Deepika Maheshwari
29th Aug 2019ज्योतिषशास्त्र में जातकों के भाग्योदय का कारण जातक की जन्मकुंडली में शुभाशुभ योगों का होना होता है। ऐसे बहुत सारे योग हैं जो किसी विशेष क्षेत्र में जातक को सफलता दिलाते हैं या फिर जातक के जीवन के किसी महत्वपूर्ण पहलू में कब क्या बदलाव होंगे या जातक कैसा जीवन व्यतीत करेगा इसकी संभावना जताते हैं। इन्हीं योगों में एक ऐसा योग भी होता है जो जातक की आर्थिक स्थिति को मजबूत करता ही है साथ ही उसकी बुद्धि, क्षमता और शक्ति में भी वृद्धि करता है। उच्च पदस्थ अधिकारी से लेकर व्यापारी तक और नेता से लेकर अभिनेता तक बनने के योग बनाता है। इस योग को कहा जाता है गजकेसरी योग। अपने इस लेख में हम इसी की बात करेंगें। क्या है गजकेसरी योग? गजकेसरी योग एक बहुत ही शुभ योग माना जाता है। यह प्रमुख धन योगों में से एक होता है जो गुरु और चंद्र के योग से बनता है। जातक की कुंडली के किसी भी भाव में गुरु व चंद्रमा की युति हो और किसी पाप ग्रह की दृष्टि उन पर न पड़ रही हो या कोई पाप ग्रह उनके साथ न हो तो यह योग बहुत शुभफलदायी माना जाता है। कैसे बनता है कुंडली में गजकेसरी योग गजकेसरी योग का निर्माण गुरु और चंद्रमा की युति से होता है। या फिर केंद्र में गुरु और चंद्रमा एक दूसरे को देख रहे हों तो भी गजकेसरी योग का निर्माण होता है। प्रबल या कहें प्रभावकारी गजकेसरी योग का निर्माण गुरु की चंद्रमा पर पांचवी या नवीं दृष्टि से भी बनता है। यदि गुरु और चंद्रमा कर्क राशि में एक साथ हों और कोई अशुभ ग्रह इन्हें न देख रहा हो तो ऐसे में यह बहुत ही सौभाग्यशाली गजकेसरी योग बनाते हैं। इसका कारण यह भी है कि गुरु को कर्क राशि में उच्च का माना जाता है और चंद्रमा कर्क राशि के स्वामी होने से स्वराशि के होते हैं। प्रथम, चतुर्थ, सप्तम और दशम स्थान को केंद्र माना जाता है यदि शुभ भाव में केंद्र में गजकेसरी योग बन रहा हो तो यह भी शुभ फल देने वाला होता है इसके अलावा त्रिकोण में पांचवे या नौंवे भाव में भी गजकेसरी योग शुभ होता है। यदि छठे, आठवें या द्वादश भाव में यह योग न हो और गुरु की राशि मीन या धनु अथवा शुक्र की राशइ वृष में बन रहा हो तो लाभ देने वाला रहता है। छठे, आठवें या बारहवें भाव में यह योग बन रहा हो तो बहुत कम प्रभावी होता है। चंद्रमा या गुरु की नीच राशि में यह योग बन रहा हो तो उसमें भी इस योग से मिलने वाले परिणाम नहीं मिलता यानि यह निष्फल रहता है। यदि नीच दोष भंग हो रहा हो तो ऐसे में इस योग के शुभ फल देने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
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anshmaheshwari nice article