शारीरिक हाव भाव और मानव का स्वभाव और प्रवृत्ति

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शारीरिक हाव भाव और मानव का स्वभाव और प्रवृत्ति

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Upasana Siag 05th Jun 2020

अक्सर कहा जाता है कि  सच या झूठ इन्सान के चेहरे से नहीं पहचाना  जा सकता है।  किसी के चेहरे पर तो लिखा नहीं होता कि वह कैसा इन्सान है। लेकिन मशहूर ज्योतिष पवन सिन्हा के अनुसार हर इन्सान को थोड़ा ज्योतिष , थोड़ा आयुर्वेद और थोड़ा मनोविज्ञान तो आना ही चाहिए।  मेरे विचार में ज्योतिष और आयुर्वेद का तो जब तक पूर्ण  ज्ञान ना हो नहीं आजमाना चाहिए। कभी -कभी अधूरा ज्ञान ' नीम -हकीम ' खतरा -ए -जान ' वाली  जाती है।  जहाँ तक मनोविज्ञान की बात है , यह तो हर इंसान को थोडा बहुत समझना ही चाहिए। क्यूंकि हर इन्सान के हाव -भाव बोलते है। बात तो सिर्फ समझने की है। कभी फुर्सत मिले तो छत पर खड़े हो कर या खिड़की से या फिर घर के बाहर बैठ कर आते -जाते लोगों पर नज़र डालिए। हर इन्सान की चाल - ढाल , लोगों से बात करने का , देखने का तरीका अलग होगा। फोन पर आवाज़ सुन कर और लिखावट से भी इन्सान की पहचान हो सकती हैं।        यहाँ मैं मेरे इस लेख में सिर्फ शारीरिक हाव -भाव से इन्सान का स्वभाव बताने की कोशिश करुँगी।  लेकिन यहाँ मेरा किसी को आहत करने की मंशा नहीं है। सबसे पहले नमस्ते करने के अंदाज़ से जानते हैं के  सामने वाले इन्सान की प्रवृति  क्या है।  सबसे पहले किसी से  मिलेंगे तो अभिवादन  ही करेंगे।

1.  अगर सामने वाला /वाली दूर से अपनी कुहनियों को मिलाते हुए हाथ जोड़ कर थोड़े से आगे की  तरफ झुक कर और हाथ भी थोड़े बाहर की और निकलें हों और जबरन मुस्कुराते हुए आपकी तरफ आये तो जान  लीजिये कि वह इन्सान बहुत राजनीति कुशल है।  आप नेताओं को देख सकते हैं ऐसा करते हुए। अपना काम तो आपसे निकाल कर ही छोड़ेगा /छोड़ेगी। आप उसकी  ही चले जायेंगे।

2 . कोई आपसे  आपके सामने खड़े हो कर दोनों हाथ जोड़ कर सीने के पास ले जा कर हलके से झुक कर नमस्ते करता /करती है तो वह इन्सान धार्मिक , थोडा डरपोक लेकिन मन का साफ होता /होती है।

3 . अगर कोई अपने शरीर को कमर से झुका कर लम्बे हाथ जोड़ता ( कुहनियों को भी मिला कर ) तो जान जाइये की सामने वाला खुशामद पसंद है। आपको चने के झाड़ पर चढाता जायेगा आपकी तारीफें कर -कर के लेकिन दिल में उतनी ही बड़ी कैंची रखेगा /रखेगी आपके लिए। पीठ  बुराई करने से भी नहीं चूकेगा।

4 . अब कोई -कोई ना हाथ जोड़ता है ना ही मुहं से नमस्ते बोलता है सिर्फ सर को हल्का सा झुक कर या झटका दे कर नमस्ते जैसे होठ ही हिला  देगा तो क्या वह घमंडी है ! नहीं ऐसा नहीं है।  वह इन्सान दिल का अच्छा लेकिन संकोची होता /होती है।

5.  कई लोग दोनों हाथ जोड़ कर  अपने सर तक ले जा कर नमस्ते करते हैं वे लोग छुपे रुस्तम होते हैं।  यहाँ हम ढोंगी बाबाओं का उदाहरन  दे सकते हैं।

