राहु केतु कितने शुभ कितने अशुभ

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राहु केतु कितने शुभ कितने अशुभ

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Astro Manish Tripathi 27th Jun 2020

🌹🌹 राहू-केतु :---- (कितने शुभ कितने अशुभ) राहू और केतु जन्म कुंडली में एक मात्र ऐसे ग्रह हैं जो स्थिति विशेष में अपनी दशा - अन्तरदशा में जन्म कुंडली के सभी 12 भावों के परिणाम भी दे सकते है ....!! 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 🌹भारतीय ज्योतिष शास्त्र में राहु और केतु के अपनी दशा - अंतरदशा में परिणाम देने के बहुत ही विशेष नियम होते है और वे उसी नियम के अनुसार परिणाम देते हैं.....!! 🎈 इसीलिए राहू और केतु अपनी एक ही दशा -अंतरदशा में शुभ तथा अशुभ दोनो परिणाम भी दे सकते है । 🎈 राहू - केतु की दशा में एक ग्रह की अंतरदशा ( भुक्ति ) अशुभ वही दूसरी अंतरदशा ( भुक्ति) शुभ भी हो सकती है ....!! 🎈 इसी प्रकार किसी भी ग्रह की दशा में राहू केतु की अंतरदशा शुभ हो सकते हैं वहीं अन्य दूसरे ग्रह की दशा के साथ राहू केतु की अंतरदशा अशुभ हो सकती है ....!! 🌹🌹 इस दुनियाँ में जितने भी सफल व्यक्ति है जिन्होंने फर्श से अर्श का सफर बहुत ही कम समय में पूरा किया है उन सभी के पीछे कारण राहु और केतु की शुभता का ही होता है....!! 💚💛 और जितने भी सफल नाम जो रातों रात गुमनाम हो जाते है उनका कारण भी राहु और केतु की अशुभता ही होती है ....! 🌹🌹 राहु और केतु ही ऐसे ग्रह है जो व्यक्ति को जीवन में वह सभी कुछ दे सकते हैं जिसके बारे में कोई भी व्यक्ति सिर्फ सपने में ही सोच सकता है.......!! और वह सभी कुछ छीन भी सकते है जिसके बारे में कोई भी कभी भी सोचना भी नही चाहता ....!! (01) 🌹 एक भ्रांति राहू और केतु को लेकर हमेशा यह पैदा की जाती है कि इनका समय हमेशा कष्टप्रद होता है । व्यक्ति इनकी दशा अंतरदशा के समय में बहुत सारी समस्याएँ तथा कठिनाइयां झेलता है । 🌹 जी नहीं ये बिल्कुल भी जरूरी नहीं .....!! 💝 जितने भी सफल व्यक्ति है चाहे राजनेता हों , व्यवसायी हों , खिलाड़ी हों , फ़िल्म स्टार्स हों या पेशेवर लोग हो जिन्होंने बहुत ही कम समय मे विस्फोटक सफलता पाई है वे सभी निश्चत ही राहू - केतु की शुभता का ही परिणाम है ....! (02) 🌹 एक राहू - केतु की जन्म कुंडली मे स्थिति को लेकर बहुत भ्रमित धारणा है कि वे किसी विशेष भाव मे स्थित होने पर ही शुभ फल देते है .....!! 💚 राहु और केतु जन्म कुंडली के किसी भी भाव मे बैठकर शुभ परिणाम दे सकते है और किसी भी भाव में बैठकर अशुभ ... !! 1 ,2 ,4 , 7 , 8, 12 भाव में बैठे राहु या केतु किसी भी व्यक्ति को सफलता की पराकाष्ठा पर ले जा सकते हैं और वहीं केंद्र त्रिकोण में बैठे या इन भावो से संबंधित होने के बाद भी कई कई परेशानियां दे सकते हैं........!! (03) 🌹 एक बहुत ही बड़ी भ्रांति है इनसे बनने वाले दोषों को लेकर फैलाई जाती है......!! 🎈 सबसे ज्यादा डर इन्ही दोषों को लेकर दिखाया जाता है । 👹👹 काल सर्प दोष ,चांडाल दोष , पितृ दोष और ग्रहण योग सबसे ज्यादा चलने वाले योग/दोष हैं । 🎈 जब भी किसी जातक के जीवन में कभी भी कोई समस्या आती है या असफलता अथवा कठिनाइयां आती हैं तो कारण इन्हीं दोषो का माना जाता है ......!! 💗 हम आपको बता दें कि इन दोषो/योगों से निर्मित व्यक्ति भी उतने ही सफल होते है जितने किसी भी अन्य शुभ योगों से निर्मित जातक ....!! 💚 ध्यान रहे जीवन में समस्याओं के बहुत सारे कारण होे सकते हैं .....!! 🎈 जन्म कुण्डली में राहू - केतु के अतिरिक्त सात ग्रह और भी होते हैं जो शुभता / अशुभता में अपना महत्त्व और प्रभाव भी रखते हैं ......! 🎈 परेशानियां , कठिनाइयां , और समस्याएं तो उन लोगों के भी जीवन में आती हैं जिनकी कुण्डली में बहुत से शुभ योग होते हैं, पंच महापुरुष योग होते हैं या 5 ग्रह अपनी स्व तथा उच्च राशि मे स्थित होकर केंद्र या त्रिकोण में स्थित होते हैं.....!! 🎈 जन्म पत्रिका में बनने वाले कोई भी शुभ योग अथवा अशुभ योग/दोष किसी भी सफलता तथा समस्या के कारण कभी नहीं होते ..... !! 💚 ये सिर्फ स्थितियाँ है अंतिम परिणाम नहीं.......!! 💝 किसी भी जन्म पत्रिका में राहू - केतु शुभ भी हो सकते है और अशुभ भी लेकिन इनकी अशुभता का कारण इनसे निर्मित कोई भी दोष कभी नहीं होता.....!! 🎈 किसी भी ग्रह द्वारा दिये जाने वाले परिणामों का निर्धारण उस ग्रह की विशेष स्थिति एवं भाव विशेष से संबंधों के आधार पर निर्धारित होता है .....!! 💗 जिन्हें हम लग्न कुंडली के अतिरिक्त , अन्य प्रमुख लग्नों , प्रमुख वर्ग कुंडलियों , संबंधित अष्टक वर्गों , राशि/ भाव अर्गला , विशेष वर्ष कुण्डली , समय विशेष की दशा , अंतरदशा ,गोचर सभी का एक साथ गहनता से कई कई स्तरों पर सम्मलित विश्लेषण करके ही देख सकते है !! 🍁 क्योकि जन्म कुंडली मे जैसा दिखता है वैसा हमेशा नही होता और जो होता है वह तो बहुत ही गहराई में ही छिपा है जिसे देख पाना गहन कुण्डली विश्लेषण से ही संभव होता है ......!! 💚 कुछ आसान , आवश्यक तथा सही समय पर किये गए सही उपाय , कुछ जन्म पत्रिका के अनुसार सकारात्मक ग्रहो का सहयोग और कुछ सही मार्ग का चयन और सही दिशा में किया गया परिश्रम । सुखी और खुशियों से भरा जीवन दे सकता है ....................!!!!!! 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹


