशांति, केतु असंतोष व भटकाव और शनि वैराग्य, नकारात्मकता, दुख और तनाव लाता है। जन्मकुंडली मे चंद्रमा का छठे, आंठवे या बारहवे भाव मे होना या यहां का स्वामी होना, चंद्रमा का पाप प्रभाव मे होना, चंद्रमा का नीच मे होना भी अवसाद के ही योग है।

कुंडली के चतुर्थ भाव को सुख का घर कहा जाता है यह भाव पीडित हो तो तब भी सुख मे कमी रहती है। पंचम भाव मानसिकता से जुडा भाव है यह भाव/भावेश पीडा मे हो तो भी मानसिक तनाव के कारण अवसाद रहता है। प्रथम भाव/भावेश मस्तिष्क का परिचायक है इस का भी मज़बूत होना और #नकारात्मकता से दूर होना बहुत आवशयक है। #अवसाद का निदान- आज के समय मे 80% से 90% व्यक्ति अपने अवदास का इलाज कर राहत प्राप्त सकते है। सबसे पहले अपने किसी खास को अपने मन की बात कहने की कोशिश करे और नकारात्मक सोच हटाये की हमारा कोई नही है, अपने दोस्तो के साथ अधिक से अधिक समय बिताये और खुद को किसी न किसी कार्य मे व्यस्त रखे।

अगर कोई नही मिलता है तो अकेलेपन को अपने से दूर करे और दूसरो मे कमी न निकाले, संगीत सूने, खुशबु जैसे वातावरण मे रहे, अपने मन की बात लिखे, घूमने जाये और अपनी रुचियों को बढाये। ऐसे जातक को चांदी के गिलास मे पानी पीना चाहिए या रुद्राक्ष और चांदी की चैन गले मे धारण करनी चाहिए। ज्ञान मुद्रा बना कर भगवान शिव के मंत्रो का जाप करे और उनकी आराधना करनी चाहिए। अपनी माता और माता समान सभी स्त्रियो का सम्मान करना चाहिए। नियमित रुप से अनुलोम-विलोम, प्रणायाम और सुबह शुद्ध-स्वच्छ हवा मे सैर करे।

शराब और धुम्रपान का सेवन नही करे और संतुलित आहार ले। अगर आप भी इस तरह के किसी अवसाद से ग्रस्त है, खुद को अकेला महसूस करते है, माईग्रेन या सिर मे दर्द का अनुभव करते है, जीवन मे सब कुछ होने पर भी सूकुन का अनुभव नही कर पा रहे है, जीवन से निराश हो चुके है, हमेशा नकारात्मकता या कोई डर लगता है तो आप हमसे सम्पर्क कर सकते है हम आपकी कुंडली के नकारात्मक ग्रहो को उपायो द्वारा दूर कर सकते है। 


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आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताआलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।राम।

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