Foresight of our Ancestors

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DINESH SINGHAL 31st Oct 2020



*1 »*
लवणं व्यञ्जनं चैव घृतं तैलं तथैव च ।
लेह्यं पेयं च विविधं हस्तदत्तं न भक्षयेत् ।।
धर्मसिन्धू ३पू. आह्निक

*Salt, ghee, oil, rice and other food items should not be served with bare hand. Use spoons to serve.*

*2 »*
अनातुरः स्वानि खानि न स्पृशेदनिमित्ततः ।।
मनुस्मृति ४/१४४

*Without a reason don't touch your own indriyas (organs like eyes, nose, ears, etc.)*

*3 »*
अपमृज्यान्न च स्न्नातो गात्राण्यम्बरपाणिभिः ।।
मार्कण्डेय पुराण ३४/५२

*Don't use clothes already worn by you & dry yourself after a bath.*

*4 »*
हस्तपादे मुखे चैव पञ्चाद्रे भोजनं चरेत् ।।
पद्म०सृष्टि.५१/८८
नाप्रक्षालितपाणिपादो भुञ्जीत ।।
सुश्रुतसंहिता चिकित्सा २४/९८

*Wash your hands, feet, mouth before you eat.*

*5 »*
स्न्नानाचारविहीनस्य सर्वाः स्युः निष्फलाः क्रियाः ।।
वाघलस्मृति ६९

*Without a bath or Snan and Shudhi, all Karmas (duties) done are Nishphal (no use).*

*6 »*
न धारयेत् परस्यैवं स्न्नानवस्त्रं कदाचन ।।
पद्म० सृष्टि.५१/८६

*Don't use the cloth (like towel) used by another person for drying yourself after a bath.*

*7 »*
अन्यदेव भवद्वासः शयनीये नरोत्तम ।
अन्यद् रथ्यासु देवानाम् अर्चायाम् अन्यदेव हि ।।
महाभारत अनु १०४/८६

*Use different clothes while sleeping, while going out, while doing pooja.*

*8 »*
तथा न अन्यधृतं (वस्त्रं) धार्यम् ।।
महाभारत अनु १०४/८६

*Don't wear clothes worn by others.*

*9 »*
न अप्रक्षालितं पूर्वधृतं वसनं बिभृयाद् ।।
विष्णुस्मृति ६४

*Clothes once worn should not be worn again before washing.*

*10 »*
न आद्रं परिदधीत ।।
गोभिसगृह्यसूत्र ३/५/२४

*Don't wear wet clothes.*

*11 »*
चिताधूमसेवने सर्वे वर्णाः स्न्नानम् आचरेयुः।
वमने श्मश्रुकर्मणि कृते च।।
विष्णुस्मृति २२

*Take a bath on return from cremation ground. Take a bath after every haircut.*

_These precautions were taught to every Indian 5,000 years ago in the Sanatana Dharma . We were forewarned about importance of maintaining personal hygiene, when no microscopes existed, but our ancestors using Vedic knowledge prescribed these Dharma as *Sadhaachaaram* and followed these !_

*See in today's scenario how true these are*🙏🙏🙏


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rakeshperiwal

good


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आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताआलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।राम।

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