रक्षाबंधन का पर्व, कैसे मनाएं रक्षाबंधन का त्योहार -जानें राखी बांधने की विधि और महत्व

Share

Deepika Maheshwari 02nd Aug 2020

रक्षाबंधन पर बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए उत्सुक हैं इस बार 3 अगस्त (सोमवार) को राखी का त्योहार मनाया जाएगा. ये त्योहार श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।

श्रावण में मनाए जाने के कारण इसे श्रावणी भी कहते हैं। इस पावन घड़ी का इंतज़ार हर बहन को रहता है, जब वो अपने भाई की सूनी कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र की दुआएं मांगती है। बहन भाई की कलाई पर राखी बांधकर उससे अपनी रक्षा का वचन लेती है।

रक्षाबंधन के दिन दान का विशेष महत्व माना जाता है। आज के दिन रक्षा का दायित्व लेते हुए ढ़ेर सारी शुभकामनाओं के साथ रक्षाबंधन का त्योहार मनाना चाहिए।

रक्षाबंधन 2020 शुभ मुहूर्त और समय

रक्षाबंधन 2020

3 अगस्त, सोमवार 

राखी बांधने का मुहूर्त

09:27:30 से 21:17:03 तक

अवधि

11 घंटे 49 मिनट

रक्षा बंधन अपराह्न मुहूर्त

13:47:39 से 16:28:56 तक

रक्षा बंधन प्रदोष मुहूर्त

19:10:14 से 21:17:03 तक

रक्षाबंधन मनाने की सही विधि------- -रक्षाबंधन के दिन सुबह भोर में उठकर स्नान आदि कर स्वच्छ कपड़े पहनें. -इसके बाद पूजा घर की अच्छे से सफाई करें. -फिर चावल, कच्चे सूत का कपड़ा, सरसों, रोली को एक साथ मिलाकर, पूजा की थाली तैयार करें.

• थाल में रोली, चंदन, अक्षत, दही, रक्षा सूत्र और मिठाई रखें.

• घी का एक दीपक भी रखें, जिससे भाई की आरती करें.

• रक्षा सूत्र और पूजा की थाल सबसे पहले भगवान को समर्पित करें.

• इसके बाद भाई को पूर्व या उत्तर की तरफ मुंह करवाकर बैठाएं

• पहले भाई को तिलक लगाएं, फिर रक्षा सूत्र बांधें और फिर आरती करें दाहिने हाथ पर रक्षा सूत्र बांधें. इसके साथ ही ध्यान रहे कि भाई को तिलक लगाते समय, बहन का मुख भी पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए.

रक्षा सूत्र बांधते समय इस मंत्र का पाठ करना चाहिए- येन बद्धो बलिर्राजा दानवेन्द्रो महाबल:। तेन त्वामभिवध्नामि रक्षे मा चल मा चल:। -इसके पश्चात भाई की आरती उतारें और उसे मिठाई खिलाएं.

• इसके बाद मिठाई खिलाकर भाई की मंगल कामना करें.

• रक्षासूत्र बांधने के समय भाई तथा बहन का सर खुला नहीं होना चाहिए.

• रक्षासूत्र बंधवाने के बाद माता-पिता और गुरु का आशीर्वाद लें, इसके बाद बहन को सामर्थ्य के अनुसार उपहार दें.

• उपहार मैं ऐसी वस्तुएं दें, जो दोनों के लिए मंगलकारी हो, काले वस्त्र तथा तीखा या नमकीन खाद्य न दें.

कैसी होनी चाहिए रक्षासूत्र या राखी?

• रक्षासूत्र तीन धागों का होना चाहिए। • लाल पीला और सफेद। • अन्यथा लाल और पीला धागा तो होना ही चाहिए।

• रक्षासूत्र में चंदन लगा हो तो बेहद शुभ होगा। • कुछ न होने पर कलावा भी श्रद्धा पूर्वक बांध सकते हैं।


Like (79)

