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ज्योतिष और राजनितिक योग

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Deepika Maheshwari 05th Oct 2019

कोई व्यक्ति सफल राजनीतिज्ञ बनेगा या नहीं यह बहुत कुछ उसके जन्म ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करता है। अन्य व्यवसायों की भांति ही राजनीति में प्रवेश करने वालों की कुंडली में भी ज्योतिषीय योग होते हैं। नीति कारक ग्रह राहू, सत्ता का कारक सूर्य, न्याय-प्रिय ग्रह गुरु, जनता का हितैषी शनि और नेतृत्व का कारक मंगल जब राज्य-सत्ता के कारक दशम भाव, दशम से दशम सप्तम भाव, जनता की सेवा के छठे भाव, लाभ एवं भाग्य स्थान से शुभ संबंध बनाएं तो व्यक्ति सफल राजनीतिज्ञ बनता है। राहू की भूमिका होती है खास राजनीति में राहू का महत्वपूर्ण स्थान है। इसे सभी ग्रहों में नीतिकारक ग्रह का दर्जा प्राप्त है। राहू के शुभ प्रभाव से ही नीतियों के निर्माण व उन्हें लागू करने की क्षमता व्यक्ति में आती है। राजनीति के घर (दशम भाव) से राहू का संबंध बने तो राजनेता में स्थिति के अनुसार बोलने की योग्यता आती है। सफल राजनेताओं की कुंडली में राहू का संबंध छठे, सातवें, दसवें व ग्यारहवें भाव से देखा गया है। छठे भाव को सेवा का भाव कहते हैं। व्यक्ति में सेवा भाव के लिए इस भाव में दशम या दशमेश का संबंध होना चाहिए। ये योग हैं आवश्यक योग जन्म कुंडली के दसवें घर को राजनीति का घर कहते हैं। सत्ता में भाग लेने के लिए दशमेश और दशम भाव का मजबूत स्थिति में होना आवश्यक है। दशम भाव में उच्च मूल त्रिकोण या स्वराशिस्थ ग्रह के बैठने से व्यक्ति को राजनीति के क्षेत्र में बल मिलता है। गुरु नवम भाव में शुभ प्रभाव में स्थित हो और दशम घर व दशमेश का संबंध सप्तम भाव से हो तो व्यक्ति राजनीति में सफल होता है। सूर्य राज्य का कारक ग्रह है अत: यदि यह दशम भाव में स्वराशि या उच्च राशि में होकर स्थित हो और राहू छठे, दशवें व ग्यारहवें भाव से संबंध बनाए तो राजनीति में सफलता की प्रबल संभावना बनती है। इस योग में वाणी के कारक ग्रह का प्रभाव आने से व्यक्ति अच्छा वक्ता बनता है। शनि दशम भाव में हो या दशमेश से संबंध बनाए और इसी दशम भाव में मंगल भी स्थित हो तो व्यक्ति समाज के लोगों के हितों के लिए राजनीति में आता है। शनि और मंगल का संबंध व्यक्ति को राजनेता बनने के गुण प्रदान करेगा और समाज में मान-सम्मान तथा उच्च पद की प्राप्ति होती है। जन्म लग्र से राजनीति के योग मेष लग्न में प्रथम भाव में सूर्य, दशम में मंगल व शनि व दूसरे भाव में राहू हों तो जनता का हितैषी राजनेता बनेगा। वृष- दशम भाव का राहू राजनीति में प्रवेश दिलाता है। राहू के साथ शुक्र भी हो तो राजनीति में प्रखरता आती है। मिथुन- शनि नवम में तथा सूर्य, बुध लाभ भाव में हों तो व्यक्ति प्रसिद्धि पाता है। राहू सप्तम में तथा सूर्य 4, 7 या 10वें भाव में हो तो प्रखर व्यक्तित्व तथा विरोधियों में धाक जमाने वाला राजनेता बनता है। कर्क- शनि लग्र में, दशमेश मंगल दूसरे भाव में, राहू छठे भाव में तथा सूर्य बुध पंचम या ग्यारहवें भाव में चंद्रमा से दृष्ट हों तो राजनीति में यश मिलता है। सिंह- सूर्य,चंद्र, बुध व गुरु धन भाव में हों, मंगल छठे, राहू बारहवें भाव में तथा शनि ग्यारहवें घर में हों तो व्यक्ति को राजनीति विरासत में मिलती है। यह योग व्यक्ति को लंबे समय तक शासन में रखता है। कन्या- दशम भाव में बुध का संबंध सूर्य से हो, राहू, गुरु, शनि लग्र में हों तो व्यक्ति राजनीति में रुचि लेगा। तुला लग्न-चंद्र, शनि चतुर्थ भाव में हों तो व्यक्ति वाकपटु होता है। सूर्य सप्तम में, गुरु आठवें, शनि नौवें तथा मंगल बुध ग्यारहवें भाव में हों तो राजनीति में अपार सफलता पाता है। वृश्चिक- लग्रेश मंगल बारहवें भाव में गुरु से दृष्ट, शनि लाभ भाव में, चंद्र-राहू चौथे भाव में, शुक्र सप्तम में तथा सूर्य ग्यारहवें घर के स्वामी के साथ शुभ भाव में हों तो व्यक्ति प्रखर नेता बनता है। धनु- चतुर्थ भाव में सूर्य, बुध, शुक्र हों तो जातक तकनीकी सोच के साथ राजनीति करता है। मकर-राहू चौथे भाव में तथा नीचगत बुध उच्चगत शुक्र के साथ तीसरे भाव में हों तो नीचभंग राजयोग से व्यक्ति राजनीति में दक्ष होता है। कुंभ - लग्र में सूर्य-शुक्र हों तथा दशम में राहू हो तो राहू तथा गुरु की दशा में राजनीति में सफलता मिलती है। मीन- चंद्र, शनि लग्र में, मंगल ग्यारहवें तथा शुक्र छठे भाव में हों तो शुक्र की दशा में राजनीतिक लाभ तथा श्रेष्ठ धन लाभ होता है।


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