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इस नवरात्रि यदि करने जा रहे हैं दुर्गा सप्तसती का पाठ तो ध्यान रखें इन बातों का !

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Deepika Maheshwari 29th Sep 2019

हिन्दू धर्म में देवी माँ की उपासना के लिए नवरात्रि के नौ दिनों को बेहद ख़ास माना जाता है। इस दौरान लोग देवी माँ का आशीर्वाद पाने के लिए अपने-अपने घरों में उनकी प्रतिमा स्थापित करते हैं और साथ ही साथ कलश स्थापित करते हैं। जिन-जिन घरों में कलश स्थापित की जाती है उन घरों में परिवार के सदस्य नित्य नियमपूर्वक दुर्गासप्तसती का पाठ भी करते हैं। आज हम आपको विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तसती का पाठ करते वक़्त ध्यान रखने वाली कुछ ख़ास बातों के बारे में बताने जा रहे हैं। आइये जानते हैं इस दौरान आपको किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। दुर्गा सप्तसती पाठ का महत्व  दुर्गा माँ की उपासन के लिए खासतौर से दुर्गा सप्तसती का पाठ करना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि, नवरात्रि के दौरान यदि रोजाना विधि पूर्वक दुर्गा सप्तसती का पाठ किया जाए तो इससे व्यक्ति के सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। बता दें कि, हिन्दू धर्म में दुर्गा सप्तसती ग्रन्थ को अन्य चार वेदों के सामान ही एक महत्वपूर्ण ग्रंथ माना गया है। कहते हैं कि, शारदीय नवरात्रि के दौरान विशेष रूप से दुर्गा माँ के सभी रूपों का वर्णन करने वाले इस ग्रंथ को यदि नियमपूर्वक पढ़ा जाए तो इससे देवी माँ प्रसन्न होती हैं और मनमाफिक आशीर्वाद देती हैं।  दुर्गा सप्तसती पाठ के दौरान इन बातों का रखें ख़ास ख्याल  दुर्गा सप्तसती ग्रंथ का पाठ शुरू करने से पहले एक लाल रंग का कपड़ा बिछाये और उसके ऊपर इस किताब को रखें।  पाठ शुरू करने से पहले गणेश जी की पूजा करें और उसके बाद स्थापित कलश की पूजा करें। इसके साथ ही साथ आप अपनी श्रद्धानुसार नवग्रह पूजा और ज्योति पूजा भी कर सकते हैं।  अब अपने माथे पर चंदन या कुमकुम से तिलक करें पूर्वदिशा की तरफ मुँह करके चार बार आचमन करें। पाठ शुरू करने से पहले शापोद्वार करना ना भूलें।  यूँ तो दुर्गा सप्तसती का पाठ एक दिन में पूरा करना शुभ माना जाता है लेकिन यदि आप एक दिन में पूरा ना करे सकें तो एक दिन सिर्फ माध्यम चरित्र का पाठ करें और अगले दिन अन्य अध्याय का पाठ करें। इस प्रकार से सात दिनों के भीतर दुर्गा सप्तसती का पाठ जरूर पूरी कर लें।  बता दें कि, दुर्गा सप्तसती पाठ के दौरान श्रीदेव्यथर्वशीर्षम का पाठ करना अनिवार्य माना जाता है। इसके पाठ से व्यक्ति को मृत्यु पर विजय मिलती है और जीवन में खुशियों का आगमन होता है।  इस ग्रंथ पाठ शुरू और अंत करने पर “ॐ ऐं हीं क्लीं चामुण्डाये विच्चे” मंत्र का जाप करना अनिवार्य माना जाता है।  दुर्गा सप्तसती पाठ के दौरान जिस बात का ध्यान विशेष रूप से रखना चाहिए वो है उच्चारण। इसलिए कहा जाता है की यदि आप संस्कृत में पाठ ना कर पाएं तो हिंदी में करें।  नवरात्रि के दौरान प्रतिदिन दुर्गा सप्तसती का पाठ करने के बाद विशेष रूप से कुंवारी कन्याओं को भोजन अवश्य करवाना चाहिए।


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