Comments

Post

very good


anshmaheshwari

Radhey Radhey


VishwajeetBhutra

good article.vishwajeet bhutra


disha m

happy rakhi


disha m

happy rakshabandhan


Latest Posts

*वसंत नवरात्र 13 अप्रैल से 21 अप्रैल 2021 तक* चैत्र नवरात्रि घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 13 अप्रैल दिन मंगलवार प्रातः 5:30 से 10:15 तक। अभिजीत मुहूर्त 11:56 से दोपहर 12: 47 तक होगा। 13 अप्रैल से नव संवत्सर भारतीय नववर्ष की शुरुआत भी होगी। क्रमश: नवरात्र 13 अप्रैल प्रतिपदा ,शैलपुत्री। 14 अप्रैल द्वितीया, ब्रह्मचारिणी। 15 अप्रैल तृतीया, चंद्रघंटा। 16 अप्रैल चतुर्थी ,कुष्मांडा। 17 अप्रैल पंचमी, स्कंदमाता। 18 अप्रैल षष्ठी, कात्यायनी। 19 अप्रैल सप्तमी, कालरात्रि। 20 अप्रैल अष्टमी, महागौरी। 21 अप्रैल नवमी, सिद्धिदात्री मां का पूजन होता है। ज्योतिषाचार्य अजय शास्त्री के अनुसार दुर्गा सप्तशती नारायण अवतार श्री व्यास जी द्वारा रचित महापुराणों में मार्कंडेय पुराण से ली गई है। इसमें 700 श्लोक व 13 अध्यायों का समावेश होने के कारण इसे सप्तशती का नाम दिया गया है। तंत्र शास्त्रों में इसका सर्वाधिक महत्व प्रतिपादित है और तांत्रिक क्रियाओं का इसके पाठ में बहुत उपयोग होता है। दुर्गा सप्तशती में 360 शक्तियों का वर्णन है। ज्योतिषाचार्य ने बताया है कि शक्ति पूजन के साथ भैरव पूजन भी अनिवार्य है। दुर्गासप्तशती का हर मंत्र ब्रह्मवशिष्ठ विश्वामित्र ने शापित किया है। शापोद्धार के बिना पाठ का फल नहीं मिलता दुर्गा सप्तशती के 6 अंगों सहित पाठ करना चाहिए कवच, अर्गला, कीलक और तीनों रहस्य महाकाली महालक्ष्मी महासरस्वती का रहस्य बताया गया है। नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती की चरित्र का क्रमानुसार पाठ करने से शत्रु नाश और लक्ष्मी की प्राप्ति व सर्वदा विजय होती है।

यस्मिन् जीवति जीवन्ति बहव: स तु जीवति | काकोऽपि किं न कुरूते चञ्च्वा स्वोदरपूरणम् || If the 'living' of a person results in 'living' of many other persons, only then consider that person to have really 'lived'. Look even the crow fill it's own stomach by it's beak!! (There is nothing great in working for our own survival) I am not finding any proper adjective to describe how good this suBAshit is! The suBAshitkAr has hit at very basic question. What are all the humans doing ultimately? Working to feed themselves (and their family). So even a bird like crow does this! Infact there need not be any more explanation to tell what this suBAshit implies! Just the suBAshit is sufficient!! *जिसके जीने से कई लोग जीते हैं, वह जीया कहलाता है, अन्यथा क्या कौआ भी चोंच से अपना पेट नहीं भरता* ? *अर्थात- व्यक्ति का जीवन तभी सार्थक है जब उसके जीवन से अन्य लोगों को भी अपने जीवन का आधार मिल सके। अन्यथा तो कौवा भी भी अपना उदर पोषण करके जीवन पूर्ण कर ही लेता है।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।

न भारतीयो नववत्सरोSयं तथापि सर्वस्य शिवप्रद: स्यात् । यतो धरित्री निखिलैव माता तत: कुटुम्बायितमेव विश्वम् ।। *यद्यपि यह नव वर्ष भारतीय नहीं है। तथापि सबके लिए कल्याणप्रद हो ; क्योंकि सम्पूर्ण धरा माता ही है।*- ”माता भूमि: पुत्रोSहं पृथिव्या:” *अत एव पृथ्वी के पुत्र होने के कारण समग्र विश्व ही कुटुम्बस्वरूप है।* पाश्चातनववर्षस्यहार्दिकाःशुभाशयाः समेषां कृते ।। ------------------------------------- स्वत्यस्तु ते कुशल्मस्तु चिरयुरस्तु॥ विद्या विवेक कृति कौशल सिद्धिरस्तु ॥ ऐश्वर्यमस्तु बलमस्तु राष्ट्रभक्ति सदास्तु॥ वन्शः सदैव भवता हि सुदिप्तोस्तु ॥ *आप सभी सदैव आनंद और, कुशल से रहे तथा दीर्घ आयु प्राप्त करें*... *विद्या, विवेक तथा कार्यकुशलता में सिद्धि प्राप्त करें,* ऐश्वर्य व बल को प्राप्त करें तथा राष्ट्र भक्ति भी सदा बनी रहे, आपका वंश सदैव तेजस्वी बना रहे.. *अंग्रेजी नव् वर्ष आगमन की पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं* ज्योतिषाचार्य बृजेश कुमार शास्त्री

आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताआलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।राम।

Top