6. कुछ लोग दोनों हथेलियों को धप से बजाते हुए  जोर से बोलते हुए नमस्ते बोलते हैं।  वे अनगढ़ तरीके के होते हैं उनको  नहीं पता होता कि किस से  क्या बात  कहनी है लेकिन मन के साफ होते हैं।  अब नमस्ते तो हो गया। इसके बाद हाथ भी मिलाते हैं कुछ लोग।  सबका अपना अलग अंदाज़ और तरीका होता है। यहाँ भी इन्सान की प्रवृत्ति झलकती है।

1 . जो लोग हाथ मिलाते तो हैं पर छोड़ते  नहीं। कुछ देर तक थाम कर बातें करेंगे। वे लोग भावनात्मक रूप से कमजोर होते हैं। मन की कहना तो चाहते है लेकिन  नहीं पाते। उनको एक दोस्त की तलाश होती है जिसे वह अपना हमराज़  लेकिन संदेह की आदत ऐसा करने नहीं देती।

2 . कई लोग हाथ मिलाकर अपना दूसरा हाथ भी हाथ पर रख देतें है।  ऐसे लोग बहुत आत्मीय किस्म के होते है।  मिलनसार और  दयालु भी होते हैं। चाहे कम बोले लेकिन आपको धोखा कभी नहीं  देंगे। 3 . कई लोग बहुत गर्मजोशी से हाथ मिलायेंगे और कई देर कर  आपका हाथ हिला डालेंगे। ऐसे लोग बहुत खुशमिजाज होते है। खुद भी खुश रहते है दूसरों को भी खुश ही  देखना चाहते हैं।

4 . कुछ लोग जैसे हाथ को छू भर देंगे बस और आगे बढ़ कर बैठने का उपक्रम करेंगे।  ऐसे लोग दुनियादारी से भरपूर होते है। ना काहू से दोस्ती और ना काहू से बैर वाली बात होती ऐसे लोगों में। 5 . कुछ लोग हाथ आपसे मिलायेंगे देखेंगे दूसरी तरफ यानि एक साथ कई लोगों से मुलाक़ात के आकांक्षी होते हैं।  ये लोग विश्वसनीय नहीं कहे जा सकते यानि राजनीति में पारंगत होते हैं।  हाथ  मिलाना भी हो गया।  अब आपके पास बैठ कर बात चीत हो रही तो यह भी जानिए की बातों के करने के अंदाज़ से क्या प्रवृति झलकती है।अगर ज्यादा  नहीं जान सकते हैं तो भी  कुछ तो  ऐसी हरकतें होती है जिनसे हम  वाले  बैठे इन्सान के मनोभावों को ताड़ सकते है। 1. जैसे कोई  नज़र मिला कर बात भी कर रहा/रही  हो और झूठ भी बोल रहा हो तो ध्यान दीजिये कि जब वह बात कर रहा /रही हो तो अपना एक पैर जमीन  घिसटते हुए अंदर ( कुर्सी या जहाँ भी वह बैठा /बैठी  हो )की तरफ ले जायेगा।

2.अक्सर हम सोचते  हैं कि  कोई इन्सान  नज़र मिला बात नहीं करता तो  वह झूठा ही होगा।  लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता। वह इन्सान संकोची भी  सकता है।  साथ बैठा हुआ इन्सान  बात करते हुए अगर  दोनों हथेली रगड़ता है तो उसके मन में कुछ और चल रहा होता है। 3. अगर कोई बात करते हुए  चीज़  पेपर वेट या पेन आदि कोई अन्य वस्तु अपने  हाथ में ले कर आपसे बात करता है तो वह आपसे लम्बे समय तक रिश्ता  रखना चाहता है। 4.अब आखिर में एक बात और विशेषकर महिलाओं के  लिए , अगर आप किसी से मिलने जाते हैं और सामने बैठा आपका मित्र  ही अपना हाथ घुटनों से उपर की तरफ लेजाता है तो वह आपसे मित्रता से अधिक शारीरिक सम्पर्क रखने में ज्यादा रूचि रखता है। यह मेरा अपना बहुत ही बारीक और सामान्य विश्लेष्ण है लेकिन हम अगर जान पायें तो सावधानी रख सकते हैं और इन्सान की पहचान भी कर सकते हैं। ( ॐ शांति )


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आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताआलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।राम।

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