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यस्मिन् जीवति जीवन्ति बहव: स तु जीवति | काकोऽपि किं न कुरूते चञ्च्वा स्वोदरपूरणम् || If the 'living' of a person results in 'living' of many other persons, only then consider that person to have really 'lived'. Look even the crow fill it's own stomach by it's beak!! (There is nothing great in working for our own survival) I am not finding any proper adjective to describe how good this suBAshit is! The suBAshitkAr has hit at very basic question. What are all the humans doing ultimately? Working to feed themselves (and their family). So even a bird like crow does this! Infact there need not be any more explanation to tell what this suBAshit implies! Just the suBAshit is sufficient!! *जिसके जीने से कई लोग जीते हैं, वह जीया कहलाता है, अन्यथा क्या कौआ भी चोंच से अपना पेट नहीं भरता* ? *अर्थात- व्यक्ति का जीवन तभी सार्थक है जब उसके जीवन से अन्य लोगों को भी अपने जीवन का आधार मिल सके। अन्यथा तो कौवा भी भी अपना उदर पोषण करके जीवन पूर्ण कर ही लेता है।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।

न भारतीयो नववत्सरोSयं तथापि सर्वस्य शिवप्रद: स्यात् । यतो धरित्री निखिलैव माता तत: कुटुम्बायितमेव विश्वम् ।। *यद्यपि यह नव वर्ष भारतीय नहीं है। तथापि सबके लिए कल्याणप्रद हो ; क्योंकि सम्पूर्ण धरा माता ही है।*- ”माता भूमि: पुत्रोSहं पृथिव्या:” *अत एव पृथ्वी के पुत्र होने के कारण समग्र विश्व ही कुटुम्बस्वरूप है।* पाश्चातनववर्षस्यहार्दिकाःशुभाशयाः समेषां कृते ।। ------------------------------------- स्वत्यस्तु ते कुशल्मस्तु चिरयुरस्तु॥ विद्या विवेक कृति कौशल सिद्धिरस्तु ॥ ऐश्वर्यमस्तु बलमस्तु राष्ट्रभक्ति सदास्तु॥ वन्शः सदैव भवता हि सुदिप्तोस्तु ॥ *आप सभी सदैव आनंद और, कुशल से रहे तथा दीर्घ आयु प्राप्त करें*... *विद्या, विवेक तथा कार्यकुशलता में सिद्धि प्राप्त करें,* ऐश्वर्य व बल को प्राप्त करें तथा राष्ट्र भक्ति भी सदा बनी रहे, आपका वंश सदैव तेजस्वी बना रहे.. *अंग्रेजी नव् वर्ष आगमन की पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं* ज्योतिषाचार्य बृजेश कुमार शास्त्री

आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताआलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।राम